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Hindi Essay (Hindi Nibandh) 100 विषयों पर हिंदी निबंध लेखन

Hindi Essay (Hindi Nibandh) | 100 विषयों पर हिंदी निबंध लेखन – Essays in Hindi on 100 Topics

हिंदी निबंध: हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है। हमारे हिंदी भाषा कौशल को सीखना और सुधारना भारत के अधिकांश स्थानों में सेवा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। स्कूली दिनों से ही हम हिंदी भाषा सीखते थे। कुछ स्कूल और कॉलेज हिंदी के अतिरिक्त बोर्ड और निबंध बोर्ड में निबंध लेखन का आयोजन करते हैं, छात्रों को बोर्ड परीक्षा में हिंदी निबंध लिखने की आवश्यकता होती है।

निबंध – Nibandh In Hindi – Hindi Essay Topics

  • सच्चा धर्म पर निबंध – (True Religion Essay)
  • राष्ट्र निर्माण में युवाओं का योगदान निबंध – (Role Of Youth In Nation Building Essay)
  • अतिवृष्टि पर निबंध – (Flood Essay)
  • राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका पर निबंध – (Role Of Teacher In Nation Building Essay)
  • नक्सलवाद पर निबंध – (Naxalism In India Essay)
  • साहित्य समाज का दर्पण है हिंदी निबंध – (Literature And Society Essay)
  • नशे की दुष्प्रवृत्ति निबंध – (Drug Abuse Essay)
  • मन के हारे हार है मन के जीते जीत पर निबंध – (It is the Mind which Wins and Defeats Essay)
  • एक राष्ट्र एक कर : जी०एस०टी० ”जी० एस०टी० निबंध – (Gst One Nation One Tax Essay)
  • युवा पर निबंध – (Youth Essay)
  • अक्षय ऊर्जा : सम्भावनाएँ और नीतियाँ निबंध – (Renewable Sources Of Energy Essay)
  • मूल्य-वृदधि की समस्या निबंध – (Price Rise Essay)
  • परहित सरिस धर्म नहिं भाई निबंध – (Philanthropy Essay)
  • पर्वतीय यात्रा पर निबंध – (Parvatiya Yatra Essay)
  • असंतुलित लिंगानुपात निबंध – (Sex Ratio Essay)
  • मनोरंजन के आधुनिक साधन पर निबंध – (Means Of Entertainment Essay)
  • मेट्रो रेल पर निबंध – (Metro Rail Essay)
  • दूरदर्शन पर निबंध – (Importance Of Doordarshan Essay)
  • दूरदर्शन और युवावर्ग पर निबंध – (Doordarshan Essay)
  • बस्ते का बढ़ता बोझ पर निबंध – (Baste Ka Badhta Bojh Essay)
  • महानगरीय जीवन पर निबंध – (Metropolitan Life Essay)
  • दहेज नारी शक्ति का अपमान है पे निबंध – (Dowry Problem Essay)
  • सुरीला राजस्थान निबंध – (Folklore Of Rajasthan Essay)
  • राजस्थान में जल संकट पर निबंध – (Water Scarcity In Rajasthan Essay)
  • खुला शौच मुक्त गाँव पर निबंध – (Khule Me Soch Mukt Gaon Par Essay)
  • रंगीला राजस्थान पर निबंध – (Rangila Rajasthan Essay)
  • राजस्थान के लोकगीत पर निबंध – (Competition Of Rajasthani Folk Essay)
  • मानसिक सुख और सन्तोष निबंध – (Happiness Essay)
  • मेरे जीवन का लक्ष्य पर निबंध नंबर – (My Aim In Life Essay)
  • राजस्थान में पर्यटन पर निबंध – (Tourist Places Of Rajasthan Essay)
  • नर हो न निराश करो मन को पर निबंध – (Nar Ho Na Nirash Karo Man Ko Essay)
  • राजस्थान के प्रमुख लोक देवता पर निबंध – (The Major Folk Deities Of Rajasthan Essay)
  • देशप्रेम पर निबंध – (Patriotism Essay)
  • पढ़ें बेटियाँ, बढ़ें बेटियाँ योजना यूपी में लागू निबंध – (Read Daughters, Grow Daughters Essay)
  • सत्संगति का महत्व पर निबंध – (Satsangati Ka Mahatva Nibandh)
  • सिनेमा और समाज पर निबंध – (Cinema And Society Essay)
  • विपत्ति कसौटी जे कसे ते ही साँचे मीत पर निबंध – (Vipatti Kasauti Je Kase Soi Sache Meet Essay)
  • लड़का लड़की एक समान पर निबंध – (Ladka Ladki Ek Saman Essay)
  • विज्ञापन के प्रभाव – (Paragraph Speech On Vigyapan Ke Prabhav Essay)
  • रेलवे प्लेटफार्म का दृश्य पर निबंध – (Railway Platform Ka Drishya Essay)
  • समाचार-पत्र का महत्त्व पर निबंध – (Importance Of Newspaper Essay)
  • समाचार-पत्रों से लाभ पर निबंध – (Samachar Patr Ke Labh Essay)
  • समाचार पत्र पर निबंध (Newspaper Essay in Hindi)
  • व्यायाम का महत्व निबंध – (Importance Of Exercise Essay)
  • विद्यार्थी जीवन पर निबंध – (Student Life Essay)
  • विद्यार्थी और राजनीति पर निबंध – (Students And Politics Essay)
  • विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध – (Vidyarthi Aur Anushasan Essay)
  • मेरा प्रिय त्यौहार निबंध – (My Favorite Festival Essay)
  • मेरा प्रिय पुस्तक पर निबंध – (My Favourite Book Essay)
  • पुस्तक मेला पर निबंध – (Book Fair Essay)
  • मेरा प्रिय खिलाड़ी निबंध हिंदी में – (My Favorite Player Essay)
  • सर्वधर्म समभाव निबंध – (All Religions Are Equal Essay)
  • शिक्षा में खेलकूद का स्थान निबंध – (Shiksha Mein Khel Ka Mahatva Essay)a
  • खेल का महत्व पर निबंध – (Importance Of Sports Essay)
  • क्रिकेट पर निबंध – (Cricket Essay)
  • ट्वेन्टी-20 क्रिकेट पर निबंध – (T20 Cricket Essay)
  • मेरा प्रिय खेल-क्रिकेट पर निबंध – (My Favorite Game Cricket Essay)
  • पुस्तकालय पर निबंध – (Library Essay)
  • सूचना प्रौद्योगिकी और मानव कल्याण निबंध – (Information Technology Essay)
  • कंप्यूटर और टी.वी. का प्रभाव निबंध – (Computer Aur Tv Essay)
  • कंप्यूटर की उपयोगिता पर निबंध – (Computer Ki Upyogita Essay)
  • कंप्यूटर शिक्षा पर निबंध – (Computer Education Essay)
  • कंप्यूटर के लाभ पर निबंध – (Computer Ke Labh Essay)
  • इंटरनेट पर निबंध – (Internet Essay)
  • विज्ञान: वरदान या अभिशाप पर निबंध – (Science Essay)
  • शिक्षा का गिरता स्तर पर निबंध – (Falling Price Level Of Education Essay)
  • विज्ञान के गुण और दोष पर निबंध – (Advantages And Disadvantages Of Science Essay)
  • विद्यालय में स्वास्थ्य शिक्षा निबंध – (Health Education Essay)
  • विद्यालय का वार्षिकोत्सव पर निबंध – (Anniversary Of The School Essay)
  • विज्ञान के वरदान पर निबंध – (The Gift Of Science Essays)
  • विज्ञान के चमत्कार पर निबंध (Wonder Of Science Essay in Hindi)
  • विकास पथ पर भारत निबंध – (Development Of India Essay)
  • कम्प्यूटर : आधुनिक यन्त्र–पुरुष – (Computer Essay)
  • मोबाइल फोन पर निबंध (Mobile Phone Essay)
  • मेरी अविस्मरणीय यात्रा पर निबंध – (My Unforgettable Trip Essay)
  • मंगल मिशन (मॉम) पर निबंध – (Mars Mission Essay)
  • विज्ञान की अद्भुत खोज कंप्यूटर पर निबंध – (Vigyan Ki Khoj Kampyootar Essay)
  • भारत का उज्जवल भविष्य पर निबंध – (Freedom Is Our Birthright Essay)
  • सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा निबंध इन हिंदी – (Sare Jahan Se Achha Hindustan Hamara Essay)
  • डिजिटल इंडिया पर निबंध (Essay on Digital India)
  • भारतीय संस्कृति पर निबंध – (India Culture Essay)
  • राष्ट्रभाषा हिन्दी निबंध – (National Language Hindi Essay)
  • भारत में जल संकट निबंध – (Water Crisis In India Essay)
  • कौशल विकास योजना पर निबंध – (Skill India Essay)
  • हमारा प्यारा भारत वर्ष पर निबंध – (Mera Pyara Bharat Varsh Essay)
  • अनेकता में एकता : भारत की विशेषता – (Unity In Diversity Essay)
  • महंगाई की समस्या पर निबन्ध – (Problem Of Inflation Essay)
  • महंगाई पर निबंध – (Mehangai Par Nibandh)
  • आरक्षण : देश के लिए वरदान या अभिशाप निबंध – (Reservation System Essay)
  • मेक इन इंडिया पर निबंध (Make In India Essay In Hindi)
  • ग्रामीण समाज की समस्याएं पर निबंध – (Problems Of Rural Society Essay)
  • मेरे सपनों का भारत पर निबंध – (India Of My Dreams Essay)
  • भारतीय राजनीति में जातिवाद पर निबंध – (Caste And Politics In India Essay)
  • भारतीय नारी पर निबंध – (Indian Woman Essay)
  • आधुनिक नारी पर निबंध – (Modern Women Essay)
  • भारतीय समाज में नारी का स्थान निबंध – (Women’s Role In Modern Society Essay)
  • चुनाव पर निबंध – (Election Essay)
  • चुनाव स्थल के दृश्य का वर्णन निबन्ध – (An Election Booth Essay)
  • पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं पर निबंध – (Dependence Essay)
  • परमाणु शक्ति और भारत हिंदी निंबध – (Nuclear Energy Essay)
  • यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो हिंदी निबंध – (If I were the Prime Minister Essay)
  • आजादी के 70 साल निबंध – (India ofter 70 Years Of Independence Essay)
  • भारतीय कृषि पर निबंध – (Indian Farmer Essay)
  • संचार के साधन पर निबंध – (Means Of Communication Essay)
  • भारत में दूरसंचार क्रांति हिंदी में निबंध – (Telecom Revolution In India Essay)
  • दूरसंचार में क्रांति निबंध – (Revolution In Telecommunication Essay)
  • राष्ट्रीय एकता का महत्व पर निबंध (Importance Of National Integration)
  • भारत की ऋतुएँ पर निबंध – (Seasons In India Essay)
  • भारत में खेलों का भविष्य पर निबंध – (Future Of Sports Essay)
  • किसी खेल (मैच) का आँखों देखा वर्णन पर निबंध – (Kisi Match Ka Aankhon Dekha Varnan Essay)
  • राजनीति में अपराधीकरण पर निबंध – (Criminalization Of Indian Politics Essay)
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हिन्दी निबंध – (Narendra Modi Essay)
  • बाल मजदूरी पर निबंध – (Child Labour Essay)
  • भ्रष्टाचार पर निबंध (Corruption Essay in Hindi)
  • महिला सशक्तिकरण पर निबंध – (Women Empowerment Essay)
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध (Beti Bachao Beti Padhao)
  • गरीबी पर निबंध (Poverty Essay in Hindi)
  • स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध (Swachh Bharat Abhiyan Essay)
  • बाल विवाह एक अभिशाप पर निबंध – (Child Marriage Essay)
  • राष्ट्रीय एकीकरण पर निबंध – (Importance of National Integration Essay)
  • आतंकवाद पर निबंध (Terrorism Essay in hindi)
  • सड़क सुरक्षा पर निबंध (Road Safety Essay in Hindi)
  • बढ़ती भौतिकता घटते मानवीय मूल्य पर निबंध – (Increasing Materialism Reducing Human Values Essay)
  • गंगा की सफाई देश की भलाई पर निबंध – (The Good Of The Country: Cleaning The Ganges Essay)
  • सत्संगति पर निबंध – (Satsangati Essay)
  • महिलाओं की समाज में भूमिका पर निबंध – (Women’s Role In Society Today Essay)
  • यातायात के नियम पर निबंध – (Traffic Safety Essay)
  • बेटी बचाओ पर निबंध – (Beti Bachao Essay)
  • सिनेमा या चलचित्र पर निबंध – (Cinema Essay In Hindi)
  • परहित सरिस धरम नहिं भाई पर निबंध – (Parhit Saris Dharam Nahi Bhai Essay)
  • पेड़-पौधे का महत्व निबंध – (The Importance Of Trees Essay)
  • वर्तमान शिक्षा प्रणाली – (Modern Education System Essay)
  • महिला शिक्षा पर निबंध (Women Education Essay In Hindi)
  • महिलाओं की समाज में भूमिका पर निबंध (Women’s Role In Society Essay In Hindi)
  • यदि मैं प्रधानाचार्य होता पर निबंध – (If I Was The Principal Essay)
  • बेरोजगारी पर निबंध (Unemployment Essay)
  • शिक्षित बेरोजगारी की समस्या निबंध – (Problem Of Educated Unemployment Essay)
  • बेरोजगारी समस्या और समाधान पर निबंध – (Unemployment Problem And Solution Essay)
  • दहेज़ प्रथा पर निबंध (Dowry System Essay in Hindi)
  • जनसँख्या पर निबंध – (Population Essay)
  • श्रम का महत्त्व निबंध – (Importance Of Labour Essay)
  • जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम पर निबंध – (Problem Of Increasing Population Essay)
  • भ्रष्टाचार : समस्या और निवारण निबंध – (Corruption Problem And Solution Essay)
  • मीडिया और सामाजिक उत्तरदायित्व निबंध – (Social Responsibility Of Media Essay)
  • हमारे जीवन में मोबाइल फोन का महत्व पर निबंध – (Importance Of Mobile Phones Essay In Our Life)
  • विश्व में अत्याधिक जनसंख्या पर निबंध – (Overpopulation in World Essay)
  • भारत में बेरोजगारी की समस्या पर निबंध – (Problem Of Unemployment In India Essay)
  • गणतंत्र दिवस पर निबंध – (Republic Day Essay)
  • भारत के गाँव पर निबंध – (Indian Village Essay)
  • गणतंत्र दिवस परेड पर निबंध – (Republic Day of India Essay)
  • गणतंत्र दिवस के महत्व पर निबंध – (2020 – Republic Day Essay)
  • महात्मा गांधी पर निबंध (Mahatma Gandhi Essay)
  • ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पर निबंध – (Dr. A.P.J. Abdul Kalam Essay)
  • परिवार नियोजन पर निबंध – (Family Planning In India Essay)
  • मेरा सच्चा मित्र पर निबंध – (My Best Friend Essay)
  • अनुशासन पर निबंध (Discipline Essay)
  • देश के प्रति मेरे कर्त्तव्य पर निबंध – (My Duty Towards My Country Essay)
  • समय का सदुपयोग पर निबंध – (Samay Ka Sadupyog Essay)
  • नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर निबंध (Rights And Responsibilities Of Citizens Essay In Hindi)
  • ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध – (Global Warming Essay)
  • जल जीवन का आधार निबंध – (Jal Jeevan Ka Aadhar Essay)
  • जल ही जीवन है निबंध – (Water Is Life Essay)
  • प्रदूषण की समस्या और समाधान पर लघु निबंध – (Pollution Problem And Solution Essay)
  • प्रकृति संरक्षण पर निबंध (Conservation of Nature Essay In Hindi)
  • वन जीवन का आधार निबंध – (Forest Essay)
  • पर्यावरण बचाओ पर निबंध (Environment Essay)
  • पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (Environmental Pollution Essay in Hindi)
  • पर्यावरण सुरक्षा पर निबंध (Environment Protection Essay In Hindi)
  • बढ़ते वाहन घटता जीवन पर निबंध – (Vehicle Pollution Essay)
  • योग पर निबंध (Yoga Essay)
  • मिलावटी खाद्य पदार्थ और स्वास्थ्य पर निबंध – (Adulterated Foods And Health Essay)
  • प्रकृति निबंध – (Nature Essay In Hindi)
  • वर्षा ऋतु पर निबंध – (Rainy Season Essay)
  • वसंत ऋतु पर निबंध – (Spring Season Essay)
  • बरसात का एक दिन पर निबंध – (Barsat Ka Din Essay)
  • अभ्यास का महत्व पर निबंध – (Importance Of Practice Essay)
  • स्वास्थ्य ही धन है पर निबंध – (Health Is Wealth Essay)
  • महाकवि तुलसीदास का जीवन परिचय निबंध – (Tulsidas Essay)
  • मेरा प्रिय कवि निबंध – (My Favourite Poet Essay)
  • मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध – (My Favorite Book Essay)
  • कबीरदास पर निबन्ध – (Kabirdas Essay)

इसलिए, यह जानना और समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि विषय के बारे में संक्षिप्त और कुरकुरा लाइनों के साथ एक आदर्श हिंदी निबन्ध कैसे लिखें। साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं। तो, छात्र आसानी से स्कूल और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हिंदी में निबन्ध कैसे लिखें, इसकी तैयारी कर सकते हैं। इसके अलावा, आप हिंदी निबंध लेखन की संरचना, हिंदी में एक प्रभावी निबंध लिखने के लिए टिप्स आदि के बारे में कुछ विस्तृत जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। ठीक है, आइए हिंदी निबन्ध के विवरण में गोता लगाएँ।

हिंदी निबंध लेखन – स्कूल और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हिंदी में निबन्ध कैसे लिखें?

