गाय पर निबंध हिन्दी में- Cow Essay in Hindi Language

दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपके लिए Essay on Cow in Hindi ( Gay par Nibandh) शेयर कर रहे है, हमने 100 words, 200 words, 250 words, 300 words and 500 words ke essay लिखे है जो की class 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 ke students | Vidyarthi ke liye upyogi hai.

In this article, we are providing information about Cow in Hindi. गाय पर पूरी जानकारी जैसे की आकार-प्रकार, स्वभाव, खाद्य-पदार्थ, उपयोगिता, गाय की नस्लें अदि के बारे बताया गया है। 

गाय पर निबंध | Cow Essay in Hindi Language

Cow Essay in Hindi 10 lines for class 1,2,3 ( 100 words )

1.गाय एक पालतू पशु है।

2. गाय अत्यन्त लाभदायक पशु है।

3. गायें कई रंगों की होती हैं।

4. गाय के दो सींग, दो कान, दो आँखें और एक पूँछ होती है।

5. गाय घास, भूसा और दाना खाती है।

6. गाय का दूध तो बहुत गुणकारी माना जाता है।

7. गाय का बछड़ा बड़ा होकर बैल कहलाता है।

8. संसार के विभिन्न देशों में भिन्न-भिन्न आकार-प्रकार की गायें पाई जाती हैं।

9. गाय सीधी सादी और सहज स्वभाव की होती है।

10. गाय हमारे लिये प्रकृति का एक वरदान है।

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Gay Par Nibandh Hindi Mein for class 4,5 ( 200 words )

गाय एक पालतू पशु है। गाय सफेद, काली, भूरी या चितकबरी कई रंग की होती है। गाय की पूँछ लम्बी होती है, जिससे वह अपने शरीर पर बैठने वाली मक्खियों को उड़ाती है तथा सींगों से अपनी रक्षा करती है। भारतीय हिन्दू इसे आदर की दृष्टि से देखते हैं और इसे ‘गो-माता’ कहते हैं। गाय स्वभाव से बड़ी सरल और भोली होती है। यह घास खाती है। घास के अतिरिक्त इसे खली, चने, बिनौले और भूसा भी खिलाया जाता है। इनसे वह दूध अधिक देती है।

गाय अत्यन्त लाभदायक पशु है। यह हमें दूध देती है। गाय का दूध आरोग्यदायक, स्फूर्तिदायक और शीघ्र पचने वाला होता है। दूध से ही दही, मक्खन, घी, मट्ठा और मावा बनाते हैं। मावे से अनेक प्रकार की मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। गाय का गोबर घरों को लीपने, उपले बनाने तथा खाद के काम आता है। गाय के मूत्र में अनेक रोगों की रोगनाशक शक्ति होती है।

गाय के बछड़े बड़े होकर बैल बनते हैं। वे हल चलाने तथा गाड़ी चलाने के काम आते हैं। इसकी खाल के जूते बनाये जाते हैं। सींगों से सरेस बनता है तथा हड्डियों से खाद बनाई जाती है। अतः हमें गाय की सेवा और रक्षा करनी चाहिए।

Cow Essay in Hindi in 250 words class 6

गाय भी एक पालतू पशु है। इसका दूध हल्का, स्वादिष्ट और मीठा होता है। रोगियों और नन्हे बच्चों के लिए यह दूध बहुत गुणकारी होता है। हमारे ऋषि, मुनि, साधु और सन्त गाय को बहुत मान देते हैं। भारत के लोग इसे माता कहते हैं। यह बड़ी भोली और सीधे स्वभाव की होती है। यह संसार के लगभग सभी देशों में पाई जाती है।

गायें कई रंगों की होती हैं। कोई सफेद होती है तो कोई काली। कोई भूरी होती है तो कोई चितकबरी। उसकी चार टाँगें और चार थन होते हैं। उसके दो सींग होते हैं। जिनसे वह अपनी रक्षा करती है। उसकी एक लंबी पूँछ होती है, जिससे वह अपने शरीर पर बैठी मक्खियों को उड़ाती है।

गाय घास, भूसा और दाना खाती है। कई लोग उसे रोटी तथा खरबूजा आदि फल भी खिलाते हैं। पहले वह भर पेट चारा खाती है, फिर वह खूब जुगाली करती है। जुगाली करते समय उसके मुँह से सफेद झाग निकलती है।

गाय हमें दूध देती है। दूध पीने में स्वादिष्ट और शक्तिवर्धक होता है। दूध से दही, पनीर, मक्खन और घी बनता है। गाय का दूध पीले रंग का होता है। अतः गाय के दूध से बनी मिठाई पीले रंग की होती है और इसका मक्खन भी पीले रंग का होता है।

गाय के बच्चे बड़े होकर बड़े काम आते हैं। गाय की बछिया बड़ी होकर गाय बन जाती है। गाय के बछड़े बड़े होकर बैल बनते हैं और खेत में हल चलाने के काम आते हैं। हमें गाय की सेवा करनी चाहिए।

Easy Cow Essay in Hindi in 250 for students

परिचय : गाय रीढ़धारी स्तनपायी पालतू चौपाया जानवर है। हिन्दू इसे आदर की दृष्टि से देखते हैं।

आकार : इसके चार पैर, दो कान, दो सींग, दो आँख एवं एक लम्बी पूँछ होती है। इसके खुर दो भागों में बँटे होते हैं। इसकी लम्बाई चार-पाँच हाथ तक होती है। गाय कई रंगों की होती है। जैसे- सफेद, मटमैली, काली और चितकबरी आदि। काली गाय ‘श्यामा’ कहलाती है।

स्वभाव : माय सरल और शान्त स्वभाव की होती है। यह पालने वाले के साथ खूब हिल-मिल जाती है। यह अपने बछड़े को चाट चाटकर प्यार करती है।

भोजन : गाय घास, भूसा, चोकर तथा बिचाली खाती है। यह किसी वस्तु को चबाकर नहीं खाती है बल्कि उसे निगल जाती है । बाद में निगली हुई वस्तु को चबा-चबाकर पागुर करती है।

उपयोगिता : गाय हमारे लिए बहुत उपयोगी है। इसका दूध अमृत तुल्य होता है। दूध से घी, मक्खन, मट्ठा, छेना, मलाई, खोवा तथा अनेक वस्तुएँ बनायी जाती हैं। इसके गाय के गोबर से उत्तम खाद एवं उपले बनते हैं। गाय के मरने के बाद भी उपयोगी है। इसके सींग और हड्डी से बटन और छुरी की बेंट बनती है। चमड़े से जूता, बैग आदि बनते हैं। गाय के नर बच्चे को बछड़ा कहते हैं। बछड़ा बड़ा होने पर बैल कहलाता है। बैल गाड़ी को खींचता है। वह हल जोता जाता है।

उपसंहार : गाय हमारी माता की तरह है। यह प्राचीनकाल से ही मनुष्य का उपकार करती आयी है। इसकी भली-भाँति देख-रेख करना हमारा परम कर्तव्य है।

Hindi Essay on Cow in 270 words class 7

गाय एक उपयोगी पशु है। यह एक पालतू पशु भी है और जंगल में नहीं पाया जाता। इसकी चार टांगे, एक लम्बी पूँछ, दो सींग, दो बड़ी-बड़ी आँखे और दो बड़े-बड़े कान होते हैं। आँखे तो बस देखने लायक होती हैं। यह अपनी लम्बी और घनी पूँछ का उपयोग मच्छर-मक्खी भगाने में करती है। यह कई रंगों की होती है, जैसे काली, सफेद, चितकबरी, भूरी, लाल और मटमैली।

गाय संसार के सभी भागों में पाई जाती है। पहाड़ी गाय मैदानी गाय से आकार में छोटी होती है। गाय का रंभाना भी कानों को अच्छा लगता है। गाय का गोबर घर-द्वार, चूल्हा-चक्की लीपने, उपले बनाकर जलाने और खेतों में खाद के काम आता है। आजकल गोबर-गैस का प्रयोग भी बढ़ रहा है। इसका चमड़ा भी बड़ा उपयोगी होता है।

गाय का दूध तो बहुत गुणकारी और हल्का माना जाता है। इसके दूध से तरह-तरह के पकवान, मिठाइयाँ, घी, मक्खन, पनीर आदि बनाये जाते हैं। दूध अपने आप में एक पूर्ण भोजन है।

धार्मिक देश भारतवर्ष में गाय का महत्त्व प्राचीनकाल से चला आ रहा है। इसे माँ के समान मानकर इसकी पूजा की जाती है। गौ सेवा धर्म माना जाता है। गोदान श्रेष्ठ दान माना जाता है। मरने वाले व्यक्ति के अंतिम समय में गोदान किया जाता है। गोवर्धन के दिन गाय के गोबर को जलाकर पूजते हैं। गौमूत्र औषधियों में भी प्रयोग किया जाता है।

गाय का बछड़ा बड़ा होकर बैल कहलाता है। बैल-गाड़ी खींचने, हल चलाने, बोझा ढोने आदि कामों में यह प्रयुक्त होता है। हमारे प्राचीन धर्मग्रंथों में गाय की बड़ी महिमा मिलती है। गौ-हत्या को बहुत बड़ा पाप माना गया है। सभी शुभ अवसरों पर हमारे यहाँ गोदान का विधान है।

lines cow essay

Essay on Cow in Hindi 300 words for class 8

गाय एक पालतू पशु है। यह पालतू पशुओं में सर्वाधिक उपयोगी पशु है। गाय सम्पूर्ण विश्व में देखी जा सकती है। यह भारत में पाया जाने वाला मुख्य घरेलू पशु है। भारतीय गायें अपने रंग, आकार तथा आकृति में अन्य देशों की गायों से भिन्न हो सकती हैं।

किसानों के जीवन का तो मुख्य आधार गाय है। यह किसानों के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। गाय शुद्ध शाकाहारी पशु है। यह घास, भूसा, खली, चारा खाती है तथा दूध देती है। गाय का दूध शरीर के लिये अत्यंत पौष्टिक होता है। किसान इसके गोबर का प्रयोग खेतों में खाद के रूप में करता है। गाय के गोबर से कंडे बनते हैं जो ईंधन के काम आते हैं। गाय के गोबर से अब तो उपयोगी गोबर गैस भी बनने लगी है। गाय का दूध, दही, मट्ठा, पनीर आदि बनाने के काम आता है। घी तथा विभिन्न मिठाइयाँ भी गाय के दूध से बनती हैं। गाय का दूध स्वयं में पूर्ण आहार है। नवजात शिशुओं के लिये यह दूध ही प्रयोग किया जाता है। यह हड्डियों को मजबूती तथा दिमाग को स्फूर्ति देता है। गाय की खाल का प्रयोग चमड़ा बनाने में होता है। इसके चमड़े से जूते, चप्पल, जैकेट आदि बनाई जाती हैं। वास्तव में यह अत्यंत थोड़ा भोजन करती है किन्तु बदले में यह इंसान को उसके उपयोग की बहुत सी वस्तुयें प्रदान करती है।

भारत में तो यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राणी है। श्रीकृष्ण के समय से ही गाय को एक उपयोगी पशु माना गया है। इसकी पूजा की जाती है। भारत में हिन्दू धर्म के अनुयायी गाय की पूजा करते हैं तथा इसे गौ माता कहते हैं। यह हमारी अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करती है। गाय का बछड़ा अब भी बहुत से स्थानों में हल जोतने के काम में लाया जाता है। यह अत्यंत सीधी होती है तथा किसी को हानि नहीं पहुँचाती है। हमारे लिये यह प्रकृति का एक वरदान है।

Long Essay on Cow in Hindi in 500 to 600 words for class 9,10,11,12

भूमिका

भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसलिए पशुओं की बहुत आवश्यक रही है और आज भी है। इन पशुओं में गाय का सबसे अधिक महत्व है। हिन्दू गाय को गोमाता मानते हैं। गोधन हमारे आर्थिक संसार का महत्वपूर्ण अंग है। अतीत-काल की ‘कामधेनु’ की महिमा कौन नहीं जानता है। गाय की उपयोगिता और गुणों के कारण हम उसे ‘गोमाता’ कहते हैं।

परिचय और आकार-प्रकार

गाय एक चौपाया पशु है। इसके दो सींग, दो कान, दो आँखें और एक पूँछ होती है। पूंछ से यह हाथ का काम लेती है। यह इससे मच्छड़ और मक्खियाँ उड़ाती है। इसके पैरों में खुर होते हैं। गाय के शरीर की लम्बाई लगभग चार-पाँच हाथ और उँचाई अढ़ाई-तीन हाथ होती है। इसकी पिछली दो टाँगों के बीच में चार थन होते हैं जिनसे दूध निकलता है।

गायें सफेद, काली, लाल, चितकबरी आदि कई रंगों की होती हैं। संसार के विभिन्न देशों में भिन्न-भिन्न आकार-प्रकार की गायें पाई जाती हैं। किन्हीं देशों की गायें बिना कूबड़ की, किन्हीं की बिना सींग की और किन्हीं की लम्बी पूंछ वाली होती हैं।