प्रभावी निबंध लिखने के लिए उस विषय के बारे में बहुत अभ्यास और गहन ज्ञान की आवश्यकता होती है जिसे आपने निबंध लेखन प्रतियोगिता या बोर्ड परीक्षा के लिए चुना है। छात्रों को वर्तमान में हो रही स्थितियों और हिंदी में निबंध लिखने से पहले विषय के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में जानना चाहिए। हिंदी में पावरफुल निबन्ध लिखने के लिए सभी को कुछ प्रमुख नियमों और युक्तियों का पालन करना होगा।

हिंदी निबन्ध लिखने के लिए आप सभी को जो प्राथमिक कदम उठाने चाहिए उनमें से एक सही विषय का चयन करना है। इस स्थिति में आपकी सहायता करने के लिए, हमने सभी प्रकार के हिंदी निबंध विषयों पर शोध किया है और नीचे सूचीबद्ध किया है। एक बार जब हम सही विषय चुन लेते हैं तो विषय के बारे में सभी सामान्य और तथ्यों को एकत्र करते हैं और अपने पाठकों को संलग्न करने के लिए उन्हें अपने निबंध में लिखते हैं।

तथ्य आपके पाठकों को अंत तक आपके निबंध से चिपके रहेंगे। इसलिए, हिंदी में एक निबंध लिखते समय मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें और किसी प्रतियोगिता या बोर्ड या प्रतिस्पर्धी जैसी परीक्षाओं में अच्छा स्कोर करें। ये हिंदी निबंध विषय पहली कक्षा से 10 वीं कक्षा तक के सभी कक्षा के छात्रों के लिए उपयोगी हैं। तो, उनका सही ढंग से उपयोग करें और हिंदी भाषा में एक परिपूर्ण निबंध बनाएं।

हिंदी भाषा में दीर्घ और लघु निबंध विषयों की सूची

हिंदी निबन्ध विषयों और उदाहरणों की निम्न सूची को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है जैसे कि प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, सामान्य चीजें, अवसर, खेल, खेल, स्कूली शिक्षा, और बहुत कुछ। बस अपने पसंदीदा हिंदी निबंध विषयों पर क्लिक करें और विषय पर निबंध के लघु और लंबे रूपों के साथ विषय के बारे में पूरी जानकारी आसानी से प्राप्त करें।

विषय के बारे में समग्र जानकारी एकत्रित करने के बाद, अपनी लाइनें लागू करने का समय और हिंदी में एक प्रभावी निबन्ध लिखने के लिए। यहाँ प्रचलित सभी विषयों की जाँच करें और किसी भी प्रकार की प्रतियोगिताओं या परीक्षाओं का प्रयास करने से पहले जितना संभव हो उतना अभ्यास करें।

हिंदी निबंधों की संरचना

Hindi Essay Parts

उपरोक्त छवि आपको हिंदी निबन्ध की संरचना के बारे में प्रदर्शित करती है और आपको निबन्ध को हिन्दी में प्रभावी ढंग से रचने के बारे में कुछ विचार देती है। यदि आप स्कूल या कॉलेजों में निबंध लेखन प्रतियोगिता में किसी भी विषय को लिखते समय निबंध के इन हिस्सों का पालन करते हैं तो आप निश्चित रूप से इसमें पुरस्कार जीतेंगे।

इस संरचना को बनाए रखने से निबंध विषयों का अभ्यास करने से छात्रों को विषय पर ध्यान केंद्रित करने और विषय के बारे में छोटी और कुरकुरी लाइनें लिखने में मदद मिलती है। इसलिए, यहां संकलित सूची में से अपने पसंदीदा या दिलचस्प निबंध विषय को हिंदी में चुनें और निबंध की इस मूल संरचना का अनुसरण करके एक निबंध लिखें।

हिंदी में एक सही निबंध लिखने के लिए याद रखने वाले मुख्य बिंदु

अपने पाठकों को अपने हिंदी निबंधों के साथ संलग्न करने के लिए, आपको हिंदी में एक प्रभावी निबंध लिखते समय कुछ सामान्य नियमों का पालन करना चाहिए। कुछ युक्तियाँ और नियम इस प्रकार हैं:

  • अपना हिंदी निबंध विषय / विषय दिए गए विकल्पों में से समझदारी से चुनें।
  • अब उन सभी बिंदुओं को याद करें, जो निबंध लिखने शुरू करने से पहले विषय के बारे में एक विचार रखते हैं।
  • पहला भाग: परिचय
  • दूसरा भाग: विषय का शारीरिक / विस्तार विवरण
  • तीसरा भाग: निष्कर्ष / अंतिम शब्द
  • एक निबंध लिखते समय सुनिश्चित करें कि आप एक सरल भाषा और शब्दों का उपयोग करते हैं जो विषय के अनुकूल हैं और एक बात याद रखें, वाक्यों को जटिल न बनाएं,
  • जानकारी के हर नए टुकड़े के लिए निबंध लेखन के दौरान एक नए पैराग्राफ के साथ इसे शुरू करें।
  • अपने पाठकों को आकर्षित करने या उत्साहित करने के लिए जहाँ कहीं भी संभव हो, कुछ मुहावरे या कविताएँ जोड़ें और अपने हिंदी निबंध के साथ संलग्न रहें।
  • विषय या विषय को बीच में या निबंध में जारी रखने से न चूकें।
  • यदि आप संक्षेप में हिंदी निबंध लिख रहे हैं तो इसे 200-250 शब्दों में समाप्त किया जाना चाहिए। यदि यह लंबा है, तो इसे 400-500 शब्दों में समाप्त करें।
  • महत्वपूर्ण हिंदी निबंध विषयों का अभ्यास करते समय इन सभी युक्तियों और बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए, आप निश्चित रूप से किसी भी प्रतियोगी परीक्षाओं में कुरकुरा और सही निबंध लिख सकते हैं या फिर सीबीएसई, आईसीएसई जैसी बोर्ड परीक्षाओं में।

हिंदी निबंध लेखन पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मैं अपने हिंदी निबंध लेखन कौशल में सुधार कैसे कर सकता हूं? अपने हिंदी निबंध लेखन कौशल में सुधार करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक किताबों और समाचार पत्रों को पढ़ना और हिंदी में कुछ जानकारीपूर्ण श्रृंखलाओं को देखना है। ये चीजें आपकी हिंदी शब्दावली में वृद्धि करेंगी और आपको हिंदी में एक प्रेरक निबंध लिखने में मदद करेंगी।

2. CBSE, ICSE बोर्ड परीक्षा के लिए हिंदी निबंध लिखने में कितना समय देना चाहिए? हिंदी बोर्ड परीक्षा में एक प्रभावी निबंध लिखने पर 20-30 का खर्च पर्याप्त है। क्योंकि परीक्षा हॉल में हर मिनट बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए, सभी वर्गों के लिए समय बनाए रखना महत्वपूर्ण है। परीक्षा से पहले सभी हिंदी निबन्ध विषयों से पहले अभ्यास करें और परीक्षा में निबंध लेखन पर खर्च करने का समय निर्धारित करें।

3. हिंदी में निबंध के लिए 200-250 शब्द पर्याप्त हैं? 200-250 शब्दों वाले हिंदी निबंध किसी भी स्थिति के लिए बहुत अधिक हैं। इसके अलावा, पाठक केवल आसानी से पढ़ने और उनसे जुड़ने के लिए लघु निबंधों में अधिक रुचि दिखाते हैं।

4. मुझे छात्रों के लिए सर्वश्रेष्ठ औपचारिक और अनौपचारिक हिंदी निबंध विषय कहां मिल सकते हैं? आप हमारे पेज से कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों के लिए हिंदी में विभिन्न सामान्य और विशिष्ट प्रकार के निबंध विषय प्राप्त कर सकते हैं। आप स्कूलों और कॉलेजों में प्रतियोगिताओं, परीक्षाओं और भाषणों के लिए हिंदी में इन छोटे और लंबे निबंधों का उपयोग कर सकते हैं।

5. हिंदी परीक्षाओं में प्रभावशाली निबंध लिखने के कुछ तरीके क्या हैं? हिंदी में प्रभावी और प्रभावशाली निबंध लिखने के लिए, किसी को इसमें शानदार तरीके से काम करना चाहिए। उसके लिए, आपको इन बिंदुओं का पालन करना चाहिए और सभी प्रकार की परीक्षाओं में एक परिपूर्ण हिंदी निबंध की रचना करनी चाहिए:

  • एक पंच-लाइन की शुरुआत।
  • बहुत सारे विशेषणों का उपयोग करें।
  • रचनात्मक सोचें।
  • कठिन शब्दों के प्रयोग से बचें।
  • आंकड़े, वास्तविक समय के उदाहरण, प्रलेखित जानकारी दें।
  • सिफारिशों के साथ निष्कर्ष निकालें।
  • निष्कर्ष के साथ पंचलाइन को जोड़ना।

निष्कर्ष हमने एक टीम के रूप में हिंदी निबन्ध विषय पर पूरी तरह से शोध किया और इस पृष्ठ पर कुछ मुख्य महत्वपूर्ण विषयों को सूचीबद्ध किया। हमने इन हिंदी निबंध लेखन विषयों को उन छात्रों के लिए एकत्र किया है जो निबंध प्रतियोगिता या प्रतियोगी या बोर्ड परीक्षाओं में भाग ले रहे हैं। तो, हम आशा करते हैं कि आपको यहाँ पर सूची से हिंदी में अपना आवश्यक निबंध विषय मिल गया होगा।

यदि आपको हिंदी भाषा पर निबंध के बारे में अधिक जानकारी की आवश्यकता है, तो संरचना, हिंदी में निबन्ध लेखन के लिए टिप्स, हमारी साइट LearnCram.com पर जाएँ। इसके अलावा, आप हमारी वेबसाइट से अंग्रेजी में एक प्रभावी निबंध लेखन विषय प्राप्त कर सकते हैं, इसलिए इसे अंग्रेजी और हिंदी निबंध विषयों पर अपडेट प्राप्त करने के लिए बुकमार्क करें।

ESSAY KI DUNIYA

HINDI ESSAYS & TOPICS

Essay in Hindi Language – निबंध

December 12, 2017 by essaykiduniya

Essay in Hindi –   These Hindi essays are for Nursery Class, Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12. We provide various types of essay in Hindi such as education, speech, science and technology, India, festival, national day, environmental issues, social issues, social awareness, ethical values, nature and health etc in 100, 200, 300, 400, 500, 600, 700, 800, 900, 1000, 1100, 1200, 1300, 1400, 1500 and 1600 words.

ये हिंदी निबंध नर्सरी कक्षा से कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 के लिए हैं। हम शिक्षा, भाषण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, एनीमा, भारत, त्योहार, राष्ट्रीय दिवस, पर्यावरण मुद्दों, सामाजिक मुद्दे, सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, प्रकृति और स्वास्थ्य आदि जैसे विभिन्न प्रकार के निबंधों को हिंदी में प्रदान करते हैं।

हर कोई इन निबंध को आसानी से समझ सकता है क्योंकि हमने  इनमें बहुत सरल और आसान शब्दों का इस्तेमाल किया है। । ये किसी छात्र द्वारा आसानी से समझे जा सकते है| ऐसे निबंध छात्रों को भारतीय संस्कृति, विरासत, स्मारकों, प्रसिद्ध स्थानों, शिक्षकों, माताओं, पशुओं, पारंपरिक त्योहारों, घटनाओं, अवसरों, प्रसिद्ध व्यक्तित्वों, किंवदंतियों, सामाजिक मुद्दों और इतने सारे अन्य विषयों के बारे में जानने में मदद और प्रेरित कर सकते हैं। हमने बहुत विशिष्ट और सामान्य विषय निबंध प्रदान किए हैं। 

ESSAY IN HINDI – निबंध

निबंध कैसे लिखें

त्योहारों पर निबंध – Essay on Festivals

महान व्यक्तियों पर निबंध – Essay on great personalities 

पर्यावरण के मुद्दें और जागरूकता पर निबंध – Essay on Environment 

स्वास्थ्य और तंदुस्र्स्ती पर निबंध – Essay on Health

 रिश्तो पर निबंध – Essay on Relations

खेल पर निबंध – Essay on Sports

सामाजिक मुद्दे और सामाजिक जागरूकता पर निबंध – Essay on Social Issues

निबंध – Essay in Hindi

भारत पर निबंध –  Essay on India

जानवर पर निबंध – Essay on Animals

हिंदी निबंध – Hindi Essay

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हिंदी निबंध (Hindi Nibandh / Essay in Hindi) - हिंदी निबंध लेखन, हिंदी निबंध 100, 200, 300, 500 शब्दों में

हिंदी में निबंध (Essay in Hindi) - छात्र जीवन में विभिन्न विषयों पर हिंदी निबंध (essay in hindi) लिखने की आवश्यकता होती है। हिंदी निबंध लेखन (essay writing in hindi) के कई फायदे हैं। हिंदी निबंध से किसी विषय से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित रूप देना आ जाता है तथा विचारों को अभिव्यक्त करने का कौशल विकसित होता है। हिंदी निबंध (hindi nibandh) लिखने की गतिविधि से इन विषयों पर छात्रों के ज्ञान के दायरे का विस्तार होता है जो कि शिक्षा के अहम उद्देश्यों में से एक है। हिंदी में निबंध या लेख लिखने से विषय के बारे में समालोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। साथ ही अच्छा हिंदी निबंध (hindi nibandh) लिखने पर अंक भी अच्छे प्राप्त होते हैं। इसके अलावा हिंदी निबंध (hindi nibandh) किसी विषय से जुड़े आपके पूर्वाग्रहों को दूर कर सटीक जानकारी प्रदान करते हैं जिससे अज्ञानता की वजह से हम लोगों के सामने शर्मिंदा होने से बच जाते हैं।

आइए सबसे पहले जानते हैं कि हिंदी में निबंध की परिभाषा (definition of essay) क्या होती है?

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हिंदी निबंध (Hindi Nibandh / Essay in Hindi) - हिंदी निबंध लेखन, हिंदी निबंध 100, 200, 300, 500 शब्दों में

कुछ सामान्य विषयों (common topics) पर जानकारी जुटाने में छात्रों की सहायता करने के उद्देश्य से हमने हिंदी में निबंध (Essay in Hindi) और भाषणों के रूप में कई लेख तैयार किए हैं। स्कूली छात्रों (कक्षा 1 से 12 तक) एवं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगे विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हिंदी निबंध (hindi nibandh), भाषण तथा कविता (useful essays, speeches and poems) से उनको बहुत मदद मिलेगी तथा उनके ज्ञान के दायरे में विस्तार होगा। ऐसे में यदि कभी परीक्षा में इससे संबंधित निबंध आ जाए या भाषण देना होगा, तो छात्र उन परिस्थितियों / प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन कर पाएँगे।

महत्वपूर्ण लेख :

  • 10वीं के बाद लोकप्रिय कोर्स
  • 12वीं के बाद लोकप्रिय कोर्स
  • क्या एनसीईआरटी पुस्तकें जेईई मेन की तैयारी के लिए काफी हैं?
  • कक्षा 9वीं से नीट की तैयारी कैसे करें

छात्र जीवन प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के सबसे सुनहरे समय में से एक होता है जिसमें उसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। वास्तव में जीवन की आपाधापी और चिंताओं से परे मस्ती से भरा छात्र जीवन ज्ञान अर्जित करने को समर्पित होता है। छात्र जीवन में अर्जित ज्ञान भावी जीवन तथा करियर के लिए सशक्त आधार तैयार करने का काम करता है। नींव जितनी अच्छी और मजबूत होगी उस पर तैयार होने वाला भवन भी उतना ही मजबूत होगा और जीवन उतना ही सुखद और चिंतारहित होगा। इसे देखते हुए स्कूलों में शिक्षक छात्रों को विषयों से संबंधित अकादमिक ज्ञान से लैस करने के साथ ही विभिन्न प्रकार की पाठ्येतर गतिविधियों के जरिए उनके ज्ञान के दायरे का विस्तार करने का प्रयास करते हैं। इन पाठ्येतर गतिविधियों में समय-समय पर हिंदी निबंध (hindi nibandh) या लेख और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन करना शामिल है।

करियर संबंधी महत्वपूर्ण लेख :

  • डॉक्टर कैसे बनें?
  • सॉफ्टवेयर इंजीनियर कैसे बनें
  • इंजीनियर कैसे बन सकते हैं?

निबंध, गद्य विधा की एक लेखन शैली है। हिंदी साहित्य कोष के अनुसार निबंध ‘किसी विषय या वस्तु पर उसके स्वरूप, प्रकृति, गुण-दोष आदि की दृष्टि से लेखक की गद्यात्मक अभिव्यक्ति है।’ एक अन्य परिभाषा में सीमित समय और सीमित शब्दों में क्रमबद्ध विचारों की अभिव्यक्ति को निबंध की संज्ञा दी गई है। इस तरह कह सकते हैं कि मोटे तौर पर किसी विषय पर अपने विचारों को लिखकर की गई अभिव्यक्ति ही निबंध है।

अन्य महत्वपूर्ण लेख :

  • हिंदी दिवस पर भाषण
  • हिंदी दिवस पर कविता
  • हिंदी पत्र लेखन

आइए अब जानते हैं कि निबंध के कितने अंग होते हैं और इन्हें किस प्रकार प्रभावपूर्ण ढंग से लिखकर आकर्षक बनाया जा सकता है। किसी भी हिंदी निबंध (Essay in hindi) के मोटे तौर पर तीन भाग होते हैं। ये हैं - प्रस्तावना या भूमिका, विषय विस्तार और उपसंहार।

प्रस्तावना (भूमिका)- हिंदी निबंध के इस हिस्से में विषय से पाठकों का परिचय कराया जाता है। निबंध की भूमिका या प्रस्तावना, इसका बेहद अहम हिस्सा होती है। जितनी अच्छी भूमिका होगी पाठकों की रुचि भी निबंध में उतनी ही अधिक होगी। प्रस्तावना छोटी और सटीक होनी चाहिए ताकि पाठक संपूर्ण हिंदी लेख (hindi me lekh) पढ़ने को प्रेरित हों और जुड़ाव बना सकें।

विषय विस्तार- निबंध का यह मुख्य भाग होता है जिसमें विषय के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। इसमें इसके सभी संभव पहलुओं की जानकारी दी जाती है। हिंदी निबंध (hindi nibandh) के इस हिस्से में अपने विचारों को सिलसिलेवार ढंग से लिखकर अभिव्यक्त करने की खूबी का प्रदर्शन करना होता है।

उपसंहार- निबंध का यह अंतिम भाग होता है, इसमें हिंदी निबंध (hindi nibandh) के विषय पर अपने विचारों का सार रखते हुए पाठक के सामने निष्कर्ष रखा जाता है।

ये भी देखें :

अग्निपथ योजना रजिस्ट्रेशन

अग्निपथ योजना एडमिट कार्ड

अग्निपथ योजना सिलेबस

अंत में यह जानना भी अत्यधिक आवश्यक है कि निबंध कितने प्रकार के होते हैं। मोटे तौर निबंध को निम्नलिखित श्रेणियों में रखा जाता है-

वर्णनात्मक निबंध - इस तरह के निबंधों में किसी घटना, वस्तु, स्थान, यात्रा आदि का वर्णन किया जाता है। इसमें त्योहार, यात्रा, आयोजन आदि पर लेखन शामिल है। इनमें घटनाओं का एक क्रम होता है और इस तरह के निबंध लिखने आसान होते हैं।

विचारात्मक निबंध - इस तरह के निबंधों में मनन-चिंतन की अधिक आवश्यकता होती है। अक्सर ये किसी समस्या – सामाजिक, राजनीतिक या व्यक्तिगत- पर लिखे जाते हैं। विज्ञान वरदान या अभिशाप, राष्ट्रीय एकता की समस्या, बेरोजगारी की समस्या आदि ऐसे विषय हो सकते हैं। इन हिंदी निबंधों (hindi nibandh) में विषय के अच्छे-बुरे पहलुओं पर विचार व्यक्त किया जाता है और समस्या को दूर करने के उपाय भी सुझाए जाते हैं।

भावात्मक निबंध - ऐसे निबंध जिनमें भावनाओं को व्यक्त करने की अधिक स्वतंत्रता होती है। इनमें कल्पनाशीलता के लिए अधिक छूट होती है। भाव की प्रधानता के कारण इन निबंधों में लेखक की आत्मीयता झलकती है। मेरा प्रिय मित्र, यदि मैं डॉक्टर होता जैसे विषय इस श्रेणी में रखे जा सकते हैं।