प्राप्ति स्थान

गाय प्रायः सारे संसार में पाई जाती है। हर प्रकार की प्राकृतिक अवस्था वाले क्षेत्रों में गाय उपलब्ध होती है। आस्ट्रेलिया, अमेरिका, यूरोप आदि देशों में पाई जाने वाली गाएँ अधिक दूध देने वाली होती हैं। हमारे देश में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब तथा गुजरात की गायें अच्छी नस्ल और दुधारू होती हैं।

स्वभाव

गाय सीधी सादी और सहज स्वभाव की होती है। यह अपने मालिक और बच्चों को बहुत प्रेम करती है। यह किसी को कष्ट और चोट नहीं पहुँचाती है। नन्हें-नन्हें बच्चे भी इससे घुलमिल जाते हैं। गाय अपने बच्चों को बहुत प्यार करती है। कुछ गायें अपने बच्चों के अभाव में दूध नहीं देती हैं।

खाद्य-पदार्थ

गाय शुद्ध शाकाहारी जानवर है। हरी घास और कोमल पौधे इसके प्रिय खाद्य-पदार्थ हैं। वैसे यह चोकर, अन्न, खली आदि भी बहुत चाव से खाती है। गाय खाद्य पदार्थ को सीधे निगल लेती है और फिर धीरे-धीरे जुगाली करके उसे पचाती है।

उपयोगिता

संसार में गाय सबसे उपयोगी जानवर है। गाय का दूध अमृत के समान महत्वपूर्ण है। उसमें जीवन-रक्षा के बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व होते हैं। गाय का दूध हर अवस्था के व्यक्ति के लिए लाभकारी है। मरीजों के लिए तो यह अमृत के समान है। गाय के गोबर और मूत्र को हिन्दू बहुत ही पवित्र मानते हैं। गाय के गोबर से लीपी गई जमीन को देवी-देवताओं के पूजन तथा दूसरे धार्मिक कामों के लिए पवित्र माना जाता है। गोमूत्र अनेक रोगों को दूर करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। गाय के दूध से मलाई, रबड़ी, मक्खन, घी, पनीर, छेना आदि चीजें बनाई जाती हैं। गाय के गोबर से खाद बनाई जाती है, जो फसल के लिए बहुत ही उपयोगी होती है। इसके गोबर से उपले बनाये जाते हैं, जो जलावन के काम आता है। गाय के मरने के बाद इसके शरीर से अनेक उपयोगी चीजें बनाई जाती हैं। गाय के चमड़े से जूते, सूटकेस, थैले आदि बनाए जाते हैं। गाय की हड्डियों से कलम, चाकू के बेंट तथा अन्य चीजें बनाई जाती हैं। इसके सींग से कंघी, बटन, कलम, खिलौने, आदि वस्तुएँ बनती हैं। गाय के बछड़े बड़े होकर हमारे बड़े काम में आते हैं। वे हमारी गाड़ी खींचते हैं, हल जोतते हैं और बोझा ढोते हैं। बैल हमारी खेती की रीढ़ हैं। इससे यह प्रमाणित होता है कि गाय हमारे लिए कितनी उपयोगी है। माता जैसे अपनी संतान का पालन-पोषण और उससे प्रेम करती है वैसे ही गाय हमारे लिए करती है। अत: उसे ‘गोमाता’ कहना बिलकुल सही है।

उपसंहार

ऊपर कही गयी बातों से लगता है कि गाय वास्तव में हमारी माता है, देवी है, पूजनीया है। गोबध हमारे देश में सबसे निन्दनीय एवं जघन्य अपराध है। गाय की उपयोगिता देखते हुए हमें गोधन की रक्षा करनी चाहिए और उसकी वंशवृद्धि के लिए हर स्तर पर प्रयत्न करना चाहिए। गाय को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, आर्थिक दृष्टि से भी रक्षा करने की आवश्यकता है।

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Hindi Yatra

गाय पर निबंध – Essay on Cow in Hindi

Essay on Cow in Hindi : दोस्तों आज हम ने गाय पर निबंध लिखा है जिस में हमने गाय की विशेषता उसके उपयोग गाय की नस्लें आदि के बारे में चर्चा की है.

अक्सर स्कूल के विद्यार्थियों को परीक्षाओं में Gay Per Nibandh  लिखने के लिए दिया जाता है यह निबंध उन सभी विद्यार्थियों को गाय के ऊपर निबंध लिखने में सहायता करेगा.

गाय पर लिखे गए निबंध की सहायता से कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11 और 12 के विद्यार्थियों को निबंध लिखने में सहायता होगी यह निबंध हमने विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए अलग अलग समय सीमा में लिखा है.

Essay on Cow in Hindi

Get Some Essay on cow in hindi for student under 100, 150, 300 and 700 words.

10 line Essay on Cow in Hindi

1. गाय एक पालतू जानवर है.

2. गाय के एक मुहं और दो कान होते है.

3. गाय के दो बड़ी आंखें होती है.

4. गाय का नाक बड़ा होता है.

5. गाय के एक लंबी पूछ होती है.

6. गाय के चार पैर होते है.

7. गाय के चार थन होते है.

8. गाय का शरीर बड़ा और पीछे से चौड़ा होता है.

9. गाय सुबह शाम स्वादिष्ट दूध देती है.

10. गाय सफेद, काले, भूरे, रंग की होती है.

Best Essay on Cow in Hindi 150 words

गाय हमारी पृथ्वी पर हजारों वर्षों से विद्यमान है. गाय को हिंदू धर्म में मां के समान माना गया है क्योंकि जिस प्रकार हमारी मां हमारा पूरा ख्याल रखती है उसी प्रकार गाय भी हमें स्वादिष्ट दूध देकर हमें हष्ट पुष्ट बनाती है.

गाय एक शाकाहारी जानवर है जिसको आमतौर पर घरों में पालतू पशु के रूप में पाला जाता है. यह बहुत ही शांत किस्म की होती है और हर प्रकार के वातावरण में यह आसानी से ढल जाती है. गाय को खाने में हरी घास, फूल, पत्ते और खल बहुत पसंद है.

गाय के दो सिंग होते है जिनकी सहायता से वह अपनी रक्षा करती है. गाय 1 दिन में 30 से 40 लीटर पानी पी जाती है. गाय के दो बड़े कान होते है. इसका एक बड़ा और चौड़ा मुख होता है.

इसके दो आंखें होती है. गाय के चार पैर और चार थन होते है. इसके एक लंबी पूछ होती है. गाय का शरीर बड़ा और हष्ट पुष्ट होता है.

Gay Per Nibandh / lekh 300 words

गाय पूरे विश्व भर में पाई जाती हैं और इसे पूरे विश्व में एक पालतू जानवर के रूप में ही पाला जाता है. हमारे भारत देश में गाय कोई हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है यहां पर गाय की हत्या करना एक बहुत बड़ा अपराध होता है.

हमारे देश के गांव के लगभग हर घर में गाय को पालतू पशु के रूप में पाला जाता है और इसका दूध निकाल कर बेचा जाता है. गाय बहुत ही सुंदर होती है यह सफेद, काले, भूरे इत्यादि रंगों में पाई जाती है. इसकी कद काठी प्रत्येक देश में अलग प्रकार की देखने को मिलती है.

यह हमेशा शांत रहती है लेकिन जब भी इसको खतरा महसूस होता है तो यह अपने सींगो की सहायता से अपनी रक्षा करती है. इसकी कद काठी बहुत ही सुदृढ़ होती है. गाय एक शाकाहारी पशु है जो कि खाने में हरा चारा खाती है.

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इसके शरीर पर अन्य जानवरों की अपेक्षा छोटे बाल होते है. गाय की दो बड़ी आंखें होती है. इसकी याददाश्त बहुत अच्छी होती है यह अपने मालिक को एक क्षण में पहचान लेती है. इसके दो बड़े-बड़े कान होते है. इसके चार पैर और एक पूछ होती है.

गाय के एक नाक एक मुंह होता है इसका सर चौड़ा होता है. यह अपने आप को हर प्रकार के वातावरण के अनुसार ढाल सकती है. इसके चार थन होते है जिनसे पोष्टिक दूध निकलता है. गाय के मुंह में ऊपर वाले जबड़े में दांत नहीं होते और इसके नीचे वाले जबड़े में 32 दांत होते है.

गाय भी इंसानों की तरह ही 9 महीने का गर्भ धारण करती है. एक व्यस्क गाय 1 दिन में 30 से 50 लीटर पानी पी जाती है. गाय एक बार चारा खाने के बाद पूरे दिन उसे चबाती रहती है यह 1 मिनट में लगभग 50 बार चबाती (जुगाली) करती है.

Essay on Cow in Hindi 700 words

प्रस्तावना –

गाय एक पालतू पशु है जो कि आमतौर पर सभी जगह पर पाई जाती है. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 190 मिलियन गायों की जनसंख्या है. पूरे विश्व भर से ज्यादा गाय हमारे भारत में ही पाई जाती है.

भारत में गाय को सम्मान की नज़रों से देखा जाता है क्योंकि हिंदू धर्म में कहा जाता है कि गाय के अंदर सभी 322 करोड़ देवताओं का वास होता है साथ ही भारत में रहने वाले लोगों ने गाय को मां की संज्ञा दी है. भारत में गाय का बहुत ख्याल रखा जाता है और गाय की पूजा भी की जाती है.

गाय का संबंध भगवान श्री कृष्ण से भी जुड़ा हुआ है क्योंकि उन्हें गाय बहुत पसंद थी और वे उन्हें खूब प्यार दुलार देते थे.

गाय की रचना –

गाय की रचना वैसे तो सभी देशों में समान ही पाई जाती है लेकिन गाय की कद काठी और नस्ल में फर्क होता है. कुछ गाय अधिक दूध देती हैं तो कुछ कम देते है. गाय का शरीर बहुत बड़ा होता है इसका वजन 720 किलो से भी अधिक होता है.

गाय का शरीर आगे से पतला और पीछे से चौड़ा होता है. गाय के दो बड़े कान होते हैं जिनकी सहायता से वे धीमी धीमी और अधिक तेज आवाज भी सुन सकती है. गाय के दो बड़ी आंखें होती हैं जिनकी सहायता से भी लगभग 360 डिग्री तक देख लेती है.

गाय एक चौपाया पशु है और चारों पैरों में खुर्र होते है जिसकी सहायता से भी किसी वे किसी भी कठोर स्थल पर चल सकती है. गाय का मुंह है ऊपर से चौड़ा और नीचे से पतला होता है. इसके पूरे शरीर पर छोटे-छोटे बाल होते है. गाय के एक लंबी पूछ होती है जिसकी सहायता से वे अपने शरीर पर लगी हुई मिट्टी को हटाती रहती है.

गाय के 4 थन होते हैं और इसकी गर्दन लंबी होती है. गाय के मुंह के सिर्फ निचले जबड़े में 32 दांत पाए जाते है इसीलिए गाय लंबे वक्त तक जुगाली कर के खाने को चबाती है. गाय के एक बड़ी नाक होती है. गाय के दो बड़े सिंग होते है.

गाय का उपयोग –

गाय एक पालतू पशु है इसलिए इसे घरों में पाला जाता है और सुबह शाम इसका दूध निकाला जाता है एक गाय एक समय में 5 से लेकर 10 लीटर दूध देती है कुछ अलग नस्ल की गाय अधिक दूध भी देती है.

पुराने जमाने में गायों को खेतों में हल जोतने के काम में भी लिया जाता था. गाय के दूध से दही छाछ पनीर और अन्य दूध से बनने वाली मिठाइयां बना सकते है.

गाय के गोबर को सुखाकर इंधन के काम में लिया जाता है साथ ही गाय की गोबर का उपयोग खेतों में खाद के रूप में भी प्रयोग किया जाता है.

वर्तमान में लोग गायों का मांस भी खाने लगे है जिसे “बीफ” कहा जाता है. गाय अपने पूरे जीवन भर में कुछ ना कुछ देती ही रहती है. गाय के मरणोपरांत इसकी हड्डियों से कई शिल्प कलाकृतियां बनाई जाती है और इसकी खालको सुखा कर चमड़े के रूप में उपयोग में लिया जाता है.

गाय के गोमूत्र को बहुत पवित्र माना गया है और इसके गोमूत्र को आयुर्वेदिक औषधियों के रूप में उपयोग में लिया जाता है जो कि कई बड़ी बीमारियों को जड़ से खत्म करने में कारगर है.

गाय की नस्लें –

भारत में कई प्रकार की नस्ल की गाय पाई जाती है. जिनमें कुछ अच्छे दूध देने वाली होती है तो कुछ मजबूत शरीर वाली होती हैं जिससे उनके बछड़े भी मजबूत शरीर वाले पैदा होते हैं और उनसे खेतों में हल जोतने के रूप में काम में लिया जाता है.