इसके साथ ही विषय वस्तु की दृष्टि से भी निबंधों को सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसी बहुत सी श्रेणियों में बाँटा जा सकता है।

ये भी पढ़ें-

  • केंद्रीय विद्यालय एडमिशन
  • नवोदय कक्षा 6 प्रवेश
  • एनवीएस एडमिशन कक्षा 9

जिस प्रकार बातचीत को आकर्षक और प्रभावी बनाने के लिए लोग मुहावरे, लोकोक्तियों, सूक्तियों, दोहों, कविताओं आदि की मदद लेते हैं, ठीक उसी तरह निबंध को भी प्रभावी बनाने के लिए इनकी सहायता ली जानी चाहिए। उदाहरण के लिए मित्रता पर हिंदी निबंध (hindi nibandh) लिखते समय तुलसीदास जी की इन पंक्तियों की मदद ले सकते हैं -

जे न मित्र दुख होंहि दुखारी, तिन्हिं बिलोकत पातक भारी।

यानि कि जो व्यक्ति मित्र के दुख से दुखी नहीं होता है, उनको देखने से बड़ा पाप होता है।

हिंदी या मातृभाषा पर निबंध लिखते समय भारतेंदु हरिश्चंद्र की पंक्तियों का प्रयोग करने से चार चाँद लग जाएगा-

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल

बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।

प्रासंगिकता और अपने विवेक के अनुसार लेखक निबंधों में ऐसी सामग्री का उपयोग निबंध को प्रभावी बनाने के लिए कर सकते हैं। इनका भंडार तैयार करने के लिए जब कभी कोई पंक्ति या उद्धरण अच्छा लगे, तो एकत्रित करते रहें और समय-समय पर इनको दोहराते रहें।

उपरोक्त सभी प्रारूपों का उपयोग कर छात्रों के लिए हमने निम्नलिखित हिंदी में निबंध (Essay in Hindi) तैयार किए हैं -

दुनिया के कई देशों में मजदूरों और श्रमिकों को सम्मान देने के उद्देश्य से हर वर्ष 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। इसे लेबर डे, श्रमिक दिवस या मई डे भी कहा जाता है। श्रम दिवस एक विशेष दिन है जो मजदूरों और श्रम वर्ग को समर्पित है। यह मजदूरों की कड़ी मेहनत को सम्मानित करने का दिन है। ज्यादातर देशों में इसे 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्रम दिवस का इतिहास और उत्पत्ति अलग-अलग देशों में अलग-अलग है। विद्यार्थियों को कक्षा में मजदूर दिवस पर निबंध लिखने, मजदूर दिवस पर भाषण देने के लिए कहा जाता है। इस निबंध की मदद से विद्यार्थी अपनी तैयारी कर सकते हैं।

सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुभाष चंद्र बोस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के नेता थे और बाद में उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक का गठन किया। इसके माध्यम से भारत में सभी ब्रिटिश विरोधी ताकतों को एकजुट करने की पहल की थी। बोस ब्रिटिश सरकार के मुखर आलोचक थे और स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए और अधिक आक्रामक कार्रवाई की वकालत करते थे। विद्यार्थियों को अक्सर कक्षा और परीक्षा में सुभाष चंद्र बोस जयंती (subhash chandra bose jayanti) या सुभाष चंद्र बोस पर हिंदी में निबंध (subhash chandra bose essay in hindi) लिखने को कहा जाता है। यहां सुभाष चंद्र बोस पर 100, 200 और 500 शब्दों का निबंध दिया गया है।

भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ। इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस के सम्मान में स्कूलों में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। गणतंत्र दिवस के दिन सभी स्कूलों, सरकारी व गैर सरकारी दफ्तरों में झंडोत्तोलन होता है। राष्ट्रगान गाया जाता है। मिठाईयां बांटी जाती है और अवकाश रहता है। छात्रों और बच्चों के लिए 100, 200 और 500 शब्दों में गणतंत्र दिवस पर निबंध पढ़ें।

26 जनवरी, 1950 को हमारे देश का संविधान लागू किया गया, इसमें भारत को गणतांत्रिक व्यवस्था वाला देश बनाने की राह तैयार की गई। गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाषण (रिपब्लिक डे स्पीच) देने के लिए हिंदी भाषण की उपयुक्त सामग्री (Republic Day Speech Ideas) की यदि आपको भी तलाश है तो समझ लीजिए कि गणतंत्र दिवस पर भाषण (Republic Day speech in Hindi) की आपकी तलाश यहां खत्म होती है। इस राष्ट्रीय पर्व के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक बनाने और उनके ज्ञान को परखने के लिए गणतत्र दिवस पर निबंध (Republic day essay) लिखने का प्रश्न भी परीक्षाओं में पूछा जाता है। इस लेख में दी गई जानकारी की मदद से Gantantra Diwas par nibandh लिखने में भी मदद मिलेगी। Gantantra Diwas par lekh bhashan तैयार करने में इस लेख में दी गई जानकारी की मदद लें और अच्छा प्रदर्शन करें।

मोबाइल फ़ोन को सेल्युलर फ़ोन भी कहा जाता है। मोबाइल आज आधुनिक प्रौद्योगिकी का एक अहम हिस्सा है जिसने दुनिया को एक साथ लाकर हमारे जीवन को बहुत प्रभावित किया है। मोबाइल हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। मोबाइल में इंटरनेट के इस्तेमाल ने कई कामों को बेहद आसान कर दिया है। मनोरंजन, संचार के साथ रोजमर्रा के कामों में भी इसकी अहम भूमिका हो गई है। इस निबंध में मोबाइल फोन के बारे में बताया गया है।

भारत में प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने जनभाषा हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया। इस दिन की याद में हर वर्ष 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। वहीं हिंदी भाषा को सम्मान देने के लिए 10 जनवरी को प्रतिवर्ष विश्व हिंदी दिवस (World Hindi Diwas) मनाया जाता है। इस लेख में राष्ट्रीय हिंदी दिवस (14 सितंबर) और विश्व हिंदी दिवस (10 जनवरी) के बारे में चर्चा की गई है।

मकर संक्रांति का त्योहार यूपी, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में 14 जनवरी को मनाया जाता है। इसे खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान के बाद पूजा करके दान करते हैं। इस दिन खिचड़ी, तिल-गुड, चिउड़ा-दही खाने का रिवाज है। प्रयागराज में इस दिन से कुंभ मेला आरंभ होता है। इस लेख में मकर संक्रांति के बारे में बताया गया है।

पर्यावरण से संबंधित मुद्दों की चर्चा करते समय ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा अक्सर होती है। ग्लोबल वार्मिंग का संबंध वैश्विक तापमान में वृद्धि से है। इसके अनेक कारण हैं। इनमें वनों का लगातार कम होना और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन प्रमुख है। वनों का विस्तार करके और ग्रीन हाउस गैसों पर नियंत्रण करके हम ग्लोबल वार्मिंग की समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठा सकते हैं। ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध- कारण और समाधान में इस विषय पर चर्चा की गई है।

भारत में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है। समाचारों में अक्सर भ्रष्टाचार से जुड़े मामले प्रकाश में आते रहते हैं। सरकार ने भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए कई उपाय किए हैं। अलग-अलग एजेंसियां भ्रष्टाचार करने वालों पर कार्रवाई करती रहती हैं। फिर भी आम जनता को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। हालांकि डिजीटल इंडिया की पहल के बाद कई मामलों में पारदर्शिता आई है। लेकिन भ्रष्टाचार के मामले कम हुए है, समाप्त नहीं हुए हैं। भ्रष्टाचार पर निबंध के माध्यम से आपको इस विषय पर सभी पहलुओं की जानकारी मिलेगी।

समय-समय पर ईश्वरीय शक्ति का एहसास कराने के लिए संत-महापुरुषों का जन्म होता रहा है। गुरु नानक भी ऐसे ही विभूति थे। उन्होंने अपने कार्यों से लोगों को चमत्कृत कर दिया। गुरु नानक की तर्कसम्मत बातों से आम जनमानस उनका मुरीद हो गया। उन्होंने दुनिया को मानवता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। भारत, पाकिस्तान, अरब और अन्य जगहों पर वर्षों तक यात्रा की और लोगों को उपदेश दिए। गुरु नानक जयंती पर निबंध से आपको उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की जानकारी मिलेगी।

कुत्ता हमारे आसपास रहने वाला जानवर है। सड़कों पर, गलियों में कहीं भी कुत्ते घूमते हुए दिख जाते हैं। शौक से लोग कुत्तों को पालते भी हैं। क्योंकि वे घर की रखवाली में सहायक होते हैं। बच्चों को अक्सर परीक्षा में मेरा पालतू कुत्ता विषय पर निबंध लिखने को कहा जाता है। यह लेख बच्चों को मेरा पालतू कुत्ता विषय पर निबंध लिखने में सहायक होगा।

स्वामी विवेकानंद जी हमारे देश का गौरव हैं। विश्व-पटल पर वास्तविक भारत को उजागर करने का कार्य सबसे पहले किसी ने किया तो वें स्वामी विवेकानंद जी ही थे। उन्होंने ही विश्व को भारतीय मानसिकता, विचार, धर्म, और प्रवृति से परिचित करवाया। स्वामी विवेकानंद जी के बारे में जानने के लिए आपको इस लेख को पढ़ना चाहिए। यह लेख निश्चित रूप से आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन करेगा।

हम सभी ने "महिला सशक्तिकरण" या नारी सशक्तिकरण के बारे में सुना होगा। "महिला सशक्तिकरण"(mahila sashaktikaran essay) समाज में महिलाओं की स्थिति को सुदृढ़ बनाने और सभी लैंगिक असमानताओं को कम करने के लिए किए गए कार्यों को संदर्भित करता है। व्यापक अर्थ में, यह विभिन्न नीतिगत उपायों को लागू करके महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण से संबंधित है। प्रत्येक बालिका की स्कूल में उपस्थिति सुनिश्चित करना और उनकी शिक्षा को अनिवार्य बनाना, महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस लेख में "महिला सशक्तिकरण"(mahila sashaktikaran essay) पर कुछ सैंपल निबंध दिए गए हैं, जो निश्चित रूप से सभी के लिए सहायक होंगे।

भगत सिंह एक युवा क्रांतिकारी थे जिन्होंने भारत की आजादी के लिए लड़ते हुए बहुत कम उम्र में ही अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। देश के लिए उनकी भक्ति निर्विवाद है। शहीद भगत सिंह महज 23 साल की उम्र में शहीद हो गए। उन्होंने न केवल भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, बल्कि वह इसे हासिल करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को भी तैयार थे। उनके निधन से पूरे देश में देशभक्ति की भावना प्रबल हो गई। उनके समर्थकों द्वारा उन्हें शहीद के रूप में सम्मानित किया गया था। वह हमेशा हमारे बीच शहीद भगत सिंह के नाम से ही जाने जाएंगे। भगत सिंह के जीवन परिचय के लिए अक्सर छोटी कक्षा के छात्रों को भगत सिंह पर निबंध तैयार करने को कहा जाता है। इस लेख के माध्यम से आपको भगत सिंह पर निबंध तैयार करने में सहायता मिलेगी।

वसुधैव कुटुंबकम एक संस्कृत वाक्यांश है जिसका अर्थ है "संपूर्ण विश्व एक परिवार है"। यह महा उपनिषद् से लिया गया है। वसुधैव कुटुंबकम वह दार्शनिक अवधारणा है जो सार्वभौमिक भाईचारे और सभी प्राणियों के परस्पर संबंध के विचार को पोषित करती है। यह वाक्यांश संदेश देता है कि प्रत्येक व्यक्ति वैश्विक समुदाय का सदस्य है और हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए, सभी की गरिमा का ध्यान रखने के साथ ही सबके प्रति दयाभाव रखना चाहिए। वसुधैव कुटुंबकम की भावना को पोषित करने की आवश्यकता सदैव रही है पर इसकी आवश्यकता इस समय में पहले से कहीं अधिक है। समय की जरूरत को देखते हुए इसके महत्व से भावी नागरिकों को अवगत कराने के लिए वसुधैव कुटुंबकम विषय पर निबंध या भाषणों का आयोजन भी स्कूलों में किया जाता है। कॅरियर्स360 के द्वारा छात्रों की इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वसुधैव कुटुंबकम विषय पर यह लेख तैयार किया गया है।

गाय भारत के एक बेहद महत्वपूर्ण पशु में से एक है जिस पर न जाने कितने ही लोगों की आजीविका आश्रित है क्योंकि गाय के शरीर से प्राप्त होने वाली हर वस्तु का उपयोग भारतीय लोगों द्वारा किसी न किसी रूप में किया जाता है। ना सिर्फ आजीविका के लिहाज से, बल्कि आस्था के दृष्टिकोण से भी भारत में गाय एक महत्वपूर्ण पशु है क्योंकि भारत में मौजूद सबसे बड़ी आबादी यानी हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए गाय आस्था का प्रतीक है। ऐसे में विद्यालयों में गाय को लेकर निबंध लिखने का कार्य दिया जाना आम है। गाय के इस निबंध के माध्यम से छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले गाय पर निबंध को लिखने में भी सहायता मिलेगी।

क्रिसमस (christmas in hindi) भारत सहित दुनिया भर में मनाए जाने वाले बेहद महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह ईसाइयों का प्रमुख त्योहार है। प्रत्येक वर्ष इसे 25 दिसंबर को मनाया जाता है। क्रिसमस का महत्व समझाने के लिए कई बार स्कूलों में बच्चों को क्रिसमस पर निबंध (christmas in hindi) लिखने का कार्य दिया जाता है। क्रिसमस पर एग्जाम के लिए प्रभावी निबंध तैयार करने का तरीका सीखें।

रक्षाबंधन हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व पूरी तरह से भाई और बहन के रिश्ते को समर्पित त्योहार है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षाबंधन बांध कर उनके लंबी उम्र की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को कोई तोहफा देने के साथ ही जीवन भर उनके सुख-दुख में उनका साथ देने का वचन देते हैं। इस दिन छोटी बच्चियाँ देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को राखी बांधती हैं। रक्षाबंधन पर हिंदी में निबंध (essay on rakshabandhan in hindi) आधारित इस लेख से विद्यार्थियों को रक्षाबंधन के त्योहार पर न सिर्फ लेख लिखने में सहायता प्राप्त होगी, बल्कि वे इसकी सहायता से रक्षाबंधन के पर्व का महत्व भी समझ सकेंगे।

होली त्योहार जल्द ही देश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला है। होली आकर्षक और मनोहर रंगों का त्योहार है, यह एक ऐसा त्योहार है जो हर धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन की सीमा से परे जाकर लोगों को भाई-चारे का संदेश देता है। होली अंदर के अहंकार और बुराई को मिटा कर सभी के साथ हिल-मिलकर, भाई-चारे, प्रेम और सौहार्द्र के साथ रहने का त्योहार है। होली पर हिंदी में निबंध (hindi mein holi par nibandh) को पढ़ने से होली के सभी पहलुओं को जानने में मदद मिलेगी और यदि परीक्षा में holi par hindi mein nibandh लिखने को आया तो अच्छा अंक लाने में भी सहायता मिलेगी।

दशहरा हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। बच्चों को विद्यालयों में दशहरा पर निबंध (Essay in hindi on Dussehra) लिखने को भी कहा जाता है, जिससे उनकी दशहरा के प्रति उत्सुकता बनी रहे और उन्हें दशहरा के बारे पूर्ण जानकारी भी मिले। दशहरा पर निबंध (Essay on Dussehra in Hindi) के इस लेख में हम देखेंगे कि लोग दशहरा कैसे और क्यों मनाते हैं, इसलिए हिंदी में दशहरा पर निबंध (Essay on Dussehra in Hindi) के इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें।

हमें उम्मीद है कि दीवाली त्योहार पर हिंदी में निबंध उन युवा शिक्षार्थियों के लिए फायदेमंद साबित होगा जो इस विषय पर निबंध लिखना चाहते हैं। हमने नीचे दिए गए निबंध में शुभ दिवाली त्योहार (Diwali Festival) के सार को सही ठहराने के लिए अपनी ओर से एक मामूली प्रयास किया है। बच्चे दिवाली पर हिंदी के इस निबंध से कुछ सीख कर लाभ उठा सकते हैं कि वाक्यों को कैसे तैयार किया जाए, Class 1 से 10 तक के लिए दीपावली पर निबंध हिंदी में तैयार करने के लिए इसके लिंक पर जाएँ।

बाल दिवस पर भाषण (Children's Day Speech In Hindi), बाल दिवस पर हिंदी में निबंध (Children's Day essay In Hindi), बाल दिवस गीत, कविता पाठ, चित्रकला, खेलकूद आदि से जुड़ी प्रतियोगिताएं बाल दिवस के मौके पर आयोजित की जाती हैं। स्कूलों में बाल दिवस पर भाषण देने और बाल दिवस पर हिंदी में निबंध लिखने के लिए उपयोगी सामग्री इस लेख में मिलेगी जिसकी मदद से बाल दिवस पर भाषण देने और बाल दिवस के लिए निबंध तैयार करने में मदद मिलेगी। कई बार तो परीक्षाओं में भी बाल दिवस पर लेख लिखने का प्रश्न पूछा जाता है। इसमें भी यह लेख मददगार होगा।

हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। भारत देश अनेकता में एकता वाला देश है। अपने विविध धर्म, संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं के साथ, भारत के लोग सद्भाव, एकता और सौहार्द के साथ रहते हैं। भारत में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं में, हिंदी सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली और बोली जाने वाली भाषा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार 14 सितंबर 1949 को हिंदी भाषा को राजभाषा के रूप में अपनाया गया था। हमारी मातृभाषा हिंदी और देश के प्रति सम्मान दिखाने के लिए हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है। हिंदी दिवस पर भाषण के लिए उपयोगी जानकारी इस लेख में मिलेगी।

हिन्दी में कवियों की परम्परा बहुत लम्बी है। हिंदी के महान कवियों ने कालजयी रचनाएं लिखी हैं। हिंदी में निबंध और वाद-विवाद आदि का जितना महत्व है उतना ही महत्व हिंदी कविताओं और कविता-पाठ का भी है। हिंदी दिवस पर विद्यालय या अन्य किसी आयोजन पर हिंदी कविता भी चार चाँद लगाने का काम करेगी। हिंदी दिवस कविता के इस लेख में हम हिंदी भाषा के सम्मान में रचित, हिंदी का महत्व बतलाती विभिन्न कविताओं की जानकारी दी गई है।

15 अगस्त, 1947 को हमारा देश भारत 200 सालों के अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हुआ था। यही वजह है कि यह दिन इतिहास में दर्ज हो गया और इसे भारत के स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा। इस दिन देश के प्रधानमंत्री लालकिले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते तो हैं ही और साथ ही इसके बाद वे पूरे देश को लालकिले से संबोधित भी करते हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री का पूरा भाषण टीवी व रेडियो के माध्यम से पूरे देश में प्रसारित किया जाता है। इसके अलावा देश भर में इस दिन सभी कार्यालयों में छुट्टी होती है। स्कूल्स व कॉलेज में रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस से संबंधित संपूर्ण जानकारी आपको इस लेख में मिलेगी जो निश्चित तौर पर आपके लिए लेख लिखने में सहायक सिद्ध होगी।

प्रदूषण पृथ्वी पर वर्तमान के उन प्रमुख मुद्दों में से एक है, जो हमारी पृथ्वी को व्यापक स्तर पर प्रभावित कर रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो लंबे समय से चर्चा में है, 21वीं सदी में इसका हानिकारक प्रभाव बड़े पैमाने पर महसूस किया जा रहा है। हालांकि विभिन्न देशों की सरकारों ने इन प्रभावों को रोकने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं, लेकिन अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इससे कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं में गड़बड़ी आती है। इतना ही नहीं, आज कई वनस्पतियां और जीव-जंतु या तो विलुप्त हो चुके हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। प्रदूषण की मात्रा में तेजी से वृद्धि के कारण पशु तेजी से न सिर्फ अपना घर खो रहे हैं, बल्कि जीने लायक प्रकृति को भी खो रहे हैं। प्रदूषण ने दुनिया भर के कई प्रमुख शहरों को प्रभावित किया है। इन प्रदूषित शहरों में से अधिकांश भारत में ही स्थित हैं। दुनिया के कुछ सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली, कानपुर, बामेंडा, मॉस्को, हेज़, चेरनोबिल, बीजिंग शामिल हैं। हालांकि इन शहरों ने प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ और बहुत ही तेजी के साथ किए जाने की जरूरत है।

वायु प्रदूषण पर हिंदी में निबंध के ज़रिए हम इसके बारे में थोड़ा गहराई से जानेंगे। वायु प्रदूषण पर लेख (Essay on Air Pollution) से इस समस्या को जहाँ समझने में आसानी होगी वहीं हम वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार पहलुओं के बारे में भी जान सकेंगे। इससे स्कूली विद्यार्थियों को वायु प्रदूषण पर निबंध (Essay on Air Pollution) तैयार करने में भी मदद होगी। हिंदी में वायु प्रदूषण पर निबंध से परीक्षा में बेहतर स्कोर लाने में मदद मिलेगी।

एक बड़े भू-क्षेत्र में लंबे समय तक रहने वाले मौसम की औसत स्थिति को जलवायु की संज्ञा दी जाती है। किसी भू-भाग की जलवायु पर उसकी भौगोलिक स्थिति का सर्वाधिक असर पड़ता है। पृथ्वी ग्रह का बुखार (तापमान) लगातार बढ़ रहा है। सरकारों को इसमें नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त कदम उठाने होंगे। जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए सरकारों को सतत विकास के उपायों में निवेश करने, ग्रीन जॉब, हरित अर्थव्यवस्था के निर्माण की ओर आगे बढ़ने की जरूरत है। पृथ्वी पर जीवन को बचाए रखने, इसे स्वस्थ रखने और ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर ईमानदारी से काम करना होगा। ग्लोबल वार्मिंग या जलवायु परिवर्तन पर निबंध के जरिए छात्रों को इस विषय और इससे जुड़ी समस्याओं और समाधान के बारे में जानने को मिलेगा।

हमारी यह पृथ्वी जिस पर हम सभी निवास करते हैं इसके पर्यावरण के संरक्षण के लिए विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) हर साल 5 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1972 में मानव पर्यावरण पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मलेन के दौरान हुई थी। पहला विश्व पर्यावरण दिवस (Environment Day) 5 जून 1974 को “केवल एक पृथ्वी” (Only One Earth) स्लोगन/थीम के साथ मनाया गया था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने भी भाग लिया था। इसी सम्मलेन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की भी स्थापना की गई थी। इस विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) को मनाने का उद्देश्य विश्व के लोगों के भीतर पर्यावरण (Environment) के प्रति जागरूकता लाना और साथ ही प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करना भी है। इसी विषय पर विचार करते हुए 19 नवंबर, 1986 को पर्यवरण संरक्षण अधिनियम लागू किया गया तथा 1987 से हर वर्ष पर्यावरण दिवस की मेजबानी करने के लिए अलग-अलग देश को चुना गया।

आज के युग में जब हम अपना अधिकतर समय पढाई पर केंद्रित करने का प्रयास करते नजर आते हैं और साथ ही अपना ज़्यादातर समय ऑनलाइन रह कर व्यतीत करना पसंद करते हैं, ऐसे में हमारे जीवन में खेलों का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। खेल हमारे लिए केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं, अपितु हमारे सर्वांगीण विकास का एक माध्यम भी है। हमारे जीवन में खेल उतना ही जरूरी है, जितना पढाई करना। आज कल के युग में मानव जीवन में शारीरिक कार्य की तुलना में मानसिक कार्य में बढ़ोतरी हुई है और हमारी जीवन शैली भी बदल गई है, हम रात को देर से सोते हैं और साथ ही सुबह देर से उठते हैं। जाहिर है कि यह दिनचर्या स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है और इसके साथ ही कार्य या पढाई की वजह से मानसिक तनाव पहले की तुलना में वृद्धि महसूस की जा सकती है। ऐसी स्थिति में जब हमारे जीवन में शारीरिक परिश्रम अधिक नहीं है, तो हमारे जीवन में खेलो का महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।

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हमेशा से कहा जाता रहा है कि ‘आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है’, जैसे-जैसे मानव की आवश्यकता बढती गई, वैसे-वैसे उसने अपनी सुविधा के लिए अविष्कार करना आरंभ किया। विज्ञान से तात्पर्य एक ऐसे व्यवस्थित ज्ञान से है जो विचार, अवलोकन तथा प्रयोगों से प्राप्त किया जाता है, जो कि किसी अध्ययन की प्रकृति या सिद्धांतों की जानकारी प्राप्त करने के लिए किए जाते हैं। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी शाखा के लिए भी किया जाता है, जो तथ्य, सिद्धांत और तरीकों का प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करता है।

शिक्षक अपने शिष्य के जीवन के साथ साथ उसके चरित्र निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। कहा जाता है कि सबसे पहली गुरु माँ होती है, जो अपने बच्चों को जीवन प्रदान करने के साथ-साथ जीवन के आधार का ज्ञान भी देती है। इसके बाद अन्य शिक्षकों का स्थान होता है। किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करना बहुत ही बड़ा और कठिन कार्य है। व्यक्ति को शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उसके चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करना भी उसी प्रकार का कार्य है, जैसे कोई कुम्हार मिट्टी से बर्तन बनाने का कार्य करता है। इसी प्रकार शिक्षक अपने छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के साथ साथ उसके व्यक्तित्व का निर्माण भी करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 1908 में हुई थी, जब न्यूयॉर्क शहर की सड़को पर हजारों महिलाएं घंटों काम के लिए बेहतर वेतन और सम्मान तथा समानता के अधिकार को प्राप्त करने के लिए उतरी थीं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का प्रस्ताव क्लारा जेटकिन का था जिन्होंने 1910 में यह प्रस्ताव रखा था। पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में मनाया गया था।

हम उम्मीद करते हैं कि स्कूली छात्रों के लिए तैयार उपयोगी हिंदी में निबंध, भाषण और कविता (Essays, speech and poems for school students) के इस संकलन से निश्चित तौर पर छात्रों को मदद मिलेगी।

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बाल श्रम को बच्चो द्वारा रोजगार के लिए किसी भी प्रकार के कार्य को करने के रूप में परिभाषित किया गया है जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा डालता है और उन्हें मूलभूत शैक्षिक और मनोरंजक जरूरतों तक पहुंच से वंचित करता है। एक बच्चे को आम तौर व्यस्क तब माना जाता है जब वह पंद्रह वर्ष या उससे अधिक का हो जाता है। इस आयु सीमा से कम के बच्चों को किसी भी प्रकार के जबरन रोजगार में संलग्न होने की अनुमति नहीं है। बाल श्रम बच्चों को सामान्य परवरिश का अनुभव करने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने और उनके शारीरिक और भावनात्मक विकास में बाधा के रूप में देखा जाता है। जानिए कैसे तैयार करें बाल श्रम या फिर कहें तो बाल मजदूरी पर निबंध।

एपीजे अब्दुल कलाम की गिनती आला दर्जे के वैज्ञानिक होने के साथ ही प्रभावी नेता के तौर पर भी होती है। वह 21वीं सदी के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में से एक हैं। कलाम देश के 11वें राष्ट्रपति बने, अपने कार्यकाल में समाज को लाभ पहुंचाने वाली कई पहलों की शुरुआत की। मेरा प्रिय नेता विषय पर अक्सर परीक्षा में निबंध लिखने का प्रश्न पूछा जाता है। जानिए कैसे तैयार करें अपने प्रिय नेता: एपीजे अब्दुल कलाम पर निबंध।

हमारे जीवन में बहुत सारे लोग आते हैं। उनमें से कई को भुला दिया जाता है, लेकिन कुछ का हम पर स्थायी प्रभाव पड़ता है। भले ही हमारे कई दोस्त हों, उनमें से कम ही हमारे अच्छे दोस्त होते हैं। कहा भी जाता है कि सौ दोस्तों की भीड़ के मुक़ाबले जीवन में एक सच्चा/अच्छा दोस्त होना काफी है। यह लेख छात्रों को 'मेरे प्रिय मित्र'(My Best Friend Nibandh) पर निबंध तैयार करने में सहायता करेगा।

3 फरवरी, 1879 को भारत के हैदराबाद में एक बंगाली परिवार ने सरोजिनी नायडू का दुनिया में स्वागत किया। उन्होंने कम उम्र में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। उन्होंने कैम्ब्रिज में किंग्स कॉलेज और गिर्टन, दोनों ही पाठ्यक्रमों में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई पूरी की। जब वह एक बच्ची थी, तो कुछ भारतीय परिवारों ने अपनी बेटियों को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। हालाँकि, सरोजिनी नायडू के परिवार ने लगातार उदार मूल्यों का समर्थन किया। वह न्याय की लड़ाई में विरोध की प्रभावशीलता पर विश्वास करते हुए बड़ी हुई। सरोजिनी नायडू से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इस लेख को पढ़ें।

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Frequently Asked Question (FAQs)

किसी भी हिंदी निबंध (Essay in hindi) को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है- ये हैं- प्रस्तावना या भूमिका, विषय विस्तार और उपसंहार (conclusion)।

हिंदी निबंध लेखन शैली की दृष्टि से मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं-

वर्णनात्मक हिंदी निबंध - इस तरह के निबंधों में किसी घटना, वस्तु, स्थान, यात्रा आदि का वर्णन किया जाता है।

विचारात्मक निबंध - इस तरह के निबंधों में मनन-चिंतन की अधिक आवश्यकता होती है।

भावात्मक निबंध - ऐसे निबंध जिनमें भावनाओं को व्यक्त करने की अधिक स्वतंत्रता होती है।

विषय वस्तु की दृष्टि से भी निबंधों को सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसी बहुत सी श्रेणियों में बाँटा जा सकता है।

निबंध में समुचित जगहों पर मुहावरे, लोकोक्तियों, सूक्तियों, दोहों, कविता का प्रयोग करके इसे प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। हिंदी निबंध के प्रभावी होने पर न केवल बेहतर अंक मिलेंगी बल्कि असल जीवन में अपनी बात रखने का कौशल भी विकसित होगा।

कुछ उपयोगी विषयों पर हिंदी में निबंध के लिए ऊपर लेख में दिए गए लिंक्स की मदद ली जा सकती है।

निबंध, गद्य विधा की एक लेखन शैली है। हिंदी साहित्य कोष के अनुसार निबंध ‘किसी विषय या वस्तु पर उसके स्वरूप, प्रकृति, गुण-दोष आदि की दृष्टि से लेखक की गद्यात्मक अभिव्यक्ति है।’ एक अन्य परिभाषा में सीमित समय और सीमित शब्दों में क्रमबद्ध विचारों की अभिव्यक्ति को निबंध की संज्ञा दी गई है। इस तरह कह सकते हैं कि मोटे तौर पर किसी विषय पर अपने विचारों को लिखकर की गई अभिव्यक्ति निबंध है।

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हिन्दी निबंध संग्रह – विभिन्न विषयों पर निबंध

Essay in hindi हिन्दी निबंध संग्रह.

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निबंध (Nibandh) किसी भी विषय के मुख्य विचार और नजरिये का एक सुव्यवस्थित रूप है। निबंध किसी एक विशेष विषय पर आधारित होता है। विषय का एक उचित शीर्षक और उप शीर्षक भी होने चाहिए। इस प्रकार निबंध जानकारी, विचार या भावनाओं के संचार का एक प्रबल माध्यम है। निबंध के द्वारा व्यक्ति अपने विचार नजरिया का संचार करने में समर्थ हो सकता है। निबंध लेखन आपको एक ऐसा सुअवसर प्रदान करता है जिससे आप अपने ज्ञान को दूसरों के सम्मुख प्रकट करते हैं।

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हिंदी में निबंध (Essay in Hindi/ Hindi me Nibandh) - परिभाषा, प्रकार, टॉपिक्स और निबंध लिखने का तरीका जानें

Updated On: September 29, 2023 12:22 pm IST

निबंध किसे कहते हैं? (What is Essay?)

निबंध की परिभाषा (definition of essay in hindi), निबंध के कितने अंग होते हैं .

  • निबंध कितने प्रकार का होता है (Types of Essay in …

हिंदी में निबंध (Essay in Hindi/ Hindi me Nibandh)

निबंध कितने प्रकार का होता है (Types of Essay in Hindi )

हिंदी में निबंध (essay in hindi) लिखते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए-.

  • निबंध लिखना शुरू करने से पहले संबंधित विषय के बारे में जानकारी इकठ्ठा कर लें। 
  • कोशीश करें कि विचार क्रमबद्ध रूप से लिखे जाएं और उनमे सभी महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हों। 
  • निबंध को सरल भाषा में लिखने का प्रयास करें और रोचक बनाएं। 
  • निबंध में उपयोग किए गए शब्द छोटे और प्रभावशाली होने चाहिए। 

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500+ विषयों पर हिंदी निबंध – Essays in Hindi Topics & Ideas

निबंध लिखते समय, कई कॉलेज और हाई स्कूल के छात्रों को लेखक के ब्लॉक का सामना करना पड़ता है और एक निबंध के लिए विषयों और विचारों के बारे में सोचने का कठिन समय होता है। इस लेख में, हम विभिन्न श्रेणियों जैसे तर्कपूर्ण निबंध, प्रौद्योगिकी पर निबंध, 5 वीं, 6 वीं, 7 वीं, 8 वीं कक्षा के छात्रों के लिए पर्यावरण निबंध जैसे कई अच्छे निबंध विषयों को सूचीबद्ध करेंगे। निबंध विषयों की सूची सभी के लिए है – बच्चों से लेकर कॉलेज के छात्रों तक। हमारे पास निबंधों का सबसे बड़ा संग्रह है। एक निबंध और कुछ नहीं बल्कि एक सामग्री है जो लेखक या लेखक की धारणा से लिखी गई है। निबंध एक कहानी, पैम्फलेट, थीसिस, आदि के समान हैं। निबंध के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि आप किसी भी प्रकार की भाषा का उपयोग कर सकते हैं – औपचारिक या अनौपचारिक। यह जीवनी, किसी की आत्मकथा है। निम्नलिखित 100 निबंध विषयों की एक महान सूची है। हम जल्द ही 400 और जोड़ेंगे!

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  • पर्यावरण बचाओ पर निबंध
  • गर्मी का मौसम पर निबंध
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नीतिवचन पर आधारित निबंध विषय

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  • एक सेब एक दिन डॉक्टर को दूर रखता है पर निबंध
  • जहां इच्छा है, वहां रास्ता है पर निबंध
  • समय और ज्वार किसी का इंतजार नहीं करते पर निबंध

6 वीं, 7 वीं, 8 वीं कक्षा के छात्रों के लिए निबंध विषय

  • ध्वनि प्रदूषण पर निबंध
  • देश प्रेम पर निबंध
  • स्वास्थ्य पर निबंध
  • भ्रष्टाचार पर निबंध
  • महिला सशक्तिकरण पर निबंध
  • संगीत पर निबंध
  • समय और ज्वार कोई नहीं के लिए प्रतीक्षा करें पर निबंध
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Essays - निबंध

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भारत पर निबंध (India Essay in Hindi)

भारत

पूरे विश्व भर में भारत एक प्रसिद्ध देश है। भौगोलिक रुप से, हमारा देश एशिया महाद्वीप के दक्षिण में स्थित है। भारत एक अत्यधिक जनसंख्या वाला देश है साथ ही प्राकृतिक रुप से सभी दिशाओं से सुरक्षित है। पूरे विश्व भर में अपनी महान संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों के लिये ये एक प्रसिद्ध देश है। इसके पास हिमालय नाम का एक पर्वत है जो विश्व में सबसे ऊँचा है। ये तीन तरफ से तीन महासागरों से घिरा हुआ है जैसे दक्षिण में भारतीय महासागर, पूरब में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरेबिक सागर से। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो जनसंख्या के लिहाज से दूसरे स्थान पर है। भारत में मुख्य रूप से हिंदी भाषा बोली जाती है परंतु यहां लगभग 22 भाषाओं को राष्ट्रीय रुप से मान्यता दी गयी है।

भारत पर छोटे तथा बड़े निबंध (Long and Short Essay on India in Hindi, Bharat par Nibandh Hindi mein)

इंडिया पर निबंध – 1 (250 – 300 शब्द).