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भारत में पाई जाने वाली गाय की प्रमुख नस्लें – साहीवाल जाति, नागौरी, पवाँर, भगनाड़ी, राठी, मालवी, काँकरेज, सिंधी, दज्जल, थारपारकर, अंगोल या नीलोर इत्यादि है.

उपसंहार –

गाय शांतिप्रिय और पालतू पशु है हमारे भारत में गाय को मां का दर्जा इसीलिए दिया गया है क्योंकि यह में जीवन भर कुछ ना कुछ देती ही रहती है इसलिए हमें इसके जीवन से कुछ सीख लेनी चाहिए और हमेशा अपने जीवन को शांतिपूर्ण तरीके से जीना चाहिए और दूसरे लोगों से अच्छा व्यवहार करना चाहिए.

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13 thoughts on “गाय पर निबंध – Essay on Cow in Hindi”

It’s my pleasure to connect with you 👍

Aapka easy padh kar bahut khushi hui!

Thank you Usha Thakur

कुछ लोग गोयो को पलते नही बल्की गयौ का करोबार करते है इसके बारे मे भी लिखिए विशेषता तो सबको पता है।

Hum jald hi likhnge

Dhanyawad ye gay ke nibhand ke liy

Dhanyawad Àmåñ Sharma

धन्यवाद निबंध के लिए।

सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद अजोय

gay par egi nibhand

Hame khushi hui aap ko nibandh accha laga, aise hi hindi yatra par aate rahe dhanyawad.

Cow par sab nibandh janta h isko Google pr dalna kya tha!

jaruri nahi hai sabhi ko nibandh likhna aata ho.

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गाय पर निबंध हिंदी में | Cow essay in Hindi class 1-10

ये तो हम सभी जानते है। की हमारे शास्त्रों में गायों को माता का दर्जा दिया जाता है, और वो पूजनीय मानी जाती है। ये बात भी सत्य है, की गाय एक ऐसा पशु है। जो जीते जी तो उपयोगी होता है। उसके मरने के बाद भी कई उपयोगी चीजे बनाने के काम में लाई जाती है। ऐसा माना जाता है की गाय की उत्पत्ति समुद्र मंथन के द्वारा हुई थी। जिसे स्वर्ग में स्थान मिला था। हमारे पुराणों में भी गाए की महिमा का वर्णन मिलता है। गायों को माता कामधेनु की संज्ञा दी गई है।

गाय की शारीरिक बनावट

गाय का शरीर काफी बड़ा और शक्तिशाली होता हैं। गाय के चार पैर, दो आंख, दो कान, एक नाक, एक लंबी पूंछ, होती है। गाय के जबड़े के सिर्फ नीचे के हिस्से में दांत होते है। गाय के पैरो के खुर अलग – अलग होते है। गाय की दो आंखें होती है। जो बड़ी और खूबसूरत होती है। गाय एक ऐसा जानवर है जो पूरी दुनिया में पाया जाता है। बस इसकी प्रजाति अलग – अलग होती है। परंतु उपयोगिता सबकी एक समान ही होती है।

गाय की नस्ल और रंग के रूप में प्रकार

गाय की रंग और नस्ल के रूप में 30 प्रकार की प्रजाति पाई जाती। जिसमें मुख्य रूप से रेड सिंधी, साहिवाल, देवनी, गिर, थारपारकर, राठी, कांकरेज, मेवाती, हरियाणवी, नागौर, पवार, हासी हिसार, बचौर, आलमवाद, केनवारिया, खेरीगढ़, खिल्लारी, अमरतमहाल, दज्जल, धन्नी, हल्लीकर, भगनारी, कंगायम, मालवी, गावलाव, वेचूर, बरगूर, कृष्णा बेली, डांगी, है।

उपयोगिता के आधार पर तीन प्रकार की होती है। उपयोगिता के आधार पर गाय को तीन प्रकार में बांटा गया है।

1. दुग्धप्रधान एकांगी प्रकार की नस्ल – इस प्रकार की एकांगी प्रधान गाय दूध देने में अन्य गाय की तुलना में काफी बेहतर होती है। परंतु इनकी संतान यानी बछड़ा खेती के कार्यों में उपयोग में नही लाए जाते है।

2. वत्स प्रधान एकांगी प्रकार की नस्ल – इस प्रकार की गाय की नस्ले दूध तो कम देती है। परंतु इनके बछड़े कृषि कार्य के लिए बहुत उपयोगी कहलाते है।

3. सर्वागी प्रधान एकांगी प्रकार की नस्ल – इस प्रकार की गाय की नस्ले दूध देने के साथ ही इनकी संतान यानी बछड़े खेती के कार्य में भी उपयोग में लाए जाते है।

गाय का स्वभाव

हमारे भारत वर्ष में गाय को गौ माता के रूप में पूजा जाता है। गाय एक सीधी साधी जानवर कहलाती है। इसका स्वभाव बहुत ही सहज और सरल होता है। वह अपने मालिक और उसके परिवार वालो पर बहुत प्रेम बरसाती है। वो उन्हे कोई कष्ट या चोट नही पहुंचती है। छोटे छोटे बच्चे भी गाय से घुलमिल जाते है। गाय अपने बच्चे यानी बछड़ों को बहुत प्यार करती है। कभी कभी तो ऐसा भी होता है की अगर उसके बच्चे उसके साथ ना हो तो वो दूध तक नही देती है। गाय का स्वभाव प्रेम और स्नेह झलकता है। इसलिए हमे भी बदले में गाय माता को उतना ही प्रेम और स्नेह प्रदान करना चाहिए।

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गाय का भोजन

गाय घास, भूसा, खली, चुनी, दाना, आदि खाती है। गाय एक शाकाहारी पशु होती है। कई लोग यहा तक की घर में बनने वाली सर्वप्रथम रोटी भी गाय को ही खिलाई जाती है। क्युकी गाय पूजनीय होती है। उसे अन्न खिलाने में प्रथम स्थान प्रदान किया गया है। इसके साथ ही कुछ लोग गाय को फल आदि भी खिलाते है। गाय का स्वभाव ही है की पहले वो भर पेट चारा खाती है। उसके बाद वो जुगाली करती है। जुगाली करते वक्त उसके मुंह से झाग निकलता है।

धार्मिक रूप में गाय का महत्व

धार्मिक रूप में हिंदुओ की पूजा गाय के बिना अधूरी मानी जाती है। गाय के दूध से बने घी से दिया जलाया जाता है। इसके गोबर से बने कंडे का प्रयोग हवन आदि में उपयोग किया जाता है। तीज त्योहार में गाय के गोबर से लीपा जाता है। फिर उसपे देवताओं को विराजित किया जाता है। माना जाता है की गाय के अंदर 33 करोड़ देवताओं का वास होता है। कुछ लोगो की तो ये मान्यता है, की किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले गाय के दर्शन करना चाहिए जिससे सभी कार्य शुभ होते है।

गाय से अनगिनत लाभ है जैसे गाय दूध देती है जिससे दही, पनीर, घी, मक्खन और कई प्रकार के मिष्ठान बनाए जाते हैं। गाय के दूध से बहुत सारी मिठाईयां भी बनती हैं। जब उसका बछड़ा बड़ा हो जाता है तो बैल बनकर कृषि के काम आता है। गाय का गोबर खाद व ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। गाय के बछड़ा हल चलाने, बैलगाड़ी चलाने व राहत चलाने के काम में आता है। गाय के गोबर का प्रयोग उपले बनाने में, खेतों में खाद बनाने व कच्चे फर्श को लीपने में किया जाता है। गाय के मूत्र का प्रयोग कैंसर जैसी घटक बिमारियों के इलाज में भी उपयोग किया जाता है।

इस बात को तो हम सभी जानते है। की हिंदू समाज में गाय को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है। इसे पूजनीय माना जाता है। परंतु इस बात से भी हम अनभिज्ञ नही है की, गाय एक पालतू पशु है। जिसके प्रत्येक चीज चाहे, गोबर, दूध, मूत्र ही क्यों ना हो सभी हमारे काम आते है। इसलिए हम इंसानों को भी इस उपयोगी और महत्वपूर्ण पशु जो की देवता तुल्य है। उनकी अच्छे से देखभाल करें और उचित रूप से उनकी उपयोगिता का ध्यान रखे। और उसकी सेवा करके पुण्य कमाए।

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हिन्दी ज्ञान सागर

व्याकरण और सामान्य ज्ञान

गाय का निबंध

गाय पर निबंध | भारत में गायों का महत्व और संस्कृति में प्रतीक के रूप में

गाय इतनी दिलचस्प हैं क्योंकि वे अन्य जानवरों से बहुत अलग हैं। गाय दुनिया में सबसे आम जानवर है। सफेद गाय, काली गाय और भूरी गाय सहित विभिन्न प्रकार की गायें हैं। इस पोस्ट हमने काऊ पर एस्से | गाय पर लेख | गाय का निबंध हिंदी में  लाया है। हमें उम्मीद है की यह जानकारी आपको पसंद आएगी।

हमने गायों पर ध्यान केंद्रित करना चुना, क्योंकि यह शोध का एक लोकप्रिय विषय है और इसके बारे में जानने के इच्छुक लोग और अधिक जानना चाहते हैं।

गाय अद्भुत प्राणी हैं जो हमें कई लाभ प्रदान करती हैं। हमें उनके हर काम के लिए उनकी सराहना करनी चाहिए और उनके कल्याण की रक्षा के लिए काम करना चाहिए। आइए अपने जीवन में गायों को रखें – वे सब कुछ बेहतर बनाती हैं!

Table of Contents

गाय का निबंध हिंदी में (Gay per Nibandh, Cow par Lekh )

गाय इंसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं, इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। गायें वैश्विक खाद्य प्रणाली का अभिन्न अंग हैं, जो दूध और अन्य डेयरी उत्पाद प्रदान करती हैं जिनका हम उपभोग करते हैं।

वे हमारे लिए दूध, बगीचों और फसलों के लिए खाद प्रदान करते हैं। इसके अलावा, गायें मीथेन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं जो जलवायु परिवर्तन में योगदान करती हैं।

गाय किसी भी अन्य जानवर की तुलना में अधिक दूध का उत्पादन करती है और जैसे कि पनीर, आइसक्रीम, दही और यहां तक कि दूध के  विभिन्न उत्पादों के लिए उपयोग किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, वे गर्मी और ठंड के प्रतिरोध के लिए जाने जाते हैं और दुनिया भर के खेतों में चरते हुए पाए जा सकते हैं।

गायों का इतिहास :

गायों का सबसे पहला उल्लेख 10,000 ईसा पूर्व का है। भारत में सबसे पहले गायों को पालतू बनाया गया था। गाय हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म में एक केंद्रीय इकाई बन गई। इस्लामी आस्था में भी गाय की बहुत अहमियत है। गायों का उपयोग आज भी उनके दूध के लिए किया जाता है।

भारत में गायों का महत्व :

गाय भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे हिंदुओं द्वारा पवित्र माने जाते हैं और देश की खाद्य आपूर्ति का मुख्य आधार हैं।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 25% हिस्सा है। देश दुनिया की कुछ सबसे पुरानी और सबसे सम्मानित मवेशियों की नस्लों का भी घर है, जैसे ब्राह्मण और ठाकुर मवेशी।

भारत में गाय की पूजा क्यों की जाती है?

हमारे देश में गाय को माता के रूप में पूजा जाता है। गाय को पवित्र माना जाता है और सरकार द्वारा संरक्षित किया जाता है। भारत में कृषि के लिए भी गाय महत्वपूर्ण हैं। गाय के दूध का उपयोग दही, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है।

गाय भारतीय संस्कृति में प्रतीक के रूप में

1. भारतीय संस्कृति में गाय को एक पवित्र जानवर के रूप में देखा जाता है। इस के दूध को न केवल भोजन का स्रोत माना जाता है, बल्कि यह समाज में अपनी प्रतीकात्मक भूमिका के लिए भी पूजनीय है।

2. पूरे भारत में गाय के कई अलग-अलग नाम हैं, जिनमें गोजातीय, वचनमय या व्याघ्र शामिल हैं। भारतीय गाय संस्कृति के महत्व के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं।

3. गाय को अक्सर धार्मिक कला और मूर्तिकला में चित्रित किया जाता है, और यह लोकप्रिय रूप से मुद्रा और सरकार द्वारा जारी सामग्री के अन्य रूपों के प्रतीक के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

4. गाय को अक्सर हिंदू धर्मग्रंथों और पौराणिक कथाओं में भी चित्रित किया गया है, जहां यह गणेश उत्सव जैसे समारोहों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

5.  यह अपने आध्यात्मिक महत्व और सांस्कृतिक महत्व के कारण भारतीयों के दिलों में एक विशेष स्थान रखती है।

गाय हमारे लिए उपयोगी क्यों है? और इस से हमें क्या-क्या मिलता है?

मनुष्य के लिए गाय महत्वपूर्ण जानवर है क्योंकि यह हमें दूध और ईंधन प्रदान करती है। उनका उपयोग प्रजनन के लिए भी किया जाता है, और उनके दूध का उपयोग पनीर, आइसक्रीम, दही और अन्य डेयरी उत्पाद बनाने के लिए किया जा सकता है।

गाय को पालने से क्या फायदा?