भारत देश शिव, पार्वती, कृष्ण, हनुमान, बुद्ध, महात्मा गाँधी, स्वामी विवेकानंद और कबीर आदि जैसे महापुरुषों की धरती है। भारत एक समृद्ध देश है जहाँ साहित्य, कला और विज्ञान के क्षेत्र में महान लोगों ने जन्म लिया जैसे रविन्द्रनाथ टैगोर, सारा चन्द्रा, प्रेमचन्द, सी.वी.रमन, जगदीश चन्द्र बोस, ए.पी.जे अब्दुल कलाम, कबीर दास आदि।

भारत : विविधता में एकता

भारत“विविधता में एकता”काप्रतिकहैक्योंकि भारत मेंविभिन्न जाति, धर्म, संस्कृति और परंपरा के लोग एकता के साथ रहते हैं। भारत में हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सभी धर्मों के लोग आपस में भाईचारे से रहते है। भारत में 22 प्रकार की आधिकारिक भाषाएँ बोली जाती है। यहाँ हर धर्म, पंथ और समुदाय की अपनी अलग भाषा, पहनावा और रीती रिवाज है। इतनी विभिन्नता में भी भारतीयता की डोर ने सभी को आपस में बांध रखा है।

भारत : एक महान और पुरातन राष्ट्र

भारत एक पुरातन देश है, जहाँ की सभ्यता प्राचीन काल में ही शीर्ष पर थी। यह प्राचीन समय से ही ज्ञान और विज्ञानं का केंद्र रहा है। भारत ने हमेशा ही वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश दिया जिसका अर्थ है यह सम्पूर्ण संसार ही मेरा घर है।

भारत : विश्व गुरु

भारत शिक्षा, शास्त्र और शस्त्र में अग्रणी देश रहा है। भारत में अलबरूनी , मेगस्थनीज आदि जैसे अनेक विदेशी विद्वान शिक्षा प्राप्त करने आते थे।भारत में तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय रहे , जिनमे देश विदेश के विद्यार्थी अध्ययन करने आते थे। भारत ने आर्यभट्ट , वराहमिहिर, रामानुज , चरक , सुश्रुत आदि जैसेविद्वान हुए , जिन्होंने पुरे संसार में भारत का परचम लहराया।

भारत को  वेद, पुराण, संस्कृति, भाषा, विज्ञानं, धर्म  आदि से धनवान बनाने में महापुरुषों का अतुलनीय योगदान रहा है। भारत देवभूमि है, जो ऋषियों की भूमि रही है। हम सभी को भारत देश पर गर्व है।

इसे यूट्यूब पर देखें : इंडिया पर निबंध

निबंध 2 (200 शब्द)

भारत एक खूबसूरत देश है जो अपनी अलग संस्कृति और परंपरा के लिये जाना जाता है। ये अपने ऐतिहासिक धरोहरों और स्मारकों के लिये प्रसिद्ध है। यहाँ के नागरिक बेहद विनम्र और प्रकृति से घुले-मिले होते हैं। ब्रिटिश शासन के तहत 1947 से पहले ये एक गुलाम देश था। हालाँकि, हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और समर्पण की वजह से 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली। जब भारत को आजादी मिली तो पंडित जवाहर लाल नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने और भारतीय झंडे को फहराया और कहा कि “जब दुनिया सोती है, भारत जीवन और आजादी के लिये जागेगा”।

भारत मेरी मातृभूमि है और मैं इसे बहुत प्यार करता हूँ। भारत के लोग स्वभाव से बहुत ही ईमानदार और भरोसेमंद होते हैं। विभिन्न संस्कृति और परंपरा के लोग बिना किसी परेशानी के एक साथ रहते हैं। मेरे देश की मातृ-भाषा हिन्दी है हांलाकि बिना किसी बंधन के अलग-अलग धर्मों के लोगों के द्वारा यहाँ कई भाषाएँ बोली जाती हैं। भारत एक प्राकृतिक सुंदरता का देश है जहाँ समय-समय पर महान लोग पैदा हुए हैं और महान कार्य किये। भारतीयों का स्वाभाव दिल को छू लेने वाला होता है और दूसरे देशों से आये मेहमानों का वो दिल से स्वागत करते हैं।

भारत में जीवन के भारतीय दर्शन का अनुसरण किया जाता है जो सनातन धर्म कहलाता है और यहाँ विविधता में एकता को बनाए रखने के लिये मुख्य कारण बनता है। भारत एक गणतांत्रिक देश है जहाँ देश की जनता को देश के बारे में फैसले लेने का अधिकार है। यहाँ देखने के लिये प्राचीन समय के बहुत सारे अति सुंदर प्राकृतिक दृश्य, स्थल, स्मारक, ऐतिहासिक धरोहर आदि है जो विश्व के हर कोने के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। भारत अपने आध्यात्मिक कार्यों, योगा, मार्शल आर्ट आदि के लिये बहुत प्रसिद्ध है। भारत में दूसरे देशों से भक्तों और तीर्थयात्रियों की एक बड़ी भीड़ यहाँ के प्रसिद्ध मंदिरों, स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों की सुंदरता को देखने आती हैं।

निबंध 3 (350 शब्द)

भारत मेरी मातृ-भूमि है जहाँ मैंने जन्म लिया है। मैं भारत से प्यार करता हूँ और इस पर मुझे गर्व है। भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है जो जनसंख्या में चीन के बाद दूसरे स्थान पर काबिज़ है। इसका समृद्ध और शानदार इतिहास रहा है। इसे विश्व की पुरानी सभ्यता के देश के रुप में देखा जाता है। ये सीखने की धरती है जहाँ विश्व के हर कोने से विद्यार्थी यहाँ के विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिये आते हैं। कई धर्मों के लोगों के अपने विभिन्न अनोखे और विविध संस्कृति और परंपरा के लिये ये देश प्रसिद्ध है।

प्रकृति में आकर्षित होने की वजह से विदेशों में रहने वाले लोग भी यहाँ की संस्कृति और परंपरा का अनुसरण करते हैं। कई आक्रमणकारी यहाँ आये और यहाँ की शोभा और बहुमूल्य चीजों को चुरा कर ले गये। कुछ ने इसको अपना गुलाम बना लिया जबकि देश के बहुत से महान नेताओं की संघर्ष और बलिदान की वजह से 1947 में हमारी मातृ-भूमि अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुयी।

जिस दिन हमारी मातृभूमि आजाद हुयी उसी दिन से हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जा रहा है। पंडित नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। प्राकृतिक संसाधनों से भरा देश होने के बावजूद भी यहाँ के रहवासी गरीब हैं। रविन्द्रनाथ टैगोर, सर जगदीश चन्द्र बोस, सर सी.वी.रमन, श्री एच.एन भाभा आदि जैसे उत्कृष्ट लोगों की वजह से तकनीक, विज्ञान, और साहित्य के क्षेत्र में ये लगातार बढ़ रहा है।

ये एक शांतिप्रिय देश है जहाँ बिना किसी हस्तक्षेप के अपने त्योहारों को मनाने के साथ ही विभिन्न धर्मों के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा का अनुसरण करते हैं। यहाँ पर कई शानदार ऐतिहासिक इमारतें, विरासत, स्मारक और खूबसूरत दृश्य हैं जो हर वर्ष अलग देशों के लोगों के मन को अपनी ओर खिंचता है। भारत में ताजमहल एक महान स्मारक और प्यार का प्रतीक है तथा कश्मीर धरती के स्वर्ग के रुप में है। ये प्रसिद्ध मंदिरों, मस्ज़िदों, चर्चों, गुरुद्वारों, नदियों, घाटियों, कृषि योग्य मैदान, सबसे उँचा पर्वत आदि का देश है।

निबंध 4 (400 शब्द)

भारत मेरा देश है और मुझे भारतीय होने पर गर्व है। ये विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा और विश्व में दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। इसे भारत, हिन्दुस्तान और आर्यव्रत के नाम से भी जाना जाता है। ये एक प्रायद्वीप है जो पूरब में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरेबियन सागर और दक्षिण में भारतीय महासागर जैसे तीन महासगरों से घिरा हुआ है। भारत का राष्ट्रीय पशु चीता, राष्ट्रीय पक्षी मोर, राष्ट्रीय फूल कमल, और राष्ट्रीय फल आम है। भारतीय झंडे में तीन रंग है, केसरिया का मतलब शुद्धता (सबसे ऊपर), सफेद अर्थात् शांति (बीच का जिसमें अशोक चक्र है) और हरा रंग का अर्थ उर्वरता से है (सबसे नीचे)। अशोक चक्र में बराबर भागों में 24 तीलियाँ हैं। भारत का राष्ट्र गान “जन गण मन”, राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” और राष्ट्रीय खेल हॉकी है।

भारत एक ऐसा देश है जहाँ लोग अलग-अलग भाषा बोलते हैं और विभिन्न जाति, धर्म, संप्रदाय और संस्कृति के लोग एक साथ रहते हैं। इसी वजह से भारत में “विविधता में एकता” का ये आम कथन प्रसिद्ध है। इसे आध्यात्मिकता, दर्शन, विज्ञान और प्रौद्योगिकीय की भूमि भी कहा जाता है। प्राचीन समय से ही यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग जैसे हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, जैन और यहूदी एक साथ रहते हैं। ये देश अपने कृषि और खेती के लिये प्रसिद्ध है जो प्राचीन समय से ही इसका आधार रही है। ये अपने पैदा किये हुए अनाज और फल इस्तेमाल करता है। ये एक प्रसिद्ध पर्यटन का स्वर्ग है क्योंकि पूरे विश्व के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। ये स्मारकों, मकबरो, चर्चों, ऐतिहासिक इमारतों, मंदिर, संग्रहालयों, रमणीय दृश्य, वन्य जीव अभ्यारण्य, वास्तुशिल्प की जगह आदि इसके राजस्व का जरिया हैं।

ये वो जगह है जहाँ ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, स्वर्ण मंदिर, कुतुब मीनार, लाल किला, ऊटी, नीलगिरी, कश्मीर, खजुराहों, अजन्ता और एलोरा की गुफाएँ आदि आश्चर्य मौजूद हैं। ये एक महान नदियों, पहाड़ों, घाटियों, झील और महासागरों का देश है। भारत में मुख्य रूप से हिंदी भाषा बोली जाती है। ये एक ऐसा देश है जहाँ 29 राज्य और 7 केन्द्र शासित प्रदेश है। ये मुख्य रुप से कृषि प्रधान देश है जो गन्ना, कपास, जूट, चावल, गेंहूँ, दाल आदि फसलों के उत्पादन के लिये प्रसिद्ध है। ये एक ऐसा देश है जहाँ महान नेता (शिवाजी, गाँधीजी, नेहरु, डॉ अंबेडकर आदि), महान वैज्ञानिकों (डॉ जगदीश चन्द्र बोस, डॉ होमी भाभा, डॉ सी.वी.रमन, डॉ नारालिकर आदि) और महान समाज सुधारकों (टी.एन.सेशन, पदुरंगाशास्त्री अलवले आदि) ने जन्म लिया। ये एक ऐसा देश है जहाँ शांति और एकता के साथ विविधता मौजूद है।

Essay on India in Hindi

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10 मोटिवेशनल किताबें जो आपको ज़रूर पढ़नी चाहिएं

एक उत्तम निबंध कैसे लिखें.

Last Updated: May 9, 2017 By Gopal Mishra 11 Comments

निबंध कैसे लिखें?

How to write an essay in hindi.

निबंध लिखने का तरीका समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि “निबंध क्या है?” और उसके तत्त्व कौन से हैं व सफल निबन्ध की कसौटी क्या है? तत्पश्चात ही उच्च गुणवत्ता का निबन्ध लेखन किया जा सकता है।

rummy gold

निबंध क्या है?

हिंदी के प्रमुख साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निबन्ध को परिभाषित करते हुए कहा है-

निबन्ध लेखक अपने मन की प्रवृत्ति के अनुसार स्वच्छंद गति से इधर-उधर फूटी हुई सूत्र शाखाओं पर विचरता चलता है।

उपरोक्त परिभाषा से दो तथ्य तो स्पष्ट हो जाते हैं कि निबन्ध लेखक के मन की प्रवृत्ति के अनुरूप  ही होना चाहिए और निबन्ध का लेखन स्वच्छन्द गति पर आधारित हो अर्थात निबन्ध लेखक के व्यक्तित्त्व को, उसके मानसिक चिन्तन को शत-प्रतिशत उजागर करता हो। यानी निबंध ऐसा लिखना चाहिए कि लेखक का चिंतन, वैचारिक स्तर, विषय पर उसकी स्वयं की विचारधारा स्पष्ट हो जानी चाहिए।

यानि हम कह सकते हैं कि-

holy rummy

निबंध, लेखक के व्यक्तित्व को प्रकाशित करने वाली ललित गद्य-रचना है।

इसके अतिरिक्त लेखक को नदी की धारा सम स्वच्छन्दता से बहना चाहिए, किसी अन्य के मत से प्रभावित हुए बिना। लेखक का व्यक्तिगत परिचय या स्वार्थ विषय-वस्तु को प्रभावित न करे- यह अत्यन्त आवश्यक है। ज़रूरी नहीं कि आप जो भी लिखें वो सभी को स्वीकार्य हो, ज़रूरी ये है कि आप निष्पक्ष हो कर लिखें क्योंकि निष्पक्षता ही किसी निबंध की प्रथम और अंतिम कसौटी है।

कुछ अन्य बातों की ओर भी निबन्ध लेखक का ध्यान हो, जैसे-

  • पाठक को निबन्ध पढ़ते हुए सहभागिता का अनुभव हो
  • लेखक के विचार पाठक को सरलता से समझ आने चाहियें
  • जहाँ तक संभव हो लेखक के अनुभव पाठक को आप-बीते अनुभव हों

वस्तुतः किसी भी निबन्ध की सफलता इसी तथ्य पर निर्भर करती है कि पाठक उससे कितनी आत्मीयता अनुभव करते हैं।

निबन्ध कैसे लिखें?

मूलतः हमारा विषय यह था कि “ निबन्ध कैसे लिखें “। एक आप-बीती बताती हूँ -शिक्षण जगत में प्रवेश किया ही था कि एक निराश कर देने वाला अनुभव हुआ। परीक्षा के पश्चात एक विद्यार्थी से परीक्षा संबंधित वार्तालाप करते हुए कहा,” निबन्ध छोड़ आया क्योंकि याद किया हुआ नहीं आया।” मैं अचंभित होते हुए उससे पूछ बैठी,” निबन्ध को भी याद करना होता है क्या?” उसने कोई उत्तर नही दिया।

काफी विचार-मंथन के पश्चात मुझे सम्पूर्ण शिक्षण-प्रक्रिया में यह खामी नज़र आयी कि हम शायद यह समझ ही नहीं पाए थे कि पाठ्यक्रम में निबन्ध-लेखन क्यों जोड़ा गया है। कक्षा में छात्रों का वाद-विवाद होने पर प्रायः यह कहा करती थी कि अगर अपने विचारों को स्पष्ट नहीं कर पा रहे और विवाद का हल हिंसा में खोजते हो तो सारी शिक्षण – व्यवस्था ही  असफल है।विचारों को उचित तरीके से स्पष्ट कर पाने की कला को सीखना  ही निबन्ध-लेखन का मूल मंतव्य है।

मित्रों, निबंध कैसे लिखें  समझने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि-

पाठ्यक्रम में निबन्ध – लेखन को क्यों समाहित किया गया :

1.  विद्यार्थी अपने विचारों को एकत्र करना सीख पाए। 2. विचारों को संतुलित तरीके से व्यक्त कर पाएं। 3. भाषा को उपयुक्त रूप से प्रयोग करना सीख पाएं। 4. किसी भी विषय पर छात्रों के स्वयं के विचार हों। 5. उनका वैचारिक स्तर निश्चित हो सके। 6. संवेदनात्मक व वैचारिक स्तर पर परिपक्व हो सके। 7. वे अपने विचारों को सकारात्मक दिशा दे पाए। 8.  अपने विचारों को दृढ़ता से रखना सीख सके। 9. आलोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित हो सके। 10.रटन्तू तोता न बन विचारशील प्राणी बन सके।

अब प्रश्न यह उठता है कि निबन्ध किस प्रकार लिखे जाने चाहियें।

निबन्ध लिखते हुए छात्रों को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए-

1) निबंध के विषय पर अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करें, इसके लिए आप इन्टरनेट और पुस्कालयों की मदद ले सकते हैं। आप अपने शिक्षक से भी विषय सम्बंधित किताबों या लेखों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। यदि आप किसी परिभाषा या वक्तव्य को प्रयोग करना चाहते हैं तो उसे लिख लें और उसका स्रोत भी नोट कर लें। विशेषकर आपकी सोच को बल देती महापुरुषों की उक्तियाँ अवश्य लिख  कर याद कर लें।

ध्यान रहे कि अध्यन करने के पीछे का उद्देश्य चीजों को रटना नहीं बल्कि अपने ज्ञान को बढ़ाना और अपनी एक सोच विकसित करना है।

2) पहले से लिखे उत्कृष्ट निबंधों का अध्यन करें। ऐसा करते हुए आपको एक अच्छे निबन्ध के प्रारूप को समझना है। यहाँ यह भी ज़रूरी नहीं कि आप उसी विषय पर निबंध पढ़ें जिसपर आपको खुद लिखना है, आप किसी भी विषय पर लिखा अच्छा निबंध पढ़कर अपना लेखन सुधार सकते हैं।

3) अपने विषय को लेकर आपने जो विचार बनाए हैं उसकी अपने मित्रों या परिवारजनों से चर्चा करें। चर्चा से निकले प्रमुख बिन्दुओं को नोट कर लें और सही हो तो उनका निबंध में प्रयोग करें।

4) निबन्ध लिखने से पहले उसकी एक रूपरेखा बना लें: आरम्भ, मध्य व अंत मे क्या-क्या लिखना है सोच लें और किसी अन्य पेज पर बुलेट पॉइंट्स में लिख लें।

5) निबंध की भाषा सरल व स्पष्ट हो।

6) लेखन शुद्ध , त्रुटि रहित हो।

7) रटा-रटाया न होकर मौलिक विषय-वस्तु हो।

8) अपने अनुभवों पर आधारित हो।

9) हर तथ्य क्रम में हो मसलन समस्या का अर्थ, कारण, दूर करने के उपाय ओर अंत मे उपसंहार-सभी बातें उचित क्रम में हों।

10) अनावश्यक विस्तार से बचें।

11) तथ्यों की पुनरावृत्ति न करें .

12) शीर्षक व उपशीर्षक को रेखांकित करें।

13) विषय से संबंधित किसी प्रसिद्ध कवि या महा-पुरुष की कोई उक्ति स्मृति में हो तो उसे अवश्य लिखें।

14) अंत मे दोबारा पढ़ कर उसमें आवश्यक सुधार करें और वर्तनी पर विशेष ध्यान दें।

इन तथ्यों को ध्यान में रखकर विद्यार्थी निबन्ध-लेखन में शत-प्रतिशत अंक ला सकता है। निबन्ध- लेखन सागर के समान गहरा अवश्य है पर उसमे उतरेंगे तो सफलता रूपी मोती अवश्य ही पाएंगे।

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लेखिका हिंदी प्रवक्ता

निबंध लेखन की कला सिखाते इस लेख के लिए हम  नीरू ‘शिवम’ जी के आभारी हैं। धन्यवाद!

AchhiKhabar.Com पर प्रकाशित निबंधों की सूची यहाँ देखें 

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November 27, 2022 at 8:30 pm

Didi thank you so much ?

August 3, 2021 at 4:51 pm

दीदी आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपके लेख को पढ़कर काफी प्रेरणा मिली कल मेरा शिक्षाशास्त्र परास्नातक द्वितीय वर्ष पंचम प्रश्नपत्र है आशीर्वाद दीजिएगा

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November 14, 2018 at 11:50 pm

Kya nibandh mE subject related diagram (chitra) banaya ja sakta h

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November 15, 2018 at 8:49 am

नहीं. लेकिन आप इन्फोग्रफिक या टेबल जैसा कुछ बना सकते हैं जिसमे निबंध से सम्बंधित बातें शोर्ट में बतायी गयी हों.

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March 8, 2018 at 10:36 pm

Aapne jo bhi baatein kahin hai wo hum jarur dhayan me rakhenge and thanks for your tips ma’am.

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February 25, 2018 at 12:00 am

Thanks for the tips ma’am…but I request to you ki hum log 3rd class k bacchho ko nibandh dikhana kaise sikhaye samay ki kami k Karan unless pass school books k bad time nahi hota…. please help

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December 28, 2017 at 7:49 pm

Very very thankful sir….