इसे पालने के कई फायदे हैं, किसान और गाय दोनों के लिए। गाय दूध, ईंधन और अन्य डेयरी उत्पाद प्रदान करने में सक्षम हैं जिनका उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है।

इनका गोबर पौधों और रोगाणुओं को तोड़कर मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने में भी मदद करते हैं। इसके अतिरिक्त, वे प्राकृतिक उर्वरक प्रदान करते हैं जो फसल की पैदावार बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। कुल मिलाकर, गाय कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके समावेश से कई लाभ हो सकते हैं।

गाय के दूध के फायदे?

गाय का दूध पोषक तत्वों से भरपूर पेय है जिसके इंसानों के लिए कई फायदे हैं। गाय के दूध के कुछ प्रमुख लाभों में प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी सहित आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करना शामिल है; स्वस्थ हड्डियों और दांतों को बढ़ावा देना; और संज्ञानात्मक कौशल के विकास में सहायता करना।

इसके अतिरिक्त, गाय का दूध हृदय रोग, ऑस्टियोपोरोसिस, टाइप 2 मधुमेह और कुछ प्रकार के कैंसर को रोकने में मदद कर सकता है। वास्तव में, गाय का दूध सबसे महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थों में से एक है जो एक बच्चा खा सकता है।

गाय का गर्भकाल कितने दिन का होता है?

गाय का गर्भकाल लगभग नौ महीने का होता है।

गायों को आमतौर पर गर्भाधान के लगभग छह महीने बाद जन्म देने के लिए माना जाता है, हालांकि यह नस्ल और पर्यावरण के आधार पर भिन्न होता है। जन्म में कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक का समय लग सकता है, लेकिन औसतन एक बछड़े को जन्म देने में लगभग नौ महीने लगते हैं।

गाय की नस्ल कौन-कौन सी है?

गायों की कई नस्लें होती हैं और वे अपनी विशेषताओं में भिन्न होती हैं। कुछ सामान्य देसी गाय की नस्ल और विदेशी गायों की नस्लें जो सभी दुधारू गाय की नस्ल है, इस प्रकार है:-

1. पुंगनूर गाय :  पुंगनूर गाय या कामरूपी भारत में पाए जाने वाले मवेशियों की सबसे पुरानी नस्लों में से एक है। पुंगनूर गाय एक अनूठी नस्ल है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति तमिलनाडु में पुंगनूर के आसपास के क्षेत्र में हुई थी।

कामरूपी को मवेशियों की सबसे आदिम नस्लों में से एक माना जाता है और माना जाता है कि यह जंगली गोजातीय प्रजातियों (जंगली गाय) से निकली है जो कभी पूरे भारत में घूमती थीं। आज अनुमान है कि दुनिया में लगभग 1,000 कामरूपी गायें ही बची हैं।

पुंगनूर गाय की कीमत लगभग 65,000 रुपये से शुरू होती है। सबसे महंगी पुंगनूर गाय 65,000 रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध है।

2. गिर गाय: गिर नस्ल की गाय एक ऐसा जानवर है जो अपनी विशेषताओं के लिए जाना जाता है। जानवर अपनी लंबी गर्दन, छोटे शरीर और ऊंचे कूबड़ के लिए जाना जाता है।

गिर गाय की कीमत: गिर नस्ल की गाय की कीमत 10,000 रुपये से शुरू होती है। सबसे महंगी गिर गाय 500,000 रुपये में बिक्री है।

3. कपिला गाय: कपिला गाय राजस्थान, भारत के घास के मैदानों में एक प्रमुख प्रजाति है। ये मवेशी इस मायने में अद्वितीय हैं कि वे गोजातीय की एकमात्र ज्ञात प्रजाति हैं जिन्हें हिंदुओं द्वारा पवित्र माना जाता है। कपिला गाय भी दुनिया के उन कुछ जानवरों में से एक हैं जिनमें तपेदिक के लिए प्राकृतिक प्रतिरोध होता है।

4. कांकरेज गाय: कांकरेज गाय भारत के कर्नाटक राज्य में पाए जाने वाले मवेशियों की एक अनूठी नस्ल है। इन गायों के पास एक लंबा, झबरा कोट होता है। कांकरेज गायों को उनके उच्च दूध उत्पादन के लिए जाना जाता है और उन्हें मवेशियों की स्वास्थ्यप्रद नस्लों में से एक माना जाता है।

5. राठी गाय: राठी गाय मुख्य रूप से भारत में महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में पाए जाने वाले मवेशियों की एक अर्ध-जंगली नस्ल है। इन गायों को हिंदुओं द्वारा पवित्र माना जाता है, और इनका उपयोग धार्मिक समारोहों जैसे शादियों और त्योहारों के लिए किया जाता है।

राठी गाय का उपयोग दूध और ईंधन उत्पादन के लिए भी किया जाता है। राठी गाय की कीमत 12,000/- रुपये से शुरू होती है।

6. कामधेनु गाय: कामधेनु गाय को सभी गायों की माता माना जाता है। कहा जाता है कि कामधेनु गाय की उत्पत्ति बिहार के वैशाली जिले से हुई है। गाय अपनी पवित्रता के लिए हिंदुओं और बौद्धों द्वारा समान रूप से पूजनीय है।

कामधेनु गाय को अपने अनोखे रंग के कारण शाही सफेद गाय या कामधेनु के नाम से भी जाना जाता है। कामधेनु  गाय की कीमत 10,000/- रुपये से शुरू होती है।

7. साहिवाल गाय: साहीवाल गाय पाकिस्तान के साहिवाल क्षेत्र में पाई जाने वाली गायों की एक अनोखी नस्ल है। इन गायों को उनकी उच्च दूध उपज और रोगों के प्रतिरोध के कारण दुनिया में सबसे मूल्यवान माना जाता है।

साहीवाल गाय की भारत में कीमत करीब 70,000 रुपये से लेकर 75,000 रुपये तक है।

8. रेंडी गाय:   रैंडी गाय मवेशियों की एक दुर्लभ नस्ल है जिसे 1930 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका में विकसित किया गया था। नस्ल का नाम रान्डल सी. कोवान के नाम पर रखा गया है, जो गाय के  क्रॉस रचनाकारों में से एक थे।

गाय एक मजबूत और कठोर जानवर है जो चराई और डेयरी खेती सहित कृषि उद्देश्यों के लिए उपयुक्त है।

9. जर्सी गाय:  जर्सी गाय एक डेयरी नस्ल है जिसकी उत्पत्ति न्यू जर्सी में हुई थी। वे अपने दूध उत्पादन और नरम, गर्म दूध के लिए जाने जाते हैं। जर्सी गाय की कीमत 8,000/- रुपये से लेकर 1,50,000/- लाख तक हो सकती है।

10. ब्राउन स्विस गाय: ब्राउन स्विस गाय एक डेयरी नस्ल है जिसे 18वीं शताब्दी में स्विट्जरलैंड में विकसित किया गया था। गाय को उसके घने, भारी, भूरे रंग के कोट के लिए जाना जाता है जो शरीर और पैरों को ढकता है।

गायों को उनके बड़े, चिकने सिर और लंबी गर्दन के लिए भी जाना जाता है। वे घास के मैदान या पहाड़ी चरागाहों के लिए अच्छी तरह से अनुकूल हैं, और आमतौर पर कोमल और प्रबंधन में आसान होते हैं।

11. एबरडीन एंगस गाय: एबरडीन एंगस गाय दुनिया में गायों की सबसे लोकप्रिय नस्लों में से एक है। एबरडीन एंगस को 19वीं शताब्दी के मध्य में स्कॉटलैंड के एबरडीनशायर में विकसित किया गया था।

एबरडीन एंगस एक कठोर और बहुमुखी गाय है जो समशीतोष्ण और ठंडी जलवायु दोनों के लिए उपयुक्त है। एबरडीन एंगस अपने उच्च दूध उत्पादन और बटरफैट सामग्री के लिए भी जाना जाता है।

12. होल्स्टीन या एचएफ गाय: होल्स्टीन गाय नस्ल एक गोमांस मवेशी नस्ल है जिसे 18 वीं शताब्दी में विकसित किया गया था जो अब होल्स्टीन, जर्मनी में है। आज, होल्स्टीन गाय की नस्ल दुनिया में सबसे लोकप्रिय गाय की नस्ल है।

होल्स्टीन-फ्रेज़ियन गाय एक डेयरी गाय की नस्ल है। गायों को उनके बड़े, गोल शरीर और लंबे, सीधे सींगों के लिए जाना जाता है। उन्हें सबसे बहुमुखी डेयरी नस्लों में से एक माना जाता है, जो उच्च गुणवत्ता वाले दूध का उत्पादन करने में सक्षम हैं।

एचएफ गाय की कीमत: एचएफ गाय, जिसे एक संवेदनशील जानवर के रूप में भी जाना जाता है, अपनी नस्ल के उच्च तापमान का सामना करने में असमर्थ है। बता दें कि इसका दूध रोजाना 25 से 30 लीटर देता है और इसमें फैट की मात्रा 3.5 फीसदी ही होती है। करीब 40 से 60 हजार रुपये में मिलने वाली एचएफ गाय भैंस की नस्ल से आती है।

13. हियरफोर्ड गाय : हियरफोर्ड गाय एक कठोर, लाल और सफेद डेयरी नस्ल है जिसकी उत्पत्ति इंग्लैंड में हुई थी। वे अपने बड़े फ्रेम, कोमल स्वभाव और मध्यम दूध उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।

14. गायों के अन्य नस्लें: सिंधी, काँकरेज, मालवी, नागौरी, थारपारकर, पवाँर, भगनाड़ी, दज्जल, गावलाव, हरियाना, अंगोल या नीलोर और सिरी आदि है।

गाय की देखभाल कैसे करें

गाय की उचित देखभाल आपके खेत को सुचारू रूप से चलाने में मदद कर सकती है और गुणवत्ता वाले दूध, ईंधन और अन्य उत्पादों का उत्पादन करने में मदद कर सकती है।

यदि आप एक गाय पाल रहे हैं, तो कुछ बुनियादी देखभाल प्रथाएं हैं जिनका पालन आपको यह सुनिश्चित करने के लिए करना चाहिए कि जानवर स्वस्थ और खुश है। गायों के कई अलग-अलग प्रकार होते हैं, इसलिए नस्ल के आधार पर आपकी देखभाल कुछ भिन्न हो सकती है।

1. गाय की देखभाल में पहला कदम उसे सही मात्रा में खाना खिलाना है। अपनी गाय को पर्याप्त घास, पुआल, या ताजी सब्जियां और खनिज (जैसे नमक) खिलाएं।

2. अपनी गाय को नियमित रूप से पानी दें और संदूषण के किसी भी संकेत के लिए उसके पानी के कुंड की जाँच करें। गाय की खाद पानी की आपूर्ति को खराब कर सकती है, इसलिए कुंडों को अक्सर साफ करना सुनिश्चित करें।

3. गाय की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाना भी जरूरी है।

4. यदि आपके पास एक से अधिक गाय हैं, तो सुनिश्चित करें कि उनके पास घूमने और चरने के लिए पर्याप्त जगह है।

5. अपनी गाय को साफ और सूखे क्षेत्र में, हो सके तो चारागाह में रखें।

6. शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करके और तेज आवाज या अचानक हलचल से बचकर अपनी गाय के लिए तनाव कम करें।

7. समय-समय इसे मवेशी डाक्टर को दिखाएं, यदि कोई बीमारी होतो इसका उपचार करें।

आहार: गाय क्या खाती है और यह उन्हें कैसे प्रभावित करती है।

गाय मुख्य रूप से शाकाहारी होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे पौधों को खाती हैं।  गाय के आहार सेवन का प्राथमिक स्रोत घास है। घास में फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो गायों को स्वस्थ रखने और उनकी भूख को संतुष्ट करने में मदद करती है। इसके अलावा, घास प्रोटीन, खनिज, विटामिन और कार्बोहाइड्रेट जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती है।

घास में लाभकारी बैक्टीरिया भी होते हैं जो गायों द्वारा पाचन के लिए आवश्यक सरल अणुओं में जटिल को तोड़ने में मदद करते हैं। इन कारकों के संयोजन से गाय के आहार को ग्रह पर स्वास्थ्यप्रद बनाने में मदद मिलती है।

कैसे बनाएं स्वादिष्ट और सेहतमंद भारतीय शैली के गाय के दूध का पेय?

यदि आप आनंद लेने के लिए एक स्वस्थ और स्वादिष्ट पेय की तलाश में हैं, तो आपको भारतीय शैली का गाय का दूध पीने का प्रयास करना चाहिए। यह पेय उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो एक स्वादिष्ट पेय का आनंद लेते हुए अपनी प्रोटीन और कैल्शियम की जरूरतों को पूरा करना चाहते हैं। इस पेय को बनाने के तरीके यहां दिए गए हैं:

1. एक बर्तन में या माइक्रोवेव में थोड़ा पानी गर्म करें। जब पानी गर्म हो जाए तो इसमें गाय के दूध और फल के टुकड़े डालें और तब तक चलाएं जब तक कि यह पूरी तरह से मिक्स न हो जाए।

2. इसके बाद, मिश्रण को एक कप या मग में डालकर कम से कम 2 घंटे या रात भर के लिए फ्रिज में रख दें। यह पेय को गाढ़ा करने में मदद करेगा।

3. अंत में, अपने ताज़ा बने भारतीय शैली के गाय के दूध के पेय का आनंद लें!

विश्व के प्रमुख भौगोलिक उपनाम | शहरों के उपनाम

बच्चों के लिए गाय पर 10 लाइन निबंध

गाय पर लेख | Gay per lekh | Gay per nibandh 10 Points :-

1. गाय एक पालतू पशु है , जिसे मानव जाति के लिए उपयोगी माना जाता है।

2. यह हमें स्वस्थ और मीठा दूध देती है जो हमारे शरीर के लिए प्रोटीन और अन्य महत्वपूर्ण पोषण से भरा होता है।

3. यह मुख्य रूप से विभिन्न डेयरी उत्पादों जैसे दूध, घी और पनीर प्रदान करने के लिए पशुधन के रूप में उपयोग किया जाता है।

4. यह दुनिया में विभिन्न रंगों, आकृतियों और प्रकारों में पाई जाती है।

5. भारत में, गाय को हिंदुओं द्वारा पवित्र जानवर माना जाता है और प्राचीन काल से उनके द्वारा पूजा की जाती है।

6. इसके दो कान, दो आँखें, एक बड़ी नाक, दो तेज सींग, एक लंबी पूंछ और चार पैर होते हैं।

7. यह ताजा घास, भूसा, अनाज और सब्जियां खाती है।

8. गाय का दूध मानव उपभोग के लिए बहुत ही पौष्टिक और फायदेमंद है।

9. नियमित रूप से गाय का दूध पीने से हमारा दिमाग तेज होता है और इम्युनिटी पावर बढ़ती है।

10. गाय के गोबर का उपयोग लोग पौधों के लिए उर्वरक और कीटों को खदेड़ने के लिए और ईंधन के रूप में करते हैं।

जानिए एटीएम से पर्सनल लोन कैसे लें, लोन लेने के फायदे और नुकसान क्या-क्या है?

गाय भारतीय संस्कृति और समाज का एक अभिन्न अंग हैं। और धार्मिक समारोहों में उपयोग किए जाते हैं। जबकि कुछ लोग यह तर्क दे सकते हैं कि गायों को मनुष्यों के समान दर्जा दिया जाना चाहिए, मेरा मानना है कि उनके साथ सम्मान और देखभाल का व्यवहार किया जाना चाहिए।

आइए भारत की गायों की रक्षा करने और उनका कल्याण सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करें।

हमें उम्मीद है कि आपने गायों पर हमारे लेख का आनंद लिया होगा। हमें उम्मीद है कि आपको यह लेख जानकारीपूर्ण लगा और हम आपसे सुनना पसंद करेंगे!

यदि आपके पास गाय पर निबंध से जुड़ा हुआ कोई जानकारी या कोई और प्रश्न या टिप्पणी है, तो कृपया हमसे कभी भी संपर्क करें। पढ़ने के लिए धन्यवाद और हम आशा करते हैं कि आप हमारे ब्लॉग पर अपने समय का आगे भी आनंद लेंगे!

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20 Must-Read Queer Essay Collections

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Laura Sackton

Laura Sackton is a queer book nerd and freelance writer, known on the internet for loving winter, despising summer, and going overboard with extravagant baking projects. In addition to her work at Book Riot, she reviews for BookPage and AudioFile, and writes a weekly newsletter, Books & Bakes , celebrating queer lit and tasty treats. You can catch her on Instagram shouting about the queer books she loves and sharing photos of the walks she takes in the hills of Western Mass (while listening to audiobooks, of course).

View All posts by Laura Sackton

I love essay collections, and I love queer books, so obviously I love queer essay collections. An essay collection can be so many things. It can be an opportunity to examine one particular subject in depth. Or it can be a wonderful messy mix of dozens of themes and ideas. The books on this list are a mix of both. Some hone in on an author’s own life, while others look outward, examining current events, history, and pop culture. Some are funny, some are very serious, and some are decidedly both.

In making this list, I used two criteria: 1) queer authors and 2) queer content. There are, of course, plenty of wonderful essay collections out there by queer authors that aren’t about queerness. But this list focuses on essays that explore queerness in all its messy glory. You’ll also find essays here about many other things: tornadoes, step-parenthood, the internet, tarot, activism, online dating, to name just a few. But taken together, the essays in each of these books add up to a queer whole.

I limited myself to living authors, and even so, there were so many amazing queer essay collections I wanted to include but couldn’t. This is just a drop in the bucket, but it’s a great place to start if you need more queer essays in your life — and who doesn’t?

Personal Queer Essay Collections

How to Write an Autobiographical Novel- Essays by Alexander Chee

How to Write An Autobiographical Novel by Alexander Chee

It’s hard for me to put my finger on the thing that elevates an essay collection from a handful of individual pieces to a cohesive book. But Chee obviously knows what that thing is, because this book builds on itself. He writes about growing roses and working odd jobs and AIDS activism and drag and writing a novel, and each of these essays is singularly moving. But as a whole they paint a complex portrait of a slice of the writer’s life. They inform and converse with each other, and the result is a book you can revisit again and again, always finding something new.

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I Hope We Choose Love by Kai Cheng Thom

In this collection of beautiful and thought-provoking essays, Kai Cheng Thom explores the messy, far-from-perfect realties of queer and trans communities and community movements. She writes about what many community organizers, activists, and artists don’t want to talk about: the hard stuff, the painful stuff, the bad times. It’s not all grim, but it’s very real. Thom addresses transphobia, racism, and exclusion, but she also writes about the particular joys she’s found in creating community and family with other queer and trans people of color. This is a must-read for anyone involved in social justice work, or immersed in queer community.

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Here For It by R. Eric Thomas

If you enjoy books that blend humor and heartfelt wisdom, you’ll love this collection. R. Eric Thomas writes about coming of age as a writer on the internet, his changing relationship to Christianity, the messy intersections of his queer Black identity. It’s a lovey mix of grappling and quips. It’s full of pop culture references and witty asides, as well as moving, vulnerable personal stories.

Cover of The Rib Joint by Julia Koets

The Rib Joint by Julia Koets

This slim memoir-in-essays is entirely personal. Although Koets does weave some history, pop culture, and religion into the work — everything from the history of organs to Sally Ride — her gaze is mostly focused inward. The essays are short and beautifully written; she often leaves the analysis to the reader, simply letting distinct and sometimes contradictory ideas and images sit next to each other on the page. She writes about her childhood in the South, the hidden and often invisible queer relationships she had as a teenager and young adult, secrets and closets, and the tensions and overlaps between religion and queerness.

July 2018 book covers

I Can’t Date Jesus by Michael Arceneaux

This is another fantastic humorous essay collection. Arceneaux somehow manages to be laugh-out-loud funny while also delivering nuanced cultural critique and telling vulnerable stories from his life. He writes about growing up in Houston, family relationships, coming out, and so much more. The whole book wrestles with how to be a young Black queer person striving to make meaning in the world. His second collection, I Don’t Want to Die Poor , is equally wonderful.

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Tomboyland by Melissa Faliveno

If you’re wondering, this is the book that contains an essay about tornadoes. It also contains a gorgeous essay about pantry moths (among other things). Those are just two of the many subjects Faliveno plumbs the depths of in this remarkable book. She writes about gender expression and how her relationship with gender has changed throughout her life, about queer desire and family, about Midwestern culture, about place and home, about bisexuality and bi erasure. Her far-ranging essays challenge mainstream ideas about what queer lives do and do not look like. She asks more questions than she answers, delving into the murky terrain of desire and identity.

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Something That May Shock and Discredit You by Daniel M. Lavery

Is this book even an essay collection? It is, and it isn’t. Some of these pieces are deeply personal stories about Lavery’s experience with transition. Others are trans retellings of mythology, literature, and film. All of it is weird and smart and impossibly to classify. Lavery examines the idea of transition from every angle, creating new stories about trans history, trans identity, and transformation itself.

Brown White Black: An American Family at the Intersection of Race, Gender, Sexuality, and Religion by Nishta J. Mehra book cover

Brown White Black by Nishta J. Mehra

If there’s one thing I love most in an essay collection, it’s when an author allows contradictions and messy, fraught truths to live next to each other on the page. I love when an essayist asks more questions than they answer. That’s what Mehra does in this book. An Indian American woman married to a white woman and raising a Black son, she writes with openness and curiosity about her particular family. She explores how race, sexuality, gender, class, and religion impact her life and most intimate relationships, as well as American culture more broadly.

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Blood, Marriage, Wine, & Glitter by S. Bear Bergman

This essay collection is an embodiment of queer joy, of what it means to become part of a queer family. Every essay captures some aspect of the complexity and joy that is queer family-making. Bergman writes about being a trans parent, about beloved friends, about the challenges of partnership, about intimacy in myriad forms. His tone is warm and open-hearted and joyful and celebratory.

Cover of Forty-Three Septembers by Jewelle Gómez

Forty-Three Septembers by Jewelle Gómez

In these contemplative essays, Jewell Gómez explores the various pieces of her life as a Black lesbian, writing about family, aging, and her own history. Into these personal stories she weaves an analysis of history and current events. She writes about racism and homophobia, both within and outside of queer and Black communities, and about her life as an artist and poet, and how those identities, too, have shaped the way she sees the world.

Cover of Pass With Care by Cooper Lee Bombardier

Pass With Care by Cooper Lee Bombardier

Set mostly against the backdrop of queer culture in 1990s San Francisco, this memoir in essays is about trans identity, being an artist, masculinity, queer activism, and so much more. Bombardier brings particular places and times to life (San Francisco in the 1990s, but other places as well), but he also connects those times and experiences to the present in really interesting ways. He recognizes the importance of queer and trans history, while also exploring the possibilities of queer and trans futures.

Care Work cover image

Care Work by Leah Lakshmi Piepzna-Samarasinha

This is a beautiful, rigorous collection of essays about disability justice centering disabled queer and trans people of color. From an exploration of the radical care collectives Piepzna-Samarasinha and other queer and trans BIPOC have organized to an essay where examines the problems with the “survivor industrial complex,” every one of these pieces is full of wisdom, anger, transformation, radical celebration. It challenged me on so many levels, in the best possible way. It’s a must read for anyone engaged in any kind of activist work.

I'm-Afraid-of-Men-shraya-cover

I’m Afraid of Men by Vivek Shraya

I’m cheating a little bit here, because technically I’d classify this book as one essay, singular, rather than a collection of essays. But I’m including it anyway, because it is brilliant, and because I think it exemplifies just what a good essay can do, what a powerful form of writing it can be. By reflection on various experiences Shraya has had with men over the course of her life, she examines the connections and intersections between sexism, transmisogyny, toxic masculinity, and sexual violence. It’s a heavy read, but Shraya’s writing is anything but. It’s agile and graceful, flowing and jumping between disparate thoughts and ideas. This is a book-length essay you can read in one sitting, but it’ll leave you with enough to think about for many days afterward.

Gender Failure by Rae Spoon and Ivan Coyote

Gender Failure by Ivan E. Coyote and Rae Spoon

In this collaborative essay collection, trans writers and performers Ivan E. Coyote and Rae Spoon play with both gender and form. The book is a combination of personal essays, short vignettes, song lyrics, and images. Using these various kinds of storytelling, they both recount their own particular journeys around gender — how their genders have changed throughout their lives, the ways the gender binary has continually harmed them both, and the many communities, people, and experiences that have contributed to joyful self-expression and gender freedom.

The Groom Will Keep His Name by Matt Ortile

The Groom Will Keep His Name by Matt Ortile

Matt Ortile uses his experiences as a gay Filipino immigrant as a lens in these witty, insightful, and moving essays. By telling his own stories — of dating, falling in love, struggling to “fit in” — he illuminates the intersections among so many issues facing America right now (and always). He writes about the model minority myth and many other myths he told himself about assimilation, sex, power, what it means to be an American. It’s a heartfelt collection of personal essays that engage meaningfully, and critically, with the wider world.

cover of wow, no thank you. by Samantha Irby

Wow, No Thank You by Samantha Irby

I’m not a big fan of humorous essays in this vein, heavy on pop culture references I do not understand and full of snark. But I absolutely love Irby’s books, which is about the highest praise I can give. I honestly think there is something in here for everyone. Irby is just so very much herself: she writes about whatever the hell she wants to, whether that’s aging or the weirdness of small town America or snacks (there is a lot to say about snacks). And whatever the subject, she’s always got something funny or insightful or new or just super relatable to say.