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May 18, 2017 at 10:06 pm

बहुत बढ़िया आर्टिकल स्टूडेंट के लिए बहुत ही फायदेमंद, निबंध से परीक्षा में अच्छे मार्क्स पाने का अवसर होता हैं.

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May 11, 2017 at 3:10 pm

Thanks for this Post sir….

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May 10, 2017 at 6:29 pm

Nice article… Sahi kaha aapne apne vicharon ko sahi tarah se spasht karne ki kala ko sikhna hi nibandh hai. Is article se sabhi students ko nibandh likhne me zarur laabh milega.

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May 10, 2017 at 2:46 am

परीक्षा में अच्छे अंक पाने में निबंध का अहम योगदान होता है और इसके लिए सभी students मेहनत भी करते है लेकिन फिर भी सबका रिजल्ट भिन्न होता है । नीरू जी आपके द्वारा बताएं गए टिप्स से यकीनन Students को बहुत मदद मिलेगी ।

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Ai कंटेंट राइटर का उपयोग क्यों करें.

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टेक्स्ट जेनरेटर क्या है?

एक टेक्स्ट जेनरेटर एक ऑनलाइन टूल है जो एआई और जटिल एल्गोरिदम का उपयोग करता है ताकि वर्णों के शीघ्र ही जोड़े गए बीज से टेक्स्ट उत्पन्न किया जा सके। टेक्स्ट जनरेशन टूल टेक्स्ट के सभी प्रमुख बिंदुओं को विस्तारित संस्करण में ले जाता है। आपको प्राप्त होने वाली सामग्री में आपके द्वारा जोड़े गए प्रारंभिक पाठ का पूर्ण विस्तार होता है।

आपको टेक्स्ट जेनरेटर का उपयोग क्यों करना चाहिए?

लेखन हर किसी के लिए स्वाभाविक नहीं है, जिसका अर्थ है कि कुछ लोग दूसरों की तुलना में अधिक संघर्ष करते हैं। पाठ उत्पन्न करना यह सुनिश्चित करने के लिए एक सरल कदम प्रदान करता है कि आप यथासंभव कम प्रयास के साथ कुछ बना सकते हैं। आकर्षक रचनाएँ बनाने के लिए आपको एक पेशेवर लेखक होने की आवश्यकता नहीं है। विचारों की जांच के लिए आपको इंटरनेट, अपने दिमाग, दोस्तों और ऑनलाइन संसाधनों को स्कैन करने की आवश्यकता नहीं है। हमारा टेक्स्ट जनरेशन टूल उस समय लेने वाले प्रयास को लेता है और इसे एक ही टेक्स्ट पर रखता है। कुछ ही क्लिक के साथ, आपका टेक्स्ट तैयार हो जाएगा और उपयोग या सुधार के लिए तैयार हो जाएगा, इस प्रकार आपका समय, ऊर्जा और तनाव की बचत होगी। टेक्स्ट जेनरेटर टूल का उपयोग करने से आपको सीखने और अपनी कल्पना को बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

टेक्स्ट जेनरेटर कौन सी सामग्री लिख सकता है?

हमारा टेक्स्ट जनरेटर सभी प्रकार के टेक्स्ट को कई भाषाओं में लिख सकता है, आप इसका उपयोग ब्लॉग, लेख, किताबें, निबंध लिखने के लिए कर सकते हैं, नीचे एक अधिक गहन सूची है जिसे आप लिखने के लिए लेखक का उपयोग कर सकते हैं। इसे प्रेरणा के एक बड़े स्रोत के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेखक के ब्लॉक को हटाकर, नए विचारों और अप्रत्याशित परिणामों को उत्पन्न करना।

Smodin लेखक प्रशंसापत्र

यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लेखक मेरे लिए क्या लिख ​​सकता है.

साहित्यिक चोरी-मुक्त होमवर्क निबंधों से लेकर आपके ब्लॉग के लिए उच्च-गुणवत्ता, अद्वितीय लेखों तक, स्मोडिन का एआई राइटर आपको सम्मोहक, परिवर्तित पाठ उत्पन्न करने में मदद कर सकता है जो या तो वर्णनात्मक या तर्कपूर्ण है, जो आपसे कुछ ही संकेतों के साथ है। विज्ञापनों, उत्पाद विवरण, सोशल मीडिया सामग्री, और कुछ ही मिनटों में और कुछ ही क्लिक में मार्केटिंग कॉपी तैयार करें।

लिखना निबंध

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लिखना वेबसाइटें

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लिखना दस्तावेज़

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लिखना तकनीकी दस्तावेज

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लिखना वेब पृष्ठ

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लिखना पत्रों

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लिखना पैराग्राफ

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लिखना पांडुलिपियों

लिखना चीज़ें

लिखना अनुसंधान

लिखना नियमावली

लिखना उपन्यास

लिखना प्रकाशनों

लिखना पाठ्यपुस्तकें

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लिखना होम वर्क

सामान्यतःपूछे जाने वाले प्रश्न

एआई के साथ मैं किस तरह के निबंध और लेख लिख सकता हूं.

जब तक आप हमें सही संकेत और पर्याप्त संदर्भ प्रदान करते हैं, तब तक हमारा AI लेखक लगभग किसी भी विषय पर लंबा पाठ उत्पन्न कर सकता है। आप निबंध लिख सकते हैं जो किसी भी शैक्षिक स्तर के लिए विषयों की एक श्रृंखला, किसी भी जगह में लेख, और यहां तक ​​​​कि फेसबुक विज्ञापनों, Google विज्ञापनों, अमेज़ॅन उत्पाद विवरण, लिंक्डइन पोस्ट आदि के लिए मार्केटिंग सामग्री तक फैले हुए हैं।

इस एआई राइटर का उपयोग करने के लिए मुझे कौन सी तकनीक सीखनी चाहिए?

इस उपकरण का उपयोग करने के लिए किसी सॉफ्टवेयर या प्रोग्रामिंग कौशल की आवश्यकता नहीं है। हमारे एआई राइटर टूल में एक उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस है जहां आप कुछ सरल चरणों में टेक्स्ट जेनरेट कर सकते हैं। बस अपने विषय के बारे में आवश्यक जानकारी भरें और हम बाकी काम करेंगे।

क्या निबंध और लेख अद्वितीय और साहित्यिक चोरी से मुक्त होते हैं?

जब तक आप हमें सही संकेत प्रदान करते हैं, हमारा एआई राइटर हर बार अद्वितीय और साहित्यिक चोरी-मुक्त सामग्री तैयार कर सकता है। निबंध 100% उत्पन्न सामग्री हैं, जबकि लेख वेब से सामग्री से निकाले गए हैं और उनमें साहित्यिक चोरी की सामग्री हो सकती है। हालाँकि सभी निबंधों और सभी पुनर्लिखित लेखों के कॉपीस्केप या टर्नइटइन में उत्तीर्ण होने की उम्मीद है, आपको पुष्टि करने के लिए हमारे साहित्यिक चोरी चेकर का उपयोग करना चाहिए।

क्या मुझे एआई द्वारा तैयार किए गए निबंधों या लेखों को संपादित करने की आवश्यकता है?

हमारे एआई राइटर द्वारा उत्पन्न लेखन एक तैयार उत्पाद हो सकता है, या संपादन की आवश्यकता हो सकती है। एआई राइटर का उपयोग करते समय, अधूरी सामग्री उत्पन्न होने की संभावना होती है। हम जेनरेट किए गए टेक्स्ट को आपकी इच्छानुसार संपादित करने और परिवर्तन करने के लिए एक संपादक और एक उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफ़ेस प्रदान करते हैं।

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स्मोडिन का एआई राइटर वर्तमान में उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है। हम जल्द ही अतिरिक्त भुगतान विकल्प जोड़ेंगे।

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भ्रष्टाचार पर निबंध

भ्रष्टाचार पर निबंध ( bhrashtachar par nibandh ) hindi essay on corruption..

भ्रष्टाचार यानी भ्रष्ट आचरण। गलत तरीको को अपनाकर जो व्यक्ति अनैतिक कार्यो में संलग्न हो जाता है, उसे भ्र्ष्टाचारी कहते है। आज पूरे भारत के व्यवस्था प्रणाली में भ्रष्टाचार ने अपनी जगह बना ली है। लोग सत्य के मार्ग पर तरक्की पाने के जगह भ्रष्ट नीतियों को अपनाते है। उदाहरण के तौर पर किसी को दफ्तर में प्रमोशन चाहिए, या नौकरी चाहिए तो वह रिश्वत देकर अपना काम करवाते है। यह न्याय व्यवस्था के खिलाफ है। आजकल की विडंबना यह है कि अगर ऐसे लोग रिश्वत लेने या देने के जुर्म में पकड़े भी जाते है, तो रिश्वत देकर छूट भी जाते है। कई दुकानदार और व्यापारी सस्ते वस्तुओं को अधिक दामों में बेचकर मुनाफा कमाते है।

आजकल लोगो को यह महसूस होता है, कि अगर वह सही रास्ता अपनाएंगे , तो उनका काम होने में सालों लग जाएंगे। आजकल की व्यस्त जिन्दगी में सबको जल्दी सफलता चाहिए और उसे पाने के लिए लोग रिश्वतखोरी या किसी को झूठे आरापों में फंसाना जैसे कार्य करते है। बड़े-बड़े व्यापारी अनाज को आपातकालीन स्थिति में जमा कर लेते है। फिर उसे बाजार में दो गुने और तिगुने दामों में बेचते है। इससे साधारण लोगो को तकलीफो का सामना करना पड़ता है।

भ्रष्टाचार एक संक्रामक बीमारी की तरह है जो अपनी जड़े मज़बूत कर रहा है। दिन प्रतिदिन भ्रष्टाचार से संबंधित घटनाएं बढ़ रहे है।  ज़्यादातर लोग बेईमानी और चोरी का रास्ता अपना रहे है। कोर्ट में झूठे गवाह पेश करके अपराधी छूट जाता है। लोग अपने प्रतिद्वंदी से बदला लेने के लिए झूठा मुकदमा करते है। लोग आजकल पैसे लेकर गलत मूलयांकन कार्ड छात्रों को पास करने के लिए बनाते है। लोगो को ब्लैकमेल करके और अवैध मांग करके उनसे जबरन अनैतिक काम करवाए जाते है।

हमारी देश की राजनितिक प्रणाली भ्रष्टाचार में लिप्त है। ज़्यादातर राजनितिक अशिक्षित है। जाहिर है अगर देश और राज्य की बागडोर अशिक्षित लोगो के हाथों में आयी, तो देश की उन्नति एक सपना मात्रा रह जाएगा। ऐसे भ्रष्ट राजनीतिज्ञ पैसा देकर लोगो से वोट करवाते है। लोगो को झूठे वादे करके अपने पक्ष में वोट डलवाते है। जैसे ही वह चुनाव जीत जाते है, भ्रष्ट राजनेता अपना असली रंग दिखा देते है।

हमारे देश में बढ़ते भ्रष्टाचार के कई कारण है। कभी कभी पैसे के अभाव में लोग भ्रष्टाचार के पथ पर चलने के लिए विवश हो जाते है। लोग ईर्ष्या और जलन में अंधे होकर भ्रष्टाचार की नीति को अपनाते है। सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे। भारत का ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है, जो भ्रष्टाचार से प्रभावित ना हो। भ्रष्टाचार हमारे देश में आम बात है। भ्रष्टाचार समाज में एक घाव की तरह है, जो प्रत्येक क्षेत्र में अपना अनैतिक जहर भर रहा है। सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी आम जनता के किसी भी कार्य को करने के लिए रिश्वत मांगते है, यह सरासर गलत है।

पैसा इस दुनिया का महत्वपूर्ण चीज़ है। लेकिन पैसो के लोभ में मनुष्य लालची, स्वार्थी और भ्रष्टाचारी बन गया है। भ्रष्टाचार ने मनुष्य के अंदर की मानवीयता को समाप्त कर दिया है। उनके सोचने समझने की शक्ति समाप्त हो चुकी है। धन की आवश्यकता सभी को है, इसका मतलब यह नहीं मनुष्य अपने नैतिक मूल्यों को बेच खाये। कई क्षेत्रों में लोग अपने पद की ताकत का गलत इस्तेमाल करके, अपने परिवार के सदस्यों को मौका देते है। इससे उचित लोगो को अच्छा काम नहीं मिलता है। कुछ लोग अपने आय का गलत विवरण देते है और टैक्स की चोरी करते है। यह अपराध की श्रेणी में आता है।

क्रिकेट में आईपीएल खिलाड़ियों पर मैच फिक्सिंग के आरोप लग चुके है। बड़े बड़े पदों को पाने के लिए लोगो द्वारा अनैतिक तरीको से सिस्टम को खुश किया जाता है। भ्रष्टाचार एक संक्रामक रोग की तरह है, जो सभी क्षेत्रों में फैल रहा है। अच्छे और ईमानदार लोगो को मौका नहीं मिलेगा, अगर भ्रष्टाचार ऐसे ही बना रहा। भ्रष्टाचार समाज को लीच की भाँती खा रहा है। हमारे सरकार को ज़रूरत है कि ऐसे भ्र्ष्टाचारियों को कड़ी से कड़ी सजा दे और उनपर कानूनी मुकदमा चलाएं। देश को सच्चे, भले, शिक्षित और ईमानदार लोगो की ज़रूरत है जो देश का नेतृत्व कर सके। भ्रष्टाचार के दिन प्रतिदिन बढ़ने का प्रमुख कारण जनसंख्या वृद्धि और बेरोजगारी है। जब लोगो को रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे तब वह भूख मिटाने के लिए गलत चीज़ो को अपनाते है ।

आज़ादी के वक़्त कितने लोगो ने अपने देश के लिए बलिदान दिए। आज़ादी के बाद जितनी तरक्की देश को करनी चाहिए थी, देश उतना करने में असमर्थ रही है। कारण है देश के कई प्रशासन में भ्रष्टाचार का होना। केंद्र सरकारों, उद्योगों, व्यवसाय हर जगह भ्रष्टाचार छाया हुआ है। अत्यधिक पैसे के लालच ने भी लोगो को भ्रष्टाचार की तरफ धकेला है। लोग भोग विलासिता भरा जीवन बिना परिश्रम किये जीना चाहते है, इसलिए भ्रष्टाचार को अपनाते है। मनुष्य समाज में प्रतिष्ठा पाने के लिए भी गलत आचरण का सहारा ले रहे है।  भ्र्ष्टाचारी लोगो को कानून प्रणाली से कोई डर नहीं लगता है। लोगो में देशभक्ति जैसी भावना नहीं है, इसलिए ऐसे शर्मनाक अपराधों करने से उन्हें पछतावा नहीं होता है। लोग असंवेदनशील होते जा रहे है। उन्हें सिर्फ जीतना है, इसके लिए वह अनैतिक मार्ग को अपनाने के लिए भी तैयार है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ बना अधिनियम: भ्रष्टाचार से निपटने के लिए हमारे देश में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 बनाया गया है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति जो सरकारी सेवा करता हो, केंद्रीय, प्रांतीय, राज्य, या कोई भी न्यायाधीश या कोई भी व्यक्ति जो कृषि उद्योग, बैंक, रजिस्टर्ड सोसाइटी, कुलपति, आचार्य, शिक्षक, कर्मचारी, सभी को इस अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान है और इसकी सजा निर्धारण करने के लिए विशेष न्यायाधीश नियुक्त किए जाते हैं। ताकि भ्रष्टाचार जैसी बीमारी का हमारे देश से खात्मा हो जाए और इस अधिनियम से लोगों के मन में डर बना रहे हैं।

एक भ्रष्टाचार  मुक्त  समाज बनाने की कोशिश साफ़ तौर पर करनी होगी। आने वाली पीढ़ी इस भ्रष्टाचार के जाल में ना फंसे। भारत के कई सिस्टम में भ्रष्टाचार का कीड़ा घुसा हुआ है। इसे ख़त्म करने का समय आ गया है। स्वार्थी और लालची लोग सम्पूर्ण देश को भ्रष्टाचार जैसे कृत्यों से बदनाम कर रहे है। हमे एक जुट होकर इस पर अंकुश लगाना होगा और राष्ट्र को इस धोखेदारी से बचाना होगा। लोगो को लगता है अधर्म का मार्ग अपनाकर, वह कुछ भी हासिल कर सकते है। इस रवैये को बदलना बेहद आवश्यक है। इसके लिए कानून व्यवस्था को मज़बूत बनाने की ज़रूरत है।

लेखक: Rima Bose 29-sept-2020

#सम्बंधित:- Hindi Essay, हिंदी निबंध।

  • भ्र्ष्टाचार मुक्त समाज पर निबंध
  • शिक्षित बेरोजगारी पर निबंध
  • कमरतोड़ महंगाई पर निबंध
  • जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम  

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# भ्रष्टाचार पर निबंध 700-800 शब्दों में- Hindi Essay on Bhrashtachar

प्रस्तावना : भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है भ्रष्ट+आचरण। ऐसा कार्य जो अपने स्वार्थ सिद्धि की कामना के लिए समाज के नैतिक मूल्यों को ताक पर रख कर किया जाता है, भ्रष्टाचार कहलाता है। भ्रष्टाचार पूरे देश में महामारी की तरह फैल रहा है। यह दीमक की तरह पूरे देश को धीरे-धीरे ख़तम कर रहा है। आजकल लाखों करोड़ों का घोटाला होना तो जैसे एक आम बात हो गई है। जिस घोटालों से हम अपने-आप को बचने के लिए न्याय की उम्मीद करते हैं, वह न्याय व्यवस्था भी भ्रष्टाचार से अछूता नहीं रहा है। भ्रष्टाचार के लिए ज्यादातर हम देश के राजनेताओं को ज़िम्मेदार मानते हैं पर सच यह है कि देश का आम नागरिक भी भ्रष्टाचार के विभिन्न स्वरूप में भागीदार हैं। वर्तमान में कोई भी क्षेत्र भ्रष्टाचार से अछूता नहीं है।

आज भारत में भ्रष्टाचार हर क्षेत्र में बढ़ रहा है, कालाबाजारी जानबूझकर चीजों के दाम बढ़ना, अपने स्वार्थ के लिए चिकित्सा जैसे-क्षेत्र में भी जानबूझकर गलत ऑपरेशन करके पैसे ऐठना, हर काम पैसे लेकर करना, किसी भी समान को सस्ता में लाकर महंगे में बेचना, चुनाव धांधली, घुस लेना, टैक्स चोरी करना, ब्लैकमेल करना, परीक्षा में नकल, परीक्षार्थी का गलत मूल्यांकन करना, हफ्ता वसूली, न्यायाधीशों द्वारा पक्षपात पूर्ण निर्णय, वोट के लिए पैसे और शराब बांटना, उच्च पद के लिए भाई-भतीजावाद, पैसे लेकर रिपोर्ट छापना, यह सब भ्रष्टाचार है। और यह दिन-ब-दिन भारत के अलावा अन्य देशों में भी बढ़ रहा है और ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जो भ्र्ष्टाचार से नहीं बचा।