Queer Essay Anthologies

Cover of She Called Me Woman by Azeenarh Mohammed

She Called Me Woman Edited by Azeenarh Mohammed, Chitra Nagarajan, and Aisha Salau

This anthology collects 30 first-person narratives by queer Nigerian women. The essays reflect a range of experiences, capturing the challenges that queer Nigerian women face, as well as the joyful lives and communities they’ve built. The essays explore sexuality, spirituality, relationships, money, love, societal expectations, gender expression, and so much more.

gay par essay

Untangling the Knot: Queer Voices on Marriage, Relationships & Identity by Carter Sickels

When gay marriage was legalized, I felt pretty ambivalent about it, even though I knew I was supposed to be excited. But I have never wanted or cared about marriage. Reading this book made me feel so seen. That’s not to say it’s anti-marriage — it isn’t! It’s a collection of personal essays from a diverse range of queer people about the families they’ve made. Some are traditional. Some are not. The essays are about marriages and friendships, parenthood and siblinghood, polyamorous relationships and monogamous ones. It’s a book that celebrates the different forms queer families take, never valuing any one kind of family or relationship over another.

Cover of Nonbinary by Micah Rajunov and Scott Duane

Nonbinary: Memoirs of Gender and Identity Edited by Micah Rajunov and Scott Duane

This book collects essays from 30 nonbinary writers, and trans and gender-nonconforming writers whose genders fall outside the binary. The writers inhabit a diverse range of identity and experience in terms of race, age, class, sexuality. Some of the essays are explicitly about gender identity, others are about family and relationships, and still others are about activism and politics. As a whole, the book celebrates the expansiveness of trans experiences, and the many ways there are to inhabit a body.

Cover of Moving Truth(s) edited by Aparajeeta Duttchoudhury

Moving Truth(s): Queer and Transgender Desi Writings on Family Edited by Aparajeeta ‘Sasha’ Duttchoudhury and Rukie Hartman

This anthology brings together a collection of diverse essays by queer and trans Desi writers. The pieces explore family in all its shapes and iterations. Contributors write about community, friendship, culture, trauma, healing. It’s a wonderfully nuanced collection. Though there is a thread that runs through the whole book — queer and trans Desi identity — the range of viewpoints, styles and experiences represented makes it clear how expansive identity is.

Looking for more queer books? I made a list of 40 of my favorites . If you’re looking for more essay collections to add to your list, check out 10 Must-Read Essay Collections by Women , and The Best Essays from 2019 . And if you’re not in the mood for a whole book right now, why not try one of these free essays available online (including some great queer ones)?

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The LGBTQ community has been at the forefront of a societal revolution, advocating for rights, recognition, and acceptance. This argumentative essay delves into the essential reasons behind supporting and empowering the LGBTQ community, exploring the quest for equality, the promotion of diversity, and the imperative...

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27 Must-Read Queer Essays From 2016

Noah Michelson

Editorial Director, HuffPost Personal

A lot can happen in twelve months. From the Pulse nightclub massacre to the controversy over transgender people using public restrooms , 2016 was a challenging year (to say the least) for the queer community. Many LGBTQ people spoke out about these events in hopes of clearing their minds, starting conversations and finding progressive paths forward.

Below are excerpts from 26 of the best queer essays published on The Huffington Post in 2016 by contributors to the site. The topics tackled include the big news stories of the year as well as smart and personal takes on issues like kink and masculinity that are all too frequently ignored. Check out a sample from each piece and then click through to read the full essay.

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College Nut

Good College Essays About Being Gay: A Deep Dive into Authenticity and Identity

Understanding the importance of college essays.

College essays are an essential aspect of the college application process, providing a platform for students to showcase their personality, experiences, and achievements. It is an opportunity for students to present themselves beyond their grades, test scores, and extracurricular activities. The college essay offers a glimpse into the student’s life, values, and aspirations. It is a chance to set oneself apart from the thousands of other applicants vying for admission.

The Stigma Surrounding LGBTQ+ Students

The LGBTQ+ community has faced social stigmas for centuries. While significant progress has been made towards acceptance, it remains a difficult topic to navigate. Despite the increasing visibility and acceptance of LGBTQ+ individuals, the process of coming out and being true to oneself can be challenging, particularly for young people. College essays provide an opportunity to share the LGBTQ+ experience with those who may not understand it, thus increasing awareness and promoting acceptance.

Authenticity is Key

The most important aspect of writing a college essay is being authentic. Authenticity is essential because it not only reflects the student’s true self, but it also helps the admissions committee get a sense of who the student is beyond their application. It is crucial to avoid presenting a false image of oneself in the essay, as it can lead to disappointment and rejection if the student does not live up to that image in real life. Students should focus on writing honestly and passionately about their experiences, values, and aspirations.

Tips for Authentic Writing

  • Write from the heart and tell your story.
  • Avoid trying to fit into a mold or writing what you think the admissions committee wants to hear.
  • Be specific and detailed in your writing to help the reader visualize your experiences.
  • Use vivid language to convey your emotions and feelings.
  • Show, don’t tell. Use anecdotes to illustrate your points.

Writing about Being Gay

Writing a college essay about being gay can be a daunting task. It requires a delicate balance between authenticity, vulnerability, and advocacy. It can be challenging to navigate the complexities of being LGBTQ+ and the impact it has on one’s personal and social life. However, it is an opportunity to provide a unique perspective on the LGBTQ+ experience and to promote understanding and acceptance.

Dos and Don’ts

  • Do write about your experiences and how they have shaped you.
  • Do share your feelings and emotions about your sexuality.
  • Do advocate for the LGBTQ+ community and promote acceptance.
  • Don’t write about being gay as if it is a choice or a phase.
  • Don’t focus solely on the negative aspects of being gay.
  • Don’t use offensive language or make derogatory remarks about others.

Conclusion: Embracing Your Identity

In conclusion, writing a good college essay about being gay requires authenticity, vulnerability, and advocacy. It is an opportunity to showcase one’s true self and provide a unique perspective on the LGBTQ+ experience. Writing about being gay can be challenging, but it is also a chance to promote understanding and acceptance. Embracing one’s identity and sharing it with others can be a transformative experience for both the writer and the reader.

Gay - List of Free Essay Examples And Topic Ideas

The term “gay” often refers to a sexual orientation towards the same gender. Essays could discuss the history of gay rights, societal attitudes towards homosexuality, the experiences of gay individuals, or the representation of gay characters in media and literature. We have collected a large number of free essay examples about Gay you can find in Papersowl database. You can use our samples for inspiration to write your own essay, research paper, or just to explore a new topic for yourself.

Rhetorical Analysis of Roxane Gay’s “Bad Feminist”

“Yes, I am a feminist. No, I don’t hate men” writes author, Roxane Gay, from her essay “Bad Feminist”. In the essay, she examines feminism and its culture trends. She informs her audience by explaining her views as a feminist and her beliefs in equality. Gay effectively appeals to her audience by using real life examples of strong feminists citing Elizabeth Wurtzel, displaying through words of what feminists desire but tries to stay away from, and establishing through personal experiences […]

Civil Rights Regarding Gay Rights

The twenty-first century is one of the most vibrant periods in history when it comes to civil rights. This is especially in the United States where the ideology concerning civil rights has been emphasized and highly recognized. The fight for civil rights in America is a journey that has last for many decades and has brought with it many positive changes to the American people in terms of minimizing discrimination (Ware, 2012). Even so, the widened awareness and protection of […]

How are LGBT+ People Portrayed in the Media?

How gay men and lesbians are presented in the media has been one of the most abundant areas of analysis and research within homosexual studies as well as a queer theory since the 1970s (Gudelunas). Although in a relatively recent area of study, this work is considered essential for a better understanding of how a modern gay and lesbian identity was shaped, reflected, and at times ignored by mainstream media (Hoffman). In the United States and soon to be everywhere […]

We will write an essay sample crafted to your needs.

Harvey Milk and the Gay Rights Movement

Imagine being pushed away and discriminated based on sexuality and loving someone that someone else might not approve of. Harvey Milk fought for gay rights and anti-discrimination, and was elected as the first openly gay commissioner in the U.S. Harvey Milk was a progressive activist that contributed and spread awareness to the gay community and was an inspiration to many. Harvey Milk was a brave man who stood up and raised awareness to the LGBT community. In 1972, Milk opened […]

Gay Culture: Challenges and Resilience in Adolescence

Although my friend’s story has a happening ending this is not the outcome for everyone struggling to be accepted due to their sexual differences. Being straight, gay, or bisexual is not a choice. An individual cannot choose his/her sexual preferences nor can they choose to change. Gay people are represented in all walks of life, across various ethnic backgrounds, all nationalities, and in all social and economic groups. As children enter in adolescence, many gay teens already distinguish their sexual […]

Homophobia, Biphobia & Transphobia

I am a woman and I am gay, and I say gay as a general blanket term. I was fortunate enough to find myself in a situation where I did not really know I was pansexual until high school and by then, the friends I had knew me well enough and cared about who I was as a person and not how I identified. My dad had already passed away at that point (not that he would have particularly disowned […]

The Ethics of the Gay Gene

Homosexuality has existed in societies around the world for nearly all of recorded history. From indigenous tribes, to the Romans, Greeks, and even early Americans, a degree of fluid sexuality has permeated cultures around the globe. While homosexual behavior did not pose a large problem in society for much of history, cultural and religious shifts began to fixate upon that which did not fit neatly into boxes established by those in power. Thus, throughout the last several centuries, homosexuality has […]

Lesbian, Gay, Bisexual, Transgender, and Queer

Purpose of the Research The paper will explore and examine issues relating to LGBTQ and come up with newfound knowledge by providing relevant information on the topic. The research is necessary as it will provide different stands of the society about the issue. Although more inquiry has been made on the subject, the piece attempts to give the reader a broader perspective on the issue; the judgment decision lies with the reader on the stand they are going to take […]

Racial, Gender and Sexual Identity

In the article "Fluid and Shifting: Racialized, Gendered, and Sexual Identity in African American Children," by Denise Isom, the author talks about a study on African American children and racialized gender identity. The researchers used various methods to conduct their research, including: 1) questionnaires, 2) face-to-face interviews, 3) ethnographic observation. The first part of the study was conducted from 2001-2002 in a "lower/working class African American community near a large mid-western city" (Isom, 2012). The subjects of this study were […]

“Born Gay” Michael Abrams

In the article “Born Gay” Michael Abrams proposes question why men become gay. Is this due to the gay gene/genes or due to the environment where they grew up or other biological traits? Is being a homosexual is nature or nurture? He was looking at several researches and projects to find the answer. The author states that becoming a gay is at least partially genetic. William Reiner explored how environment influences on sexuality by studying boys who were born with […]

Why should Gay Marriage be Legal?

Most people, like upstanding citizens who pay their taxes and abide by the laws, believe that they deserve the same rights granted to any other citizens by the government. Views on these individuals tend to change if they are gay or lesbian. Homosexual couples are often the main targets of this conflict, with people arguing they should not be allowed to marry. The argument is that legalizing gay marriage could open the door to all kinds of unusual behaviors under […]

LGBTQ-Centered Programming on Television

According to Ng, gaystreaming refers to the inclusion of LGBTQ-centered programming on television. This has proven to be a viable industry practice in the aspect with which it taps simultaneously into the expanding homosexual and heterosexual consumer markets. For instance, LGBT channels such as Logo network has attracted many gay viewers interested in shows that feature gay characters (Duggan, 2002). This has featured in shows such as “Noah’s Arc” and “A-List”. The audience has increased profits for Logo as well […]

The Rights of Lesbian, Gay, Bisexual and Transgender

On July 2nd, 1964, President Lyndon B. Johnson signed the Civil Rights Act following the assassination of President John F. Kennedy who originally had initiated the enactment of this act. The proclamation of this act, was the largest change to the Constitution since the reconstruction of the document. The Civil Rights Act of 1964 states that it is unconstitutional to discriminate against race, national origin, gender, and religion in both public places as well as in the workforce. This act […]

Harvey Milk and the Gay Rights Movement in America

Harvey Milk, the first gay elected official of San Francisco, had said that rights cannot be won when they are on paper. But only those who know how to achieve their rights and “make their voices heard” can win the rights. In the paper “Historical Institutionalism and Comparative Federalism: Lesbian and Gay Rights Policies in Canada and the U.S.”, the author Miriam Smith aims at exploring the various nukes and corners of Canadian and the US federalism to assess their approach […]

Problem of Legalizing Gay Marriage

Legalizing gay marriage is one of the most controversial topic in the United States. Because Gay marriage is illegal in some states, it is impossible for thousands of people to get married. It doesn’t matter if your ,gay,lesbian,bisexual,trains or straight Your still human and all love is equal. Whether you like it our not it’s there life and they have the right to make their own decision. If gay marriage were to be legal it would make This controversial problem […]

What is it Like to Grow up Transgender or Gay or Lesbian

Gender-neutral education gives the child the opportunity to try himself in different social roles and choose the one that will be related to his character and personal wishes (or not at all - there is such an option too). Studies show that calm is the most important thing in transgender or gay or lesbian child rearing. If this behavior is perceived as meaningless, then it means nothing to the child. But if the parents begin to tell the child that […]