“भारत” भ्रष्टाचार मूर्त और अमूर्त दोनों ही रूपों में नजर आता है। यहां भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी अधिक गहरी हैं कि शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र बचा हो, जो इससे बचा रहा है। राजनीति तो भ्रष्टाचार का पर्याय बन गयी है। घोटालों पर घोटाले, दलबदल, सांसदों की खरीद-फरोख्त, विदेशों में नेताओं के खाते, अपराधीकरण-ये सभी भ्रष्ट राजनीति के सशक्त उदाहरण हैं। चुनाव जीतने से लेकर मन्त्री पद हथियाने तक घोर राजनीतिक भ्रष्टाचार दिखाई पड़ता है। ठेकेदार, इंजीनियर निर्माण कार्यो में लाखों-करोड़ों का हेर-फेर कर जाते हैं ।

शिक्षा विभाग भी भ्रष्टाचार का केन्द्र बनता जा रहा है। एडमिशन से लेकर समस्त प्रकार की शिक्षा प्रक्रिया तथा नौकरी पाने तक, ट्रांसफर से लेकर प्रमोशन तक परले दरजे का भ्रष्टाचार मिलता है। चिकित्सा विभाग भी भ्रष्टाचार में कुछ कम नहीं है। बैंकों से लोन लेना हो, पटवारी से जमीन की नाप-जोख करवानी हो, किसी भी प्रकार का प्रमाण-पत्र इत्यादि बनवाना हो, तो रिश्वत दिये बिना तो काम नहीं। हम कही भी जाये हमें भ्रष्टाचार हर कोने पर मिल ही जायेंगे। जैसे जैसे हम बड़े होंगे वैसे वैसे हमें भ्रष्टाचार के बहुत से प्रकार देखने को मिलेंगे।

विगत वर्षों में देश में हुए कुछ घोटाले जिन्हें हम भ्रष्टाचार की संज्ञा देंगे:

  • कोयला घोटाला- 12 करोड रुपए लगभग।
  • यूरिया घोटाला -133 करोड रुपए लगभग
  • शेयर बाजार- 4000 करो रुपए लगभग।
  • चारा घोटाला – 950 करो रुपए लगभग
  • अनाज घोटाला – 2 लाख करोड रुपए लगभग।

और भी अन्य बड़े घोटाले हैं सोचिये जहां गरीब व्यक्ति को एक वक्त का खाना खाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है वही अरबों खरबों के घोटाले हमारे इस विकासशील देश बड़ी आसानी से कर रहे हैं। अगर यह पैसे इन घोटालों की वजह, देश में लगाया जाए तो हमारे देश में एक भी व्यक्ति गरीबी की श्रेणी में नहीं आएगा।

भ्रष्टाचार के कारण:

  • मनुष्य का आचरण(स्वभाव
  • जल्दी बड़ने की चाह
  • आर्थिक परिस्थिती
  • महत्वकांक्षा
  • दबाव वश भ्रष्टाचार
  • कठोर कानून का ना होना

भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय :

  • लोकपाल कानून लागू करने के लिए आवश्यक है।
  • हर क्षेत्र में कार्य से पहले व्यक्ति को शपथ दिलाई जाए ताकि वह इस शपथ को हमेशा याद रखें।
  • संक्षिप्त और कारगर कानून हो।
  • प्रशासनिक मामलों में जनता को भी शामिल किया जाए
  • प्रशासनिक कार्य के लिए लोकपाल स्वतंत्र रूप से कार्य करें
  • सही समय पर सही वेतन बढ़ाया जाए
  • सरकारी कार्यालय में जरूरत के हिसाब से कर्मचारी हो कम ना हो
  • भ्रष्टाचार का विरोध भी इसे रोकने में काफी कारगर सिद्ध होगा है।

उपसंहार : भ्रष्टाचार हमारे नैतिक जीवन में बहुत अधिक प्रभाव डाल रहा है। इसके लिए इंसान, जब वो बच्चा होता है तभी से ही नैतिकता का आचरण का पाठ पढ़ना जरुरी है, शिक्षा में भी नैतिकता का पाठ भी जरूरी है ताकि वह किसी भी गलत कार्य में शामिल ना हो और ना ही कोई गलत कार्य करें शिक्षा ही सबसे महत्वपूर्ण साधन है, भ्रष्टाचार को रोकने में उसके साथ ही एक कड़े कानून का होना भी आवश्यक है। इस भ्रष्टाचार की बीमारी को जड़ से ही खत्म करे जिससे भ्रष्टाचार से मुक्त भारत का सपना साकार हो सके।

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Essay on Hindi Language in English (हिंदी भाषा पर निबंध)

Essay on hindi .

Let’s start the essay on hindi…

Outline of the essay

  • Our national language- Hindi
  • Hindi, our mother-tongue 
  • Conclusion of the essay 

essay on hindi

Our national language 

Hindi is our mother-tongue, our national language. It is the language that most of the north Indians relate to. The majority of the north Indians speak Hindi. There are other vernacular and regional languages too, like Marathi, Kannada, Malayalam, etc. Well, Hindi is the language we use in ou daily lives, Hindi is certainly the home language of we Indians. Hindi is a very beautiful language, its very aesthetic in its tone. Though we use English as an associate language, as in the other people from the other regions who don’t understand Hindi, they use English as a language too. They converse in English to convey their ideas to the people who majorly know Hindi or English. 

Hindi is our national language, it was adopted by the constituent assembly after independence in 1947. Our language though is Hindustani, a mixture of Hindi and Urdu. 

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Hindi- Our mother tongue 

Now, though learning Hindi comes across less fashionable, people are getting more fascinated by foreign languages and forgetting the essence of Hindi. The emphasis on English is widely growing and that’s causing a major threat to the importance and the significance of Hindi. Hindi has become an alien language in its territory. 

Hindi is the language that keeps us connected to our roots. Yes, English is indeed a global language, it gives you a way to reach out to the diverse domains and spheres, but one should not forget the importance and the identity of Indians that is very much inherently rooted in the language- Hindi 

Conclusion of the essay

Hindi is comparatively a complex language, people far across from the world come to India and invest their time and lives in learning our language- Hindi. Considering that we should not forget that we should emphasize our learning in Hindi as equally as we do in English. 

Hope you loved this article. Your love and support is my motivation. Thank you so much. – Aditya sir

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2 thoughts on “Essay on Hindi Language in English (हिंदी भाषा पर निबंध)”

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Very nice essay. Thanks for sharing

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For example, typing "Aap Kasai hai?" becomes "आप कैसे हैं?" .
  • Use the backspace key or click on any words to get more choices of words on a dropdown menu.
  • Press (Ctrl + G) together to toggle (switch) between English and Hindi language.
  • Any text you type on the above text area is automatically saved on your computer for a week. This is useful in the event of a crash or sudden shutdown of your computer.
  • Easily copy or download Hindi text on your computer or mobile devices.
  • You can insert special characters (e.g. ।, ॐ, ॥, ॰) and many other Hindi characters by clicking on the help button - which is located just below the bottom right corner of the typing text area.
  • You can also send email in Hindi to your friends and family for FREE.
  • Finally, if you like to support us then please donate or buy us a coffee at ko-fi.com .

Hindi got its name from the Persian word Hind, which means ”land of the Indus River”. It is spoken by more than 528 million people as a first language and around 163 million use it as a second language in India, Bangladesh, Mauritius and other parts of South Asia.

Hindi is written with the Devanagari alphabet , developed from the Brahmi script in the 11th century AD. It contains 36 consonants and 12 vowels . In addition, it has its own representations of numbers that follow the Hindu-Arabic numeral system.

  • 14 Independent Vowels (१३ स्वर):  अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः, ऋ, ॠ
  • 36 Consonants (३६ व्यंजन):  क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह
  • 3 Joint Words (संयुक्त अक्षर):  क्ष, त्र, ज्ञ
  • Full Stop (पूर्ण विराम):  ।
  • Numbers in Hindi (हिंदी में नंबर) :  १, २, ३, ४, ५, ६, ७, ८, ९, ०, .

To give you an example, if you type in "Swagatam" it will be converted to "स्वागतम्" .

Additionally, you will get a list of matching words on the dropdown menu when you press backspace or click on the word.

Our Hindi transliteration also supports fuzzy phonetic mapping. This means you just type in the best guess of pronunciation in Latin letters and our tool will convert it into a closely matching Hindi word.

Hindi transliteration is a process of phonetically converting similar-sounding characters and words from English to Hindi. For Example, you can type in " Aap kaise hain? " in Latin to get " आप कैसे हैं? ".

You can use our online Hindi input tool to transliterate unlimited Hindi words for FREE. Our online software is supported on both desktop and mobile devices such as Apple iPhone , Xiaomi Redmi Note , Samsung and more.

Hindi translation is a process of converting word or sentence from one language to Hindi and vice versa. For instance, typing " Hindi is spoken by 366 million people across the world. " in English will be translated into " दुनिया भर में ३६६ मिलियन लोगों द्वारा हिंदी बोली जाती है। ".

Our site uses machine translation powered by Google. You can use our online software to translate English to Hindi , Hindi to English , Hindi to Marathi , Hindi to Malayalam and many other languages for FREE.

Additionally, you can seek help from a professional translator for accurate translation. Use this link to order a professional translation by a human translator.

Hindi Unicode is a set of unique numeric values that is assigned to display Hindi characters , letters, digits and symbols. You can view the complete set of Hindi Unicode Character Code charts by visiting The Unicode Consortium .

Hindi Keyboard Layout with Kurti Dev font mapping.

Fig 1. Hindi Keyboard Layout for Kurti Dev and Delvys Font

Kurti Dev Font Keyboard Layout with Dark Background Theme

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Moana 2 (2024)

After receiving an unexpected call from her wayfinding ancestors, Moana journeys to the far seas of Oceania and into dangerous, long-lost waters for an adventure unlike anything she has ever... Read all After receiving an unexpected call from her wayfinding ancestors, Moana journeys to the far seas of Oceania and into dangerous, long-lost waters for an adventure unlike anything she has ever faced. After receiving an unexpected call from her wayfinding ancestors, Moana journeys to the far seas of Oceania and into dangerous, long-lost waters for an adventure unlike anything she has ever faced.

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Dwayne Johnson and Auli'i Cravalho in Moana 2 (2024)

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AI may be to blame for our failure to make contact with alien civilisations

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Sir Bernard Lovell chair of Astrophysics and Director of Jodrell Bank Centre for Astrophysics, University of Manchester

Disclosure statement

Michael Garrett does not work for, consult, own shares in or receive funding from any company or organisation that would benefit from this article, and has disclosed no relevant affiliations beyond their academic appointment.

University of Manchester provides funding as a member of The Conversation UK.

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Artificial intelligence (AI) has progressed at an astounding pace over the last few years. Some scientists are now looking towards the development of artificial superintelligence (ASI) — a form of AI that would not only surpass human intelligence but would not be bound by the learning speeds of humans.

But what if this milestone isn’t just a remarkable achievement? What if it also represents a formidable bottleneck in the development of all civilisations, one so challenging that it thwarts their long-term survival?

This idea is at the heart of a research paper I recently published in Acta Astronautica. Could AI be the universe’s “great filter” – a threshold so hard to overcome that it prevents most life from evolving into space-faring civilisations?

This is a concept that might explain why the search for extraterrestrial intelligence (Seti) has yet to detect the signatures of advanced technical civilisations elsewhere in the galaxy.

The great filter hypothesis is ultimately a proposed solution to the Fermi Paradox . This questions why, in a universe vast and ancient enough to host billions of potentially habitable planets, we have not detected any signs of alien civilisations. The hypothesis suggests there are insurmountable hurdles in the evolutionary timeline of civilisations that prevent them from developing into space-faring entities.

I believe the emergence of ASI could be such a filter. AI’s rapid advancement, potentially leading to ASI, may intersect with a critical phase in a civilisation’s development – the transition from a single-planet species to a multiplanetary one.

This is where many civilisations could falter, with AI making much more rapid progress than our ability either to control it or sustainably explore and populate our Solar System.

The challenge with AI, and specifically ASI, lies in its autonomous, self-amplifying and improving nature. It possesses the potential to enhance its own capabilities at a speed that outpaces our own evolutionary timelines without AI.

The potential for something to go badly wrong is enormous, leading to the downfall of both biological and AI civilisations before they ever get the chance to become multiplanetary. For example, if nations increasingly rely on and cede power to autonomous AI systems that compete against each other, military capabilities could be used to kill and destroy on an unprecedented scale. This could potentially lead to the destruction of our entire civilisation, including the AI systems themselves.

In this scenario, I estimate the typical longevity of a technological civilisation might be less than 100 years. That’s roughly the time between being able to receive and broadcast signals between the stars (1960), and the estimated emergence of ASI (2040) on Earth. This is alarmingly short when set against the cosmic timescale of billions of years.

Image of the star-studded cluster NGC 6440.

This estimate, when plugged into optimistic versions of the Drake equation – which attempts to estimate the number of active, communicative extraterrestrial civilisations in the Milky Way – suggests that, at any given time, there are only a handful of intelligent civilisations out there. Moreover, like us, their relatively modest technological activities could make them quite challenging to detect.

Wake-up call

This research is not simply a cautionary tale of potential doom. It serves as a wake-up call for humanity to establish robust regulatory frameworks to guide the development of AI, including military systems.

This is not just about preventing the malevolent use of AI on Earth; it’s also about ensuring the evolution of AI aligns with the long-term survival of our species. It suggests we need to put more resources into becoming a multiplanetary society as soon as possible – a goal that has lain dormant since the heady days of the Apollo project , but has lately been reignited by advances made by private companies.

As the historian Yuval Noah Harari noted , nothing in history has prepared us for the impact of introducing non-conscious, super-intelligent entities to our planet. Recently, the implications of autonomous AI decision-making have led to calls from prominent leaders in the field for a moratorium on the development of AI, until a responsible form of control and regulation can be introduced.

But even if every country agreed to abide by strict rules and regulation , rogue organisations will be difficult to rein in.

The integration of autonomous AI in military defence systems has to be an area of particular concern. There is already evidence that humans will voluntarily relinquish significant power to increasingly capable systems, because they can carry out useful tasks much more rapidly and effectively without human intervention. Governments are therefore reluctant to regulate in this area given the strategic advantages AI offers , as has been recently and devastatingly demonstrated in Gaza .

This means we already edge dangerously close to a precipice where autonomous weapons operate beyond ethical boundaries and sidestep international law. In such a world, surrendering power to AI systems in order to gain a tactical advantage could inadvertently set off a chain of rapidly escalating, highly destructive events. In the blink of an eye, the collective intelligence of our planet could be obliterated.

Humanity is at a crucial point in its technological trajectory. Our actions now could determine whether we become an enduring interstellar civilisation, or succumb to the challenges posed by our own creations.

Using Seti as a lens through which we can examine our future development adds a new dimension to the discussion on the future of AI. It is up to all of us to ensure that when we reach for the stars, we do so not as a cautionary tale for other civilisations, but as a beacon of hope – a species that learned to thrive alongside AI.

  • Artificial intelligence (AI)
  • Extraterrestrial life
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Case Management Specialist

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Lecturer / Senior Lecturer - Marketing

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Executive Dean, Faculty of Health

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Lecturer/Senior Lecturer, Earth System Science (School of Science)

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Every Day, Look Forward to a Really Good Sandwich

Whatever is going on right now, give yourself something to look forward to. it doesn’t have to be big..

This is One Thing , a column with tips on how to live.

My favorite question to ask strangers and dear friends alike is what they are looking forward to. “In life?” they might reply. “This year?”

“Yes,” I reply, “all of the above.” This life, this year, this week, today.

My personal favorite answers to hear are mundane, though—that someone is looking forward to seeing their dog or taking a walk on a beautiful day. Often I’m inspired anew to make these plans for myself too. When it comes to looking forward to things, long-term items are wonderful, but ideally, the horizon of looking-forward-to isn’t excruciatingly long. Five business days or fewer tends to be the sweet spot; otherwise you’re left panting until the next reprieve, whenever that is. We’re all looking forward to rare banner days, but who knows when they’ll strike?

The sci-fi soap opera Twin Peaks advises a version of this idea : “Every day, once a day, give yourself a present. Don’t plan it, don’t wait for it, just let it happen,” special agent Dale Cooper advises Sheriff Harry Truman in an episode. In this suggestion, pleasure hinges on a combination of serendipity and instant gratification. On the contrary, having something to look forward to causes you to derive joy entirely from planning and waiting. I say: Give yourself presents. But plan them.

Science shows us the benefits of looking forward. A 2018 study published in Frontiers in Psychology used functional magnetic resonance imaging to demonstrate a correlation between anticipation of good things and well-being. According to the authors, we evolved to anticipate. Making preparations for the future was, for our ancestors, linked with survival. But you can, the scientists note, use your made-to-anticipate brain to “look forward to” negative things. And that is just anxiety.

Another study, published in 2015 in the Journal of Experimental Social Psychology, found that looking forward to something as simple as a funny New Yorker cartoon boosted pleasant feelings before and after a stressful event. In fact, anticipating something good was as effective in aiding stress recovery as recently experiencing something good. In other words, looking forward to a treat can be, to some extent, as good as the treat itself.

Personally, when I need something to look forward to, my favorite thing to stick in my schedule is getting a really good sandwich. Usually a deli sandwich on quality bread that’s impractical to keep at home and fresh ingredients that had I combined them myself just wouldn’t taste as good.

But truly anything can be the sandwich. Grabbing coffee. Having tea and a cookie every night before bed. Sometimes, I’ll just go through what I already have planned and think about what good things I have coming up that I can focus on.

These things are small. Sure, it’s nice to look forward to a luxurious vacation, a graduation—something huge. But the most important part is not necessarily the thing itself but the act. The thing matters less than the fact that you’re simply looking forward .  

How would we even describe such a feeling? We know that anticipation of bad things is anxiety, but is there a word for anticipation of good things? Ah, yes: excitement .

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Guest Essay

It’s Time to End the Quiet Cruelty of Property Taxes

A black-and-white photograph of a beaten-up dollhouse sitting on rocky ground beneath an underpass.

By Andrew W. Kahrl

Dr. Kahrl is a professor of history and African American studies at the University of Virginia and the author of “The Black Tax: 150 Years of Theft, Exploitation, and Dispossession in America.”

Property taxes, the lifeblood of local governments and school districts, are among the most powerful and stealthy engines of racism and wealth inequality our nation has ever produced. And while the Biden administration has offered many solutions for making the tax code fairer, it has yet to effectively tackle a problem that has resulted not only in the extraordinary overtaxation of Black and Latino homeowners but also in the worsening of disparities between wealthy and poorer communities. Fixing these problems requires nothing short of a fundamental re-examination of how taxes are distributed.

In theory, the property tax would seem to be an eminently fair one: The higher the value of your property, the more you pay. The problem with this system is that the tax is administered by local officials who enjoy a remarkable degree of autonomy and that tax rates are typically based on the collective wealth of a given community. This results in wealthy communities enjoying lower effective tax rates while generating more tax revenues; at the same time, poorer ones are forced to tax property at higher effective rates while generating less in return. As such, property assessments have been manipulated throughout our nation’s history to ensure that valuable property is taxed the least relative to its worth and that the wealthiest places will always have more resources than poorer ones.