Zami Lifestyle in Audre Lorde’s Book

"In the biomythography, Zami: A New Spelling of My Name, by Audre Lorde, explores Zami through the themes of gender, race and sexuality. Zami is a lesbian woman who have affairs with different woman but she is discovers her sexuality through both genders. As she grows up, she is learning about racism since her mother uneducated her about it and patriarchy during her time. Zami addressed her life journey from when she was little to growing up as a african […]

Gay Marriages are Everywhere Around you

Your friends, neighbors, maybe even your family. We should be free to marry whoever we want. Do you know the facts about gay marriage rights and how it affects people's everyday lives? Gay rights allow people to be who they are. If you’re gay you should be able to express how you feel and be yourself. Individual concerns are a big part of gay marriage rights because even though it’s legal, people can still get discriminated if they go out with […]

Ethics of Gay – Scientific and Ethical Criticism

"In this previously untapped field, it also received its share of both scientific and ethical criticism. Before noting the discovery’s ethical concerns, it is important to acknowledge that scientists have located several technical problems with Hamer's study. His finding is often misinterpreted as showing that all 66 men from these 33 pairs shared the same Xq28 sequence. In fact, all he showed was that each member of the 33 concordant pairs shared his Xq28 region with his brother but not with […]

Archaic and Barbaric Laws against Gay People

Introduction An article came out 2 weeks ago on The Guardian’s website, called “It’s dangerous to go out now’: young, gay and scared in Brunei.” The article says that in South-east Asia, on the island of Borneo, in Brunei harsh new sharia laws have been introduced, including death by stoning for adultery and gay sex, and amputation of limbs for theft. These grievous penalties leaded to international condemnation and calls from celebrities to boycott hotels owned by sultan of Brunei. […]

The Oppression of Lesbian Gay Bisexual Transgender and Questioning

The LGBTQ is a standard abbreviation for Lesbians, Gays, Bisexual, Transgender and Questioning individuals. In a recent study according to (Gates, n.d.), there are approximately 9 million people who identify themselves as members of the LGBTQ Culture in America today. According to (Greve, 2016) This indicates the LGBTQ Culture is larger than the population of 40 American States. According to the past 14 years of hate crime data, Mark potok of the Southern Poverty Law Center recently told the PBS […]

Analysis of Homosexuality in Society

We are now in the 20th century, where most now have open minds and feel more open and free to be how they truly are. Also, many people are coming out as lesbian, gay, bisexual, transexual, pansexual and more. During 2016 - 2018 alone, thousands of people came out compared to the years beforehand. But where are all of these people coming from? Is it a trend? Could it possibly just be that people are getting comfortable in this day […]

Barack Obama and Gay Marriage

Thesis sentenceI was raised in a Christian home like most American people, where we were taught by the church that being homosexual is a sin. I grew up believing this for most of my life until I met a dear friend who would change my views on the subject matter. I watched this person be humiliated and discriminated against because of her sexual orientation. This made me wonder how one sin would be worse than another. I know I have […]

Gay Bullying: Bullying in LGBTQ Students

In the past ten years an overwhelming amount of students have come out to say that they are some form of LGBTQ. According to the center of disease control roughly 1.3 million high school students identify as LGBTQ. These students face turmoil and outright discrimination in school. The widely used acronym stands for lesbian, gay, bisexual, transgender etc. While repetitive bullying has occasionally lead to self mutilation or suicide, bullying in LGBTQ teens make both of these occurrences significantly more […]

Gaystreaming on American Television

“Gaystreaming” is the inclusion of LGBTQ-cantered television programming, which creates media content that has “assimilationist directions in LGBT political movements, often counterposed to genuinely ‘queer’ politics (Ng, 2013, p. 260).” Under the context of Logo, the American explicitly LGBTQ channel network, gaystreaming refers to the network’s internal strategy for a larger audience, especially heterosexual women (Ng, 2013, p. 259). The network recognizes the audience in the niche market and the decentralized trend that has emerged with the rapid increase as […]

Gay Liberation Movement

Can an individual of the Lesbian, Gay, Bisexual, Transgender, and Queer (LGBTQ) community truly be accepted into today’s society? People disagree whether gays, lesbians, and transgenders should have the same rights as heterosexuals. As one side believes that regardless of sexuality everyone should be treated equally, others think that a homosexual lifestyle breaks traditional values and it’s not morally ethical. Discrimination against LGBTQ residents, same-sex marriage, and same-sex adoption have been a motivator of the LGBTQ in their fight. People […]

Contesting Gender Stereotyping in my Amendment

"In the opinion editorial, “My Amendment,” George Saunders brings attention to the controversial opinions regarding same sex marriage during the year of 2004, in which the ban on gay marriage was heavily disputed. He advocates as a person against same sex marriage in order to humorously mock those opposed to sex marriage’s entitled attitudes towards the matter. According to the David Stout article, “Bush Backs Ban in Constitution on Gay Marriage,” that was published in The New Yorker, in 2004, […]

“Confessions of a Bad Feminist” by Roxane Gay

In the TED talk “Confessions of a Bad Feminist” Roxane Gay discussed how she agrees with many of the values associated with feminism, which would technically make her a feminist. One of the core principles defines feminism as having equality and justice for women. Roxane talks that over time she realized that her views include that woman are equal to men and therefore deserve the same rights which include being paid at the same rate as men, and be able […]

History of Gay Marriages

How do you feel about Gay Marriages? Same sex marriages are a choice made between individuals. However, I am not for same sex marriages because of my Biblical beliefs but I have family, friends and acquaintances that are gay. Most people do not believe in same sex marriages or dating because they believe that it should be a connection between a man and a woman. There are many opinions about this issue but in my opinion, only God (that is […]

Counseling Black Gay Men Living in Low Socioeconomic Status Community

The film, Moonlight, depicts the growing life of a black man and his struggles through growing up within a low socioeconomic community, as well as his homosexuality (Romanski, Garner, Kleiner, & Jenkins, 2016). The main character, Chiron struggles to find and hold onto his identities of being a black gay man within the black community of a low socioeconomic neighborhood. He faces constant bullying in regards to his homosexuality and is often isolated by his peers. The one friend he […]

Additional Example Essays

  • Should Same-sex Marriage Be Legalized?
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  • Silence in Their Eyes Were Watching God
  • Character Heathcliff in Emily Bronte’s "Wuthering Heights"
  • Is Sexual Orientation Determined At Birth?
  • Two Adjectives to Describe Poe's Literary Works: Dark and Haunting

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Essays on Gay Marriage

When it comes to writing an essay on gay marriage, the choice of topic is crucial. It can determine the direction of your essay and the extent to which your readers will be engaged. In this article, we will discuss the importance of the topic, provide advice on choosing a topic, and offer a detailed list of recommended essay topics.

The topic of gay marriage is important because it is a controversial and relevant issue in today's society. It raises questions about equality, human rights, and social norms. By choosing a compelling topic, you can contribute to the ongoing discussion and provide valuable insights to your readers.

When choosing a topic for your gay marriage essay, it is important to consider your interests, the audience, and the available resources. You should also ensure that the topic is researchable and allows for in-depth analysis. It is advisable to pick a topic that is both relevant and thought-provoking.

Recommended Gay Marriage Essay Topics

Legal and political aspects.

  • The history of gay marriage legalization
  • The impact of gay marriage on society
  • The role of government in promoting gay marriage rights
  • Challenges faced by same-sex couples in legalizing their marriage
  • The future of gay marriage laws

Social and Cultural Perspectives

  • The portrayal of gay marriage in the media
  • The influence of religion on attitudes towards gay marriage
  • The impact of gay marriage on family dynamics
  • The role of education in promoting acceptance of gay marriage
  • The intersection of race and gay marriage

Psychological and Emotional Impacts

  • The mental health implications of legalizing gay marriage
  • The experience of coming out in the context of marriage
  • The impact of societal stigma on same-sex couples
  • The resilience of same-sex couples in the face of discrimination
  • The psychological benefits of marriage equality

Ethical and Moral Considerations

  • The ethical implications of denying gay couples the right to marry
  • The moral arguments for and against gay marriage
  • The relationship between gay marriage and human rights
  • The intersection of religious freedom and marriage equality
  • The implications of legalizing polyamorous marriages alongside same-sex marriages

Global Perspectives

  • The status of gay marriage in different countries
  • The impact of globalization on attitudes towards gay marriage
  • The role of international organizations in promoting marriage equality
  • The cultural differences in the acceptance of gay marriage
  • The future of gay marriage on a global scale

Economic and Societal Impact

  • Financial implications of legalizing gay marriage
  • Impact of marriage equality on workplace policies and benefits
  • Effects of gay marriage on adoption and foster care systems
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  • The Global Divide on Homosexuality Persists

But increasing acceptance in many countries over past two decades

Table of contents.

  • Acknowledgments
  • Methodology
  • Appendix B: Classifying European political parties

A member of the LGBT community takes part in a 2019 Pride walk in India. (Diptendu Dutta/AFP via Getty Images)

How we did this

This analysis focuses on whether people around the world think that homosexuality should be accepted by society or not. The full question wording was, “And which one of these comes closer to your opinion? Homosexuality should be accepted by society OR Homosexuality should not be accepted by society.”

The question is a long-term trend, first asked in the U.S. by the Pew Research Center in 1994 and globally in 2002. Respondents had an option to not answer the question (they could volunteer “don’t know” or refuse to answer the question). Respondents did not get any further instructions on how to interpret the question and no significant problems were noted during the fielding of the survey.

The term “homosexuality,” while sometimes considered anachronistic in the current era, is the most applicable and easily translatable term to use when asking this question across societies and languages and has been used in other cross-national studies, including the World Values Survey .

For this report, we used data from a survey conducted across 34 countries from May 13 to Oct. 2, 2019, totaling 38,426 respondents. The surveys were conducted face to face across Africa, Latin America and the Middle East, and on the phone in United States and Canada. In the Asia-Pacific region, face-to-face surveys were conducted in India, Indonesia and the Philippines, while phone surveys were administered in Australia, Japan and South Korea. Across Europe, the survey was conducted over the phone in France, Germany, the Netherlands, Spain, Sweden and the UK, but face to face in Bulgaria, the Czech Republic, Greece, Hungary, Italy, Lithuania, Poland, Russia, Slovakia and Ukraine.

Here are the  questions  used for the report, along with responses, and the survey  methodology .

Despite major changes in laws and norms surrounding the issue of same-sex marriage and the rights of LGBT people around the world , public opinion on the acceptance of homosexuality in society remains sharply divided by country, region and economic development.

The global divide on acceptance of homosexuality

As it was in 2013 , when the question was last asked, attitudes on the acceptance of homosexuality are shaped by the country in which people live. Those in Western Europe and the Americas are generally more accepting of homosexuality than are those in Eastern Europe, Russia, Ukraine, the Middle East and sub-Saharan Africa. And publics in the Asia-Pacific region generally are split. This is a function not only of economic development of nations, but also religious and political attitudes.

But even with these sharp divides, views are changing in many of the countries that have been surveyed since 2002, when Pew Research Center first began asking this question. In many nations, there has been an increasing acceptance of homosexuality, including in the United States, where 72% say it should be accepted, compared with just 49% as recently as 2007.

Rising acceptance of homosexuality by people in many countries around the world over the past two decades

Many of the countries surveyed in 2002 and 2019 have seen a double-digit increase in acceptance of homosexuality. This includes a 21-point increase since 2002 in South Africa and a 19-point increase in South Korea over the same time period. India also saw a 22-point increase since 2014, the first time the question was asked of a nationally representative sample there.

There also have been fairly large shifts in acceptance of homosexuality over the past 17 years in two very different places: Mexico and Japan. In both countries, just over half said they accepted homosexuality in 2002, but now closer to seven-in-ten say this.

In Kenya, only 1 in 100 said homosexuality should be accepted in 2002, compared with 14% who say this now. (For more on acceptance of homosexuality over time among all the countries surveyed, see Appendix A .)

In many of the countries surveyed, there also are differences on acceptance of homosexuality by age, education, income and, in some instances, gender – and in several cases, these differences are substantial. In addition, religion and its importance in people’s lives shape opinions in many countries. For example, in some countries, those who are affiliated with a religious group tend to be less accepting of homosexuality than those who are unaffiliated (a group sometimes referred to as religious “nones”).

Political ideology also plays a role in acceptance of homosexuality. In many countries, those on the political right are less accepting of homosexuality than those on the left. And supporters of several right-wing populist parties in Europe are also less likely to see homosexuality as acceptable. (For more on how the survey defines populist parties in Europe, see Appendix B .)

Attitudes on this issue are strongly correlated with a country’s wealth. In general, people in wealthier and more developed economies are more accepting of homosexuality than are those in less wealthy and developed economies.

Wealthier countries tend to be more accepting of homosexuality

For example, in Sweden, the Netherlands and Germany, all of which have a per-capita gross domestic product over $50,000, acceptance of homosexuality is among the highest measured across the 34 countries surveyed. By contrast, in Nigeria, Kenya and Ukraine, where per-capita GDP is under $10,000, less than two-in-ten say that homosexuality should be accepted by society.

These are among the major findings of a Pew Research Center survey conducted among 38,426 people in 34 countries from May 13 to Oct. 2, 2019. The study is a follow-up to a 2013 report that found many of the same patterns as seen today, although there has been an increase in acceptance of homosexuality across many of the countries surveyed in both years.

Varied levels of acceptance for homosexuality across globe

Acceptance of homosexuality varies across the globe

The 2019 survey shows that while majorities in 16 of the 34 countries surveyed say homosexuality should be accepted by society, global divides remain. Whereas 94% of those surveyed in Sweden say homosexuality should be accepted, only 7% of people in Nigeria say the same. Across the 34 countries surveyed, a median of 52% agree that homosexuality should be accepted with 38% saying that it should be discouraged.

On a regional basis, acceptance of homosexuality is highest in Western Europe and North America. Central and Eastern Europeans, however, are more divided on the subject, with a median of 46% who say homosexuality should be accepted and 44% saying it should not be.

But in sub-Saharan Africa, the Middle East, Russia and Ukraine, few say that society should accept homosexuality; only in South Africa (54%) and Israel (47%) do more than a quarter hold this view.

People in the Asia-Pacific region show little consensus on the subject. More than three-quarters of those surveyed in Australia (81%) say homosexuality should be accepted, as do 73% of Filipinos. Meanwhile, only 9% in Indonesia agree.

In the three Latin American countries surveyed, strong majorities say they accept homosexuality in society.

Pew Research Center has been gathering data on acceptance of homosexuality in the U.S. since 1994, and there has been a relatively steady increase in the share who say that homosexuality should be accepted by society since 2000. However, while it took nearly 15 years for acceptance to rise 13 points from 2000 to just before the federal legalization of gay marriage in June 2015, there was a near equal rise in acceptance in just the four years since legalization.

Americans are increasingly accepting of homosexuality in society

While acceptance has increased over the past two decades, the partisan divide on homosexuality in the U.S. is wide. More than eight-in-ten Democrats and Democratic-leaning independents (85%) say homosexuality should be accepted, but only 58% of Republicans and Republican leaners say the same.

At the same time, the U.S. still maintains one of the lowest rates of acceptance among the Western European and North and South American countries surveyed. (For more on American views of homosexuality, LGBT issues and same-sex marriage, see Pew Research Center’s topic page here ; U.S. political and partisan views on this topic can be found here .)

In many countries, younger generations more accepting of homosexuality

In 22 of 34 countries surveyed, younger adults are significantly more likely than their older counterparts to say homosexuality should be accepted by society.

This difference was most pronounced in South Korea, where 79% of 18- to 29-year-olds say homosexuality should be accepted by society, compared with only 23% of those 50 and older. This staggering 56-point difference exceeds the next largest difference in Japan by 20 points, where 92% and 56% of those ages 18 to 29 and 50 and older, respectively, say homosexuality should be accepted by society.

In some countries, women are significantly more accepting of homosexuality than men

In most of the countries surveyed, there are no significant differences between men and women. However, for all 12 countries surveyed where there was significant difference, women were more likely to approve of homosexuality than men. South Korea shows the largest divide, with 51% of women and 37% of men saying homosexuality should be accepted by society.

Those with more education express greater acceptance of homosexuality

In most countries surveyed, those who have greater levels of education are significantly more likely to say that homosexuality should be accepted in society than those who have less education. 1

For example, in Greece, 72% of those with a postsecondary education or more say homosexuality is acceptable, compared with 42% of those with a secondary education or less who say this. Significant differences of this nature are found in both countries with generally high levels of acceptance (such as Italy) and low levels (like Ukraine).

In a similar number of countries, those who earn more money than the country’s national median income also are more likely to say they accept homosexuality in society than those who earn less. In Israel, for instance, 52% of higher income earners say homosexuality is acceptable in society versus only three-in-ten of lower income earners who say the same.

The ideological left is generally more accepting of homosexuality in society

In many of the countries where there are measurements of ideology on a left-right scale, those on the left tend to be more accepting of homosexuality than those on the ideological right. And in many cases the differences are quite large.

In South Korea, for example, those who classify themselves on the ideological left are more than twice as likely to say homosexuality is acceptable than those on the ideological right (a 39-percentage-point difference). Similar double-digit differences of this nature appear in many European and North American countries.

People with favorable views of right-wing populist parties in Europe tend to be less accepting of homosexuality

In a similar vein, those who support right-wing populist parties in Europe, many of which are seen by LGBT groups as a threat to their rights , are less supportive of homosexuality in society. In Spain, people with a favorable opinion of the Vox party, which recently has begun to oppose some gay rights , are much less likely to say that homosexuality is acceptable than those who do not support the party.

And in Poland, supporters of the governing PiS (Law and Justice), which has explicitly targeted gay rights as anathema to traditional Polish values , are 23 percentage points less likely to say that homosexuality should be accepted by society than those who do not support the governing party.

Similar differences appear in neighboring Hungary, where the ruling Fidesz party, led by Prime Minister Viktor Orbán, also has shown hostility to gay rights . But even in countries like France and Germany where acceptance of homosexuality is high, there are differences between supporters and non-supporters of key right-wing populist parties such as National Rally in France and Alternative for Germany (AfD).

People who see religion as less important in their daily lives are more accepting of homosexuality

Religion, both as it relates to relative importance in people’s lives and actual religious affiliation, also plays a large role in perceptions of the acceptability of homosexuality in many societies across the globe.

In 25 of the 34 countries surveyed, those who say religion is “somewhat,” “not too” or “not at all” important in their lives are more likely to say that homosexuality should be accepted than those who say religion is “very” important. Among Israelis, those who say religion is not very important in their lives are almost three times more likely than those who say religion is very important to say that society should accept homosexuality.

Significant differences of this nature appear across a broad spectrum of both highly religious and less religious countries, including Czech Republic (38-percentage-point difference), South Korea (38), Canada (33), the U.S. (29), Slovakia (29), Greece (28) and Turkey (26).

Religious affiliation also plays a key role in views towards acceptance of homosexuality. For example, those who are religiously unaffiliated, sometimes called religious “nones,” (that is, those who identify as atheist, agnostic or “nothing in particular”) tend to be more accepting of homosexuality. Though the opinions of religiously unaffiliated people can vary widely , in virtually every country surveyed with a sufficient number of unaffiliated respondents, “nones” are more accepting of homosexuality than the affiliated. In most cases, the affiliated comparison group is made up of Christians. But even among Christians, Catholics are more likely to accept homosexuality than Protestants and evangelicals in many countries with enough adherents for analysis.

One example of this pattern can be found in South Korea. Koreans who are religiously unaffiliated are about twice as likely to say that homosexuality should be accepted by society (60%) as those who are Christian (24%) or Buddhist (31%). Similarly, in Hungary, 62% of “nones” say society should accept homosexuality, compared with only 48% of Catholics.

In the few countries surveyed with Muslim populations large enough for analysis, acceptance of homosexuality is particularly low among adherents of Islam. But in Nigeria, for example, acceptance of homosexuality is low among Christians and Muslims alike (6% and 8%, respectively). Jews in Israel are much more likely to say that homosexuality is acceptable than Israeli Muslims (53% and 17%, respectively).

  • For the purpose of comparing educational groups across countries, we standardize education levels based on the UN’s International Standard Classification of Education (ISCED). The lower education category is below secondary education and the higher category is secondary or above in Brazil, India, Indonesia, Kenya, Lebanon, Mexico, Nigeria, the Philippines, South Africa, Tunisia and Ukraine. In all other countries, the lower education category is secondary education or less education and the higher category is postsecondary or more education. ↩

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‘A Great Gay Book’ provides compelling short stories, essays, graphic panels and more

Book cover for “A Great Gay Book: Stories of Growth, Belonging & Other Queer Possibilities,

The exciting anthology, “A Great Gay Book: Stories of Growth, Belonging & Other Queer Possibilities,” publishing May 21, is edited by Ryan Fitzgibbon, founder of the now defunct “Hello Mr.” magazine. This 432-page volume collects more than 50 interviews, poems, short stories, essays, graphic panels and more. The entries are compelling enough to enjoy back-to-back-to-back, but they are also worth savoring as Fitzgibbon has compiled selections “to encourage reflection.” The arrangement of the pieces often allows readers to consider an idea or topic such as connection, and how we interact with others, to religion’s impact on queer lives, to ideas about gender. 

The book certainly lives up to its title. “A Great Gay Book” opens with an article that originally appeared in Fitzgibbon’s “Hello Mr.” magazine entitled, “On Writing a Great, Gay Book.” Hanya Yanagihara, author of “A Little Life,” interviews Garth Greenwell, author of “What Belongs to You” about what it means to be a gay writer and write a gay book. This is bookended by “Saying Hello to New Queer Voices,” in which Colby Anderson, in conversation with Yezmin Villarreal, considers opportunities for queer women and nonbinary and trans writers and content creators.

The design playfully changes type and color in ways that make many entries inviting to read. Most of the stories are short, and Fitzgibbon wisely juxtaposes text and images, so the flow of the book never feels too dense. He includes naughty photo essays such as “Fire Island” by Robert Andy Coombs, and “Screen Test” by Daniel Shea, as well as poems, such as the deliberately designed “Good Dick Is a Myth” by Mack Rogers, to provide nice breathers between some of the wordier selections.

“A Great Gay Book” feels like a big classy zine at times which is quaintly appealing. (Brontez Purnell’s “Fag School #6 ½,” included herein, literally is a republished zine.) Most of the pieces originally appeared in Fitzgibbon’s publication, and a section devoted to each of the cover models from the ten published issues of “Hello Mr” makes it feel like a greatest hits collection.

But such self-indulgence can be forgiven as some of the republished magazine pieces are beneficial to new readers. They also provide some of the best entries. “Kehinde Wiley in 3D” by Antwaun Sargent, is exceptional in how it unpacks visibility. “When you look at me, do you see me?” Wiley asks unflinchingly. Likewise, “The Recording” by Khalid El Khatib, which recounts the author’s tense coming out to his Muslim Palestinian father, is a very moving selection. Equally impressive is “He Opened Up Somewhere Along the Eastern Shore,” by Jason Hanasik, a gay man who has an unexpectedly poignant encounter with a straight man during a road trip they reluctantly take. And “The Mother, The Son, and The Holy Spirit,” by Dany Salvatierra, is a fantastic piece about a gay man who visits his religious mother and has to navigate her world without completely denying his. It is valuable that these entries are now available to reach a wider audience.

There are several memorable essays and interviews that are original to this volume. Chief among them is “Anal Fisting: A Case Study of the Mental and Rectal Elasticity of the Human Male,” in which Sam Finkelstein recalls his fascinating experience performing the titular sex act on a very willing and encouraging stranger and how the encounter impacted each man. “Blurry Soles,” by Mathew Rodriguez, begins with a discussion of a diabetes exam and leads to a consideration of the author’s unabashed foot fetish. Rodriguez’s candor is terrific. And “Back to Start: The ‘Lady’ Bunny,” is Martin Beck’s illuminating conversation with the drag superstar that showcases the performer’s integrity as well as her disdain for political correctness. The book’s biggest misfire, however, is “Shut Up After You’re Thirty: Charles Rogers in Search of John Waters’s Approval,” in which the co creator of the series “Search Party” meets his filmmaking idol and tests the readers’ patience with his anxiety. 

“A Great Gay Book” also includes some superb fiction that was originally published elsewhere and is reprinted here. Former PGN editor’s Jason Villemez’s haunting story, “All These Cats Have AIDS,” recounts an activist looking back on a defining moment in his life. It contains vivid imagery, such as sarcomas that “looked like islands [countries].” Likewise, “The House of the Sleeping Beaus,” by John Better Armelia, is an evocative story about a young man who finds work in a brothel in Columbia and is surrounded by a palpable atmosphere of sex.

Fitzgibbon also includes brief entries featuring key queer voices in contemporary gay literature. Bryan Washington’s (“Lot,” “Memorial”) entry, “How to Talk to Strangers,” provides darkly amusing advice, and Ocean Vuong (“On Earth We’re Briefly Gorgeous”) is represented by “Notebook Fragments,” a poem in notebook form from his collection “Night Sky with Exit Wounds.”  

One of the book’s highlights is “Clear Constellations: Mapping the Cultural Pinpoints of Critic Wesley Morris,” a profile of the Philadelphia native who is a Pulitzer Prize-winner, a podcaster, and a writer-at-large for the New York Times. As J Wortham interviews him, Morris discusses hearing Nina Simone for the first time, or why he hates the film “Carol.” The engaging conversation ends too soon because one feels Morris has so much more to say. 

And “A Great Gay Book” leaves readers wanting more. Hopefully, Fitzgibbon will produce another volume in the future.

“A Great Gay Book: Stories of Growth, Belonging & Other Queer Possibilities” is available May 21.

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