Black people have paid the heaviest cost. Since they began acquiring property after emancipation, African Americans have been overtaxed by local governments. By the early 1900s, an acre of Black-owned land was valued, for tax purposes, higher than an acre of white-owned land in most of Virginia’s counties, according to my calculations, despite being worth about half as much. And for all the taxes Black people paid, they got little to nothing in return. Where Black neighborhoods began, paved streets, sidewalks and water and sewer lines often ended. Black taxpayers helped to pay for the better-resourced schools white children attended. Even as white supremacists treated “colored” schools as another of the white man’s burdens, the truth was that throughout the Jim Crow era, Black taxpayers subsidized white education.

Freedom from these kleptocratic regimes drove millions of African Americans to move to Northern and Midwestern states in the Great Migration from 1915 to 1970, but they were unable to escape racist assessments, which encompassed both the undervaluation of their property for sales purposes and the overvaluation of their property for taxation purposes. During those years, the nation’s real estate industry made white-owned property in white neighborhoods worth more because it was white. Since local tax revenue was tied to local real estate markets, newly formed suburbs had a fiscal incentive to exclude Black people, and cities had even more reason to keep Black people confined to urban ghettos.

As the postwar metropolis became a patchwork of local governments, each with its own tax base, the fiscal rationale for segregation intensified. Cities were fiscally incentivized to cater to the interests of white homeowners and provide better services for white neighborhoods, especially as middle-class white people began streaming into the suburbs, taking their tax dollars with them.

One way to cater to wealthy and white homeowners’ interests is to intentionally conduct property assessments less often. The city of Boston did not conduct a citywide property reassessment between 1946 and 1977. Over that time, the values of properties in Black neighborhoods increased slowly when compared with the values in white neighborhoods or even fell, which led to property owners’ paying relatively more in taxes than their homes were worth. At the same time, owners of properties in white neighborhoods got an increasingly good tax deal as their neighborhoods increased in value.

As was the case in other American cities, Boston’s decision most likely derived from the fear that any updates would hasten the exodus of white homeowners and businesses to the suburbs. By the 1960s, assessments on residential properties in Boston’s poor neighborhoods were up to one and a half times as great as their actual values, while assessments in the city’s more affluent neighborhoods were, on average, 40 percent of market value.

Jersey City, N.J., did not conduct a citywide real estate reassessment between 1988 and 2018 as part of a larger strategy for promoting high-end real estate development. During that time, real estate prices along the city’s waterfront soared but their owners’ tax bills remained relatively steady. By 2015, a home in one of the city’s Black and Latino neighborhoods worth $175,000 received the same tax bill as a home in the city’s downtown worth $530,000.

These are hardly exceptions. Numerous studies conducted during those years found that assessments in predominantly Black neighborhoods of U.S. cities were grossly higher relative to value than those in white areas.

These problems persist. A recent report by the University of Chicago’s Harris School of Public Policy found that property assessments were regressive (meaning lower-valued properties were assessed higher relative to value than higher-valued ones) in 97.7 percent of U.S. counties. Black-owned homes and properties in Black neighborhoods continue to be devalued on the open market, making this regressive tax, in effect, a racist tax.

The overtaxation of Black homes and neighborhoods is also a symptom of a much larger problem in America’s federated fiscal structure. By design, this system produces winners and losers: localities with ample resources to provide the goods and services that we as a nation have entrusted to local governments and others that struggle to keep the lights on, the streets paved, the schools open and drinking water safe . Worse yet, it compels any fiscally disadvantaged locality seeking to improve its fortunes to do so by showering businesses and corporations with tax breaks and subsidies while cutting services and shifting tax burdens onto the poor and disadvantaged. A local tax on local real estate places Black people and cities with large Black populations at a permanent disadvantage. More than that, it gives middle-class white people strong incentives to preserve their relative advantages, fueling the zero-sum politics that keep Americans divided, accelerates the upward redistribution of wealth and impoverishes us all.

There are technical solutions. One, which requires local governments to adopt more accurate assessment models and regularly update assessment rolls, can help make property taxes fairer. But none of the proposed reforms being discussed can be applied nationally because local tax policies are the prerogative of the states and, often, local governments themselves. Given the variety and complexity of state and local property tax laws and procedures and how much local governments continue to rely on tax reductions and tax shifting to attract and retain certain people and businesses, we cannot expect them to fix these problems on their own.

The best way to make local property taxes fairer and more equitable is to make them less important. The federal government can do this by reinvesting in our cities, counties and school districts through a federal fiscal equity program, like those found in other advanced federated nations. Canada, Germany and Australia, among others, direct federal funds to lower units of government with lower capacities to raise revenue.

And what better way to pay for the program than to tap our wealthiest, who have benefited from our unjust taxation scheme for so long? President Biden is calling for a 25 percent tax on the incomes and annual increases in the values of the holdings of people claiming more than $100 million in assets, but we could accomplish far more by enacting a wealth tax on the 1 percent. Even a modest 4 percent wealth tax on people whose total assets exceed $50 million could generate upward of $400 billion in additional annual revenue, which should be more than enough to ensure that the needs of every city, county and public school system in America are met. By ensuring that localities have the resources they need, we can counteract the unequal outcomes and rank injustices that our current system generates.

Andrew W. Kahrl is a professor of history and African American studies at the University of Virginia and the author of “ The Black Tax : 150 Years of Theft, Exploitation, and Dispossession in America.”

The Times is committed to publishing a diversity of letters to the editor. We’d like to hear what you think about this or any of our articles. Here are some tips . And here’s our email: [email protected] .

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The Hidden-Pregnancy Experiment

By Jia Tolentino

An illustration of a pregnant woman looking at her iPhone as it connects to the data points around her.

Shortly after I became pregnant with my second child, in the fall of 2022, I decided to try a modest experiment. I wanted to see whether I could hide my pregnancy from my phone. After spending my twenties eagerly surveilling and sharing the details of my life online, I had already begun trying to erect some walls of technological privacy: I’d deleted most apps on my phone and turned off camera, location, and microphone access for nearly all of the ones that I did have; I had disabled Siri—I just found it annoying—and I didn’t have any smart devices. For the experiment, I would abide by some additional restrictions. I wouldn’t Google anything about pregnancy nor shop for baby stuff either online or using a credit card, and neither would my husband, because our I.P. addresses—and thus the vast, matrixed fatbergs of personal data assembled by unseen corporations to pinpoint our consumer and political identities—were linked. I wouldn’t look at pregnancy accounts on Instagram or pregnancy forums on Reddit. I wouldn’t update my period tracker or use a pregnancy app.

Nearly every time we load new content on an app or a Web site, ad-exchange companies—Google being the largest among them—broadcast data about our interests, finances, and vulnerabilities to determine exactly what we’ll see; more than a billion of these transactions take place in the U.S. every hour. Each of us, the data-privacy expert Wolfie Christl told me, has “dozens or even hundreds” of digital identifiers attached to our person; there’s an estimated eighteen-billion-dollar industry for location data alone. In August, 2022, Mozilla reviewed twenty pregnancy and period-tracking apps and found that fifteen of them made a “buffet” of personal data available to third parties, including addresses, I.P. numbers, sexual histories, and medical details. In most cases, the apps used vague language about when and how this data could be shared with law enforcement. (A 2020 FOIA lawsuit filed by the A.C.L.U. revealed that the Department of Homeland Security had purchased access to location data for millions of people in order to track them without a warrant. ICE and C.B.P. subsequently said they would stop using such data.) The scholar Shoshana Zuboff has called this surveillance capitalism , “a new economic order that claims human experience as free raw material for hidden commercial practices of extraction, prediction, and sales.” Through our phones, we are under perpetual surveillance by companies that buy and sell data about what kind of person we are, whom we might vote for, what we might purchase, and what we might be nudged into doing.

A decade ago, the sociology professor Janet Vertesi conducted a more rigorous form of the hidden-pregnancy experiment. Using an elaborate system of code words and the anonymous browser Tor, she managed to digitally hide her pregnancy all the way up to the birth of her child. In an article about the experience, for Time , she pointed to a Financial Times report, which found that identifying a single pregnant woman is as valuable to data brokers as knowing the age, gender, and location of more than two hundred nonpregnant people, because of how much stuff new parents tend to buy. She also noted that simply attempting to evade market detection—by, for example, purchasing stacks of gift cards in order to buy a stroller—made her and her husband look as though they were trying to commit fraud.

I wasn’t going to do anything so strict or elaborate. I’d allow myself to text and send e-mails about my pregnancy, and to talk about it with my phone nearby. I assumed that, eventually, it would notice; I’d just wait and see when a diaper ad popped up on Instagram. I liked the idea of establishing a buffer zone between my psyche and the object that most closely monitors it. I found it almost shocking to remember that this was possible.

Pregnancy tends to erode both your freedom and your privacy. Past a certain point in your second trimester, strangers will begin reaching toward your stomach and telling you about the real difference between boys and girls. But I had eluded this during my first pregnancy, because COVID hit before I started showing. In the months that followed, I began to feel the difference between witnessing something and surveilling it, and to recognize that the most pleasurable moments in my life had occurred out of the reach of any oversight. I had felt then an almost psychedelic sense of autonomy; time was dilating, and the slow bloom inside me was beyond anyone’s reach. I wanted to see if I could feel anything like that again.

During pregnancy, and in the early days of parenthood, one is both the object and the conductor of intense surveillance. Last year, the artist and filmmaker Sophie Hamacher co-edited an anthology of writing on the subject, called “ Supervision ,” which was published by M.I.T. Press. “As I became absorbed with tracking and monitoring my child,” Hamacher writes in the preface, “I was increasingly aware that I was a subject of tracking and monitoring by others: advertisers, medical professionals, government entities, people on the street. I began to wonder about the relationship between the way I watched her and the ways we were being watched.” Surveillance encompasses both policing and caretaking, Hamacher notes. In practice, its polarized qualities—“beneficial and harmful, intimate and distanced”—intertwine. Baby monitors use technology developed for the military. Many contemporary models run on CCTV.

Most American households with young children use baby monitors or trackers; two recent surveys put market penetration at seventy-five and eighty-three per cent, respectively. (Both surveys were conducted by companies that make these devices.) And there are now countless other ways that technology will help you to observe and scrutinize your child: nanny-cam Teddy bears, G.P.S. stroller accessories, scales that track your baby’s weight over time, disks that can be affixed to diapers and which will notify you if your baby rolls onto his stomach while he’s asleep. Increasingly, such products use A.I. to detect signs of distress. “The need to know whether a child is safe and well is perfectly natural, which makes the nature of such surveillance appear innocent,” the writer and scholar Hannah Zeavin notes in “Family Scanning,” one of the essays in “Supervision.” But, she adds, “these technologies conceal the possibility of false positives, disrupted emergency services, and of collaboration with state forces—wittingly or unwittingly—all in the name of keeping children safe.” As a general rule, these devices don’t lead to better outcomes for the babies they monitor. More often—like social media, which promises connection as a salve for the loneliness created by social media—parenting tech exacerbates, even calls into existence, the parental anxieties that it pledges to soothe.

This has become a common pattern in contemporary life. Nearly a fifth of U.S. households are estimated to use doorbell cameras, many of them from Ring, the Amazon-owned company that has expanded its reach through police partnerships and a dedicated app that encourages users to post footage of strangers. Ring cameras haven’t made neighborhoods measurably safer, but they have made users measurably more paranoid, and placed more people, sometimes with grave outcomes, in contact with the police. Until recently, police could readily access surveillance footage from the Ring network without a warrant by posting requests on the app. It also gave its own employees and third-party contractors “ ‘ free range ’ access” to view and download videos from users’ homes.

In 2015, the company Owlet started selling a two-hundred-and-fifty-dollar Smart Sock, which monitored babies’ heart rates and oxygen levels, and alerted parents if these figures were abnormal. Although the company insists that it has made clear that the product is not intended to “treat or diagnose” sudden infant death syndrome—and there is no evidence that it reduces the risk of SIDS occurring—such devices are sometimes referred to as “ SIDS monitors.” But, in 2017, an opinion piece in the Journal of the American Medical Association cautioned physicians against recommending the product. “There are no medical indications for monitoring healthy infants at home,” the authors wrote. The device, they noted, could “stimulate unnecessary fear, uncertainty, and self-doubt in parents about their abilities to keep their infants safe.” The following year, a study in the same journal found “concerning” inaccuracies in oxygen readings. When Owlet went public, in February, 2021, the company had a valuation of more than a billion dollars; later that year, the F.D.A. issued a warning letter that the Smart Sock wasn’t an authorized medical device, and the company pulled it off the market. A million units had already been sold. The following year, Owlet launched a new version, called the Dream Sock, which would receive F.D.A. approval. Most of the reviews for the Dream Sock exude profound gratitude. Parents write about the peace of mind that comes from knowing the baby is being constantly monitored, about not knowing what they would do if the device didn’t exist.

Surveillance capitalism, Zuboff writes, “aims to impose a new collective order based on total certainty.” But little is certain when it comes to babies. The control that we feel when we’re engaged in surveillance almost always proves illusory, though the control, or at least the influence, that others exert on us through surveillance is real.

It is not a coincidence that Roe v. Wade, a ruling grounded in the right to privacy, was overturned at a time when privacy in the U.S was on its conceptual deathbed. There are other legal principles that might have served as a stronger foundation for abortion rights: the right to equal protection, or the right to bodily integrity. As Christyne Neff wrote, in 1991, the physical effects of an ordinary pregnancy and delivery resemble those of a severe beating—flesh lacerated, organs rearranged, half a quart of blood lost. Can the state, she asked, rightfully compel a person to undergo this?

Since Roe fell, two years ago, fourteen states have claimed that power in absolute terms, banning abortion almost completely. Two states have successfully passed abortion-vigilante laws, which confer the power of carceral supervision on the public. Indiana’s attorney general has argued that abortion records should be publicly available, like death records; Kansas recently passed a law that would require abortion providers to collect details about the personal lives of their patients and make that information available to the government. Birth control and sex itself may be up next for criminal surveillance: the Heritage Foundation , last year, insisted, on Twitter, that “conservatives have to lead the way in restoring sex to its true purpose, & ending recreational sex & senseless use of birth control pills.”

For many women in America, pregnancy was a conduit to state surveillance long before the end of Roe. Poor women, especially poor nonwhite women, are often drug-tested during pregnancy, and sometimes during labor and delivery, without their informed consent. Women who take drugs during pregnancy have been charged with child abuse or neglect, including in cases in which the drugs were legal; women who have miscarried after taking drugs have been charged with manslaughter, even homicide, even when no causal link was proved. Sometimes this happens because the woman in question had responded to billboards and service announcements promising to help pregnant people who are struggling with substance use. In multiple states, women have been taken into custody when the safety of the fetus was called into question. “To be pregnant and poor in the United States is to play a game of roulette with one’s privacy, presumed confidential relationship with medical providers, and basic constitutional and medical rights,” the law professor Michele Goodwin writes in “ Policing the Womb ,” from 2020.

Goodwin describes the case of a woman in Iowa named Christine Taylor, who, in 2010, as a twenty-two-year-old mother of two, was accused of attempted feticide after she fell down the stairs while pregnant. Part of the evidence cited by the police was that she reportedly told a nurse that she hadn’t wanted the baby. (Ultimately, prosecutors decided not to press charges.) The carceral surveillance of pregnancy entails the criminalization of ambivalence, the inspection of these innermost desires. But the deepest truths about motherhood seem to me to be rooted in conflicting, coexisting emotions: nightmare and rapture in the same moment during labor, the love and despair that box each other at night in the weeks that follow, the joy of cuddling my nine-month-old undergirded by the horror of knowing that other babies are starving and dying in rubble. Before I had my first child, I had badly wanted to get pregnant. I had planned for it, prepared for it, hoped for it. Still, when I saw the positive test result, I cried.

My modest experiment went surprisingly smoothly. Because I’d had my first child not long before, this time I didn’t need to buy anything, and I didn’t want to learn anything. I smooth-brained my way to three months, four months, five; no diaper ads. I called up a lawyer and data-privacy specialist named Dominique Shelton Leipzig to get her perspective. Globally, she told me, we generate 2.5 quintillion bytes—that’s eighteen zeroes—of data per day. “The short answer is, you probably haven’t hidden what you think you have,” she said. I told her about the rules I’d set for myself, that I didn’t have many apps and had bought nothing but prenatal vitamins, and that Instagram did not appear to have identified me as pregnant. She paused. “I’m amazed,” she told me. “If you didn’t see any ads, I think you might have succeeded.” I congratulated myself by instantly dropping the experiment and buying maternity pants; ads for baby carriers popped up on my Instagram within minutes.

I had felt little satisfaction hiding from the ad trackers—if anything, I’d only become more conscious of how much surveillance I was engaged in, as both subject and object, and how much more insidious the problem was becoming. We rarely have a clear understanding of what we’re doing when we engage in surveillance of ourselves or others. Life360, an app that’s used by more than sixty million people and is marketed as an easy way to track your child’s location via their smartphone, was found in 2021 to be selling raw location information to data brokers. (The company said it now sells only aggregate data.) In a Pew survey from 2023, seventy-seven per cent of Americans said they had very little to no trust in how social-media executives handle user data, and seventy-one per cent were concerned about how the government uses it. In another survey, ninety-three per cent of Americans said they wouldn’t buy a doorbell camera if it sold data about their family. People just want to be safer. I had wanted security, too, and affirmation—and I had wanted to be a writer. I had disclosed so much of my life to people I’ll never know.

My husband and I had not bought a baby monitor for our first child, a choice that satisfied his desire to not buy things and my desire to insist that certain aspects of experience are fundamentally ungovernable. But shortly after the second child was born she developed eczema, and started scratching her sweet, enormous cheeks in her sleep. One morning, my husband went to her and found that she’d clawed her face open, leaving blood smudged all over her sleep sack and smeared all over her face. “We need a video monitor!” I wailed, already Googling options. “We need to buy a video monitor today.”

We didn’t buy one, but for weeks I regretted it and second-guessed myself. And I surveilled the baby with technology in other ways all the time. In the early weeks, I relied on an app to tell me how much milk she’d drunk and how many soiled diapers she’d had that day—activities that I myself had witnessed just hours before. I felt like a Biblical angel with a thousand eyes, somehow unable to see anything. I took pictures because I knew I would have no memory of the precise contours of this exact baby in a month. When she didn’t seem hungry enough, I panicked, obsessing over every feed.

“What’s the line between pathological self-surveillance and care for a newborn? Is there one?” Sarah Blackwood, an English professor at Pace University, asks, in “Supervision.” Blackwood contrasts the “fantasy of efficiency and sterility” built into parenting tech with the “psychic state of watchfulness so many mothers find themselves in”—a state that is “metastatic, fecund, beyond.” One afternoon, my husband took the baby from me: she was sobbing, and I was incoherently frantic, trying to get her to eat. She was O.K., he told me; she’d eat when she needed to. But I know what’s good for her, and it’s my job to make her do it, I thought, furious. Around the fringes of my consciousness, I felt a flicker of understanding about how this idea that everything was controllable had become so ubiquitous, how we had confused coercion with care. ♦

